मनवीर के दोहे

मैं मुरख अति अज्ञानी,

तुम बिन कौन जाने स्वामी

सत्य की परख सत्य करे,

सत्य को कौन विचार।

सत्य –सत्य में भेद को ,

जाने सत्य आचार।

सेना युद्ध करे रण में,

असली युद्ध तो मन में।

नाच नचावे नटुआ

मन नचावे बटुआ

विचार

दूसरों से तो जीत सकता हूं

पर

अपने मन से कैसे जीतें

जो की

हमारे सारे कमजोरी को जानता है।

************ “मनवीर” *****

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ससुरा कमजोरी तो कमजोरी अपने अंदर की अच्छाई को भी नहीं छोड़ता है,

रह – रह के सब की बैंड बजाता रहता है।

जरूरत

जिधर देखो उधर जरूरतमंद है

किसी को इसकी जरूरत ,

किसी को उसकी जरूरत है।

किसी को दिन की जरूरत,

किसी को रात की जरूरत,

जिधर देखो उधर जरूरतमंद है ।

किसी को धन की जरूरत है,

किसी को तन की जरूरत है।

किसी को साथ की जरूरत है

किसी को बात की जरूरत है।

जिधर देखो उधर जरूरतमंद है।

किसी को प्यार की जरूरत है,

किसी को यार की जरूरत है।

किसी को धन अंबार की जरूरत है,

किसी को रोटी की जरूरत है,

जिधर देखो उधर जरूरत मंद है।

किसी को घर की जरूरत है,

किसी को शहर की जरूरत है।

किसी को पानी की जरूरत है,

किसी को वाणी की जरूरत है।

किसी को तन्हाई की जरूरत है,

किसी को महफिल की जरूरत है।

जिधर देखो उधर जरूरतमंद है।

भिखारियों की इस जहां में दाता कहां खोजे

जहां हर एक भिखारी अपने को दाता कहता है।

किससे कहे

किसको कहे हाले दिल ?

यहां तो सभी हाल बेहाल है।

किससे करे शिकायत ?

यहां शिकायत सबको है।

किसको राजदार बनाए?

सभी को तलाश ए राजदार है।

किससे करूं दुआ की उम्मीद?

दुआ की जरूरत सबको है।

किससे भाईचार ,किससे इंतकाम?

यहां तो सभी का इंतजाम हुए बैठे हैं।

मौत के दरवाजे पे दुश्मनी किससे निभाए?

यहां तो सभी को इंतजार ए मौत है।

ना सुबह की रौशनी रास आई ,

ना रात की चांदनी रास आई,

जब से तेरा दीदार हुआ,

मुझको कुछ नहीं भाई।

किससे कहे हाले दिल ?

यहां तो सभी बेहाल है।

जाने दो

अब छोड़ भी दो जाने दो

हो गई है शाम सनम

कल आऊंगी वादा है

मत कर दीवानापन

वादा

ए मेरे महबूब मेरी दिलरुबा

तेरे आने से रौशन हुई ये जहां है,

क्यों तू जाने की जिद करती है।

तेरे आने के वादे ,कई बार किए तूने,

तू नहीं आती ,तो मेरी जान निकल जाती है

अब छोड़ भी दो जाने दो

हो गई है शाम सनम।

फिर भी तेवर गया नहीं

ना तख्त रहा ना ताज रही,

ना रहा कोई औकात,

फिर भी तेवर गया नहीं।

ना कुर्सी रही ना पद रहा,

ना रहा कोई साथ,

फिर भी तेवर गया नहीं।

ना जवानी रही ना ताकत रहा,

ना रही ओ बात,

फिर भी तेवर गया नहीं।

ना डाली रही ना तना रहा

ना रही फूलों वाली बात,

फिर भी तेवर गया नहीं।

ना दिल रहा ना दिलबर रही,

ना रहा कोई जज्बात ,

फिर भी तेवर गया नहीं।

ना भविष्य रही बस इतिहास रहा,

ना बचा कोई इंतकाम,

फिर भी तेवर गया नहीं।

तेरी भक्ति

तेरी भक्ति करूं तेरी पूजा करूं

तेरे दर आके तेरा दर्शन करूं ।

मेरे मोहन .. मेरे मोहन

तू ही विश्वास है,

तू ही है प्रार्थना,

तुझ में दिल ये लगा के तुझ से प्रेम करूं।

Mohan

तेरी भक्ति …….

तेरे दर आके…..

मेरे मोहन…

तेरी बातें सुनूं,

तेरा ध्यान धरूं

तेरी चरणों में रहकर तेरी सेवा करूं।

तेरी भक्ति…..

तेरे दर आके….

मेरे मोहन…..

दयालु मां

आया हूं तेरी शरण में माता लेके ये आस

पूरी करेगी मेरी मुरादे मन में है विश्वास

मां मेरी मां ओ मां मेरी माता..

तेरी नजरों में रहना मुझको

तुझ से दूर नहीं जाना मां

मैंने सुना है सबसे माता

करती है पूरी सबकी आशा

मां मेरी मां ओ मेरी माता

मां मेरी मां ओ मेरी माता

आया जो भी तेरे दर पे माता

खाली झोली भरके पाता

मैं भी आया तेरे दर पे माता

तेरी चरणों में जगह पाने माता

तू पूरी करेगी मेरी आशा

मां ओ मेरी मां मेरी माता

किसके दर को जाऊं मां

तेरे दर नहीं तो किसके दर को जाऊं मां

एक तेरा सहारा जगजननी,और किसे ध्याऊं मां

तू कल्याणी , तू वरदायनी

तू ही तो है मेरी मां

जगजननी

इक तेरा दर ही मेरा सहारा

और किधर को जाऊं मां

तेरे दर नहीं तो किसके दर को जाऊं मां

तुझको नहीं तो किसको

अपना दर्द सुनाऊं मां

तेरे दर पे आके खड़ा हूं ,

तेरे चरणों में पड़ा हूं।

तेरी मर्जी जो तू चाहे

वर दे या

तू खाली लौटा दे,

तू ना सुनेगी तो कौन सुनेगा

अपना झोली कहां फैलाऊं मां

तेरे दर नहीं तो किसके दर को जाऊं मां

किसकी कविता

किसकी कविता किसकी कहानी हो

किसने लिखा तुम्हे ,

किसकी जिंदगानी हो

किसके यादों से निकली ,

किसकी तुम जबानी हो।

यादें

कितने अरमानों को अपने अंदर पाली हो,

किसकी मुस्कुराहट किसकी बैचेनी हो,

किसकी कविता किसकी कहानी हो।

कितनी शिद्दत से निकली, कैसी पहेली हो,

जब भी देखा तुम्हे लगती नई नवेली हो।

किसकी कविता किसकी कहानी हो।

विश्व चेतना

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