HELLO DOSTON aaj hm bat karenge ATM se sambandhit vishay par aksar ham log jab atm jate hain to atm me cash nahi rahta hai or hame dusre tisre atm me jana parta hai ,cash ke liye jo ki bahut hi galat asar dalta hai, or aaj kal bank or atm apne sab work ke […]
ATM ME CASH NAHI TO JURMANA RBI
आजादी
आजादी तो आजादी होती है दोस्तों
मगर जिसने संस्कार में गुलामी पाया हो
उसके लिए आजादी क्या ?
आजादी के परवाने आजादी के लिए क्या कर नहीं गुजरते,
लेकिन जो जन्म से ही बंधा हो, उसके लिए आजादी क्या ?
अक्सर इस दुनिया में बिरले ही मिलते हैं आजाद,
जो जान बूझ कर बंधन में बंधे हैं,
उसके लिए आजादी क्या ?
SSC RECRUITMENT
वक्त का उल्लू
वक्त का उल्लू देख रहा है,
तू जो जज्बातों से खेल रहा है
रात घनेरा दिन का राही ,
क्यों तू आंखे खोल रहा है,
वक्त का उल्लू देख रहा है।
तेरी करनी तेरी भरनी,
क्यों तू बीच में डोल रहा है।
वक्त का उल्लू देख रहा है।

रात दिन का रैन बसेरा
ये जो दिल खिलौना तेरा
क्यों तू इससे खेल रहा है।
वक्त का उल्लू देख रहा है।
तूने दिया किसको अपनापन
जो ये तुम खोज रहा है।
वक्त का उल्लू देख रहा है।
मुकद्दर का मारा
क्या बात मुकद्दर की करूं
अब समंदर भी कम पड़ने लगे हैं।
मेरी वफा का जो सिला दिया तूने
अब बारिश को भी आंसू आने लगे हैं।
इतिहास नहीं बनाना था मुझे
पर मेरे प्रेम को इतिहास बना दिया तूने।
मेरे दिल के ख्वाहिशों को जिंदा दफना दिया,
मुकद्दर का शहंशाह बनना था मुझे,
पर तूने मुकद्दर का मारा बना दिया।
पर तूने मुकद्दर का मारा बना दिया।
ऐसा सुबह कहां से लाऊं
अच्छे नहीं हालात दिल के
क्या जुगत लगाऊं
कैसे हो मिलन मनवीर
क्या क्या तौफे लाऊं।
जी के जिंदगी अपनी ना हुई
तो क्या मौत को गले लगाऊं।
सुंदर वचन , सुंदर चितवन
तो क्या सुंदरता का राग अलापु
रात और दिन का हो मिलन
ऐसा सुबह कहां से लाऊं
क्या कहा
क्या कहा तुमने भूल जाऊं तुम्हे
याद ना आऊं, याद ना करूं तुम्हे।
साथ छोड़ के जाना है तुझे,
अब साथ नहीं देना है तुम्हे।
मेरी बातों में ना आना तुम्हे,
अपनी ख्यालों में भी ना लाना तुझे।
वो अक्सर
कभी बातों का मतलब
कभी ख्यालों का मतलब
वो अक्सर पूछती है।
कभी आवाज बनकर
कभी सांस बनकर
वो अक्सर गूंजती है।
कभी परदे में रहकर
कभी बेपर्दा होकर
वो अक्सर दिखती है।
कभी बातों की मिर्ची
कभी प्रेम का मरहम
वो अक्सर टोकती है।
उलझन
क्या लिखूं ए दिल…., है बड़ी मुश्किल
रात दिन के बात में उलझन बनी
दिन निकलता नहीं रात जाती नहीं
इश्क सी हो गई है अंधेरों से
हम तो दिन को भी रात समझते हैं
क्या लिखूं ए दिल…. ,है बड़ी मुश्किल।
बात कुछ भी नही,बड़ी बात है
बात कुछ भी नही,बड़ी बात है।
ये समझ के ना समझना ,
बड़ी बात है..
खेल
ना तुमने जाना है ना हमने जाना है
ये खेल विधाता ने क्या खूब रचाया है
किसी ने पाया जन्नत तो कोई नरक पाया
किसी को मिली माया किसी ने पाया काया