बेगानी

ना मिलता है राहत कहीं,

तू जो बेखबर हुई।

साथ देते देते जाने कहां खो गई,
क्या बात थी जो बीती बात हो गई।

जिसे समझा था अपना बेगानी बनी।

जाने क्यों ?

जाने क्यों?

जाने क्यों ,न जाने क्यों
जीत के भी हार जाता हूं ,मैं
और हार के भी जीत जाता है तू,

ये मेरी फितरत है जीत कर हारने की,

या तेरी चाल है हार कर जितने की।

काजू खाने फायदे और नुकसान

नमस्कार दोस्तों
आइए आज हम बात करते है काजू के बारे में
की काजू cashew खाने के क्या फायदे है।

और इसको खाने के क्या नुकसान है,

और ये कहां से आए है ?

काजू किसके लिए फायदेमंद है?

काजू किसके लिए नुकसान दायक है?


यूं तो काजू का इतिहास बहुत पुराना है,काजू को 16वीं शताब्दी में ब्राजील से पुर्तगाली भारत लेकर आए थे।
काजू का इस्तेमाल हम अक्सर खाने में करते है।
सब्जियों में, चटनी में,sweets में एवम पुलाव बनाने में करते हैं।

काजू खाने के फायदे…
काजू का सही मात्रा में उपयोग हमें विभिन्न तरह के बीमारियों से बचाता है।
काजू में bitamin E पाए जाते हैं,जो एंटी एजिंग का काम करते हैं।काजू में हृदय रोग में ,blood pressure में
Hair growth होने में एवम
skin के लिए भी फायदेमंद होता है।
काजू में bitamins एवम minirals भरपूर मात्रा में पाए जाते है।
इसलिए गर्भवती महिला को भी खाने में दिया जाता है।
जिससे की बच्चा स्वस्थ पैदा हो।
काजू bloodsugar,एवम bloodpressure को control करने में काम आता है।
जिस तरह काजू खाने के विभिन्न फायदे है ,
उसी तरह इसके कुछ नुकसान भी है।

काजू खाने से नुकसान…

काजू का अधिक मात्रा में सेवन नुकसानदायक है।

1) इसके अधिक मात्रा में प्रयोग से bloodpressure को high कर सकता है, क्योंकि इसमें sodium की मात्रा अधिक होती है।

2) आप अगर सिर दर्द या माइग्रेन से पीड़ित हैं तो ये अधिक मात्रा में सेवन करना आपके लिए नुकसान दायक हो सकता है इससे आपके सिर का दर्द बढ़ सकता है।
आपका माइग्रेन बढ़ सकता है। क्योंकि काजू में अमीनो एसिड होता है जो सिर दर्द को बढ़ाता है।

3) इसके अधिक प्रयोग से आपके वजन कम करने की चाहत को धक्का लग सकता है।
इससे आपका वजन बढ़ सकता है,क्योंकि इसमें कैलोरी बहुत अधिक मात्रा में पाया जाता है।
और अंत में इसका सेवन हम सही अनुपात में नहीं करेंगे तो
हमारा पेट भी खराब हो सकता है ।
धन्यवाद

साथ देना हमारा

http://ajbs.in/2021/06/07/sath-dena-hamara/

मेरी आवारगी मेरा निक्कमापन

मेरी आवारगी और मेरा निक्कमापन

यारों ये अब फितरत सी हो गई लगती है।

उनकी गलियों का चक्कर ,

यारों किस्मत सी हो गई लगती है।

जो भी देखता आवारा समझता है,

क्या आपने भी आवारा समझ लिया ।

आपके खातिर ही ये फितरत बनी,

आप की चाहत ने ही निक्कमा किया।

शायद किसी दिन समझोगे इस बात को

मेरी आवारगी और मेरा  निक्कमापन

कुदरत का नियम

क्या खेल रचाया है ,जो तुमसे मिलाया है,

तुमने भी तो क्या, मन भरमाया है।

तेरी नफरत को भी, दिल से लगाया है,

क्या दिल ये बनाया है ,

जो दिल से लगाया है।

ना नजरों से देखी ,ना नजर मिलाया है,

क्या खूब बहाया है ,आंखो में आया है।

क्या खेल रचाया है ,जो तुमसे मिलाया है।

प्रकृति

तू रूप है

तेरा वजूद है कोई मिलान नहीं
तू सब में है पर कोई नाम नहीं।

संग तू है पर संग नहीं,

रंग है तू पर रंग नहीं।

तू रूप है पर तेरा कोई रूप नही,

नजरंदाज कर दूं तुझे
पर ऐसी कोई बात नहीं।

जीवन का खेल

जीवन है दो पल का

फिर भी कामना अनेकों है
ये तो खेल है जीवन का
कोई जान न पाया है ।

फिक्र है सारे जग की
पर जाने ना ये माया है।

सब करता मेरा मेरा

जो दो पल साया है।

अब बस भी कर दो मानव

क्या तेरा क्या मेरा है?

जीवन है दो पल का,

फिर भी कामना अनेकों है।
ये तो खेल है जीवन का
कोई जान न पाया है ।

अब उन्हें तन्हाई चाहिए!

अब उन्हें तन्हाई चाहिए ,

अब उन्हें तन्हाई चाहिए,

समझ लो उन्हें तेरी जरूरत है।

क्या वक्त भी ठहर सा गया है
या ये पल कट ही नहीं रहा है।

मैंने जो समझा है क्या उन्होंने ये जाना है,

तंग मन की गलियां है और बाहर सारा जमाना है।

क्या बात है की उन्हें तन्हाई चाहिए?

मेरे सब्र का नाफरमानी चाहिए।

क्या उन्होंने बदला लेने की ठानी है,

क्या उन्होंने बदला लेने की ठानी है,

उनके खातिर पेश ये मेरी जिंदगानी है
उनके खातिर पेश ये मेरी जिंदगानी है

विश्व चेतना