क्या कहा तुमने भूल जाऊं तुम्हे
याद ना आऊं, याद ना करूं तुम्हे।
साथ छोड़ के जाना है तुझे,
अब साथ नहीं देना है तुम्हे।
मेरी बातों में ना आना तुम्हे,
अपनी ख्यालों में भी ना लाना तुझे।
क्या कहा तुमने भूल जाऊं तुम्हे
याद ना आऊं, याद ना करूं तुम्हे।
साथ छोड़ के जाना है तुझे,
अब साथ नहीं देना है तुम्हे।
मेरी बातों में ना आना तुम्हे,
अपनी ख्यालों में भी ना लाना तुझे।
ना तुमने जाना है ना हमने जाना है
ये खेल विधाता ने क्या खूब रचाया है
किसी ने पाया जन्नत तो कोई नरक पाया
किसी को मिली माया किसी ने पाया काया
इक वो वक्त था और एक ये वक्त है मनवीर
तब भरी रहती थी,अब बचती नही!
जिंदगी का बीता हुआ दौर सबको सुहाना लगता है,
और सब उसको फिर से जीना चाहता है।
गए हुए वक्त को लाने के लिए सब परेशान रहते हैं,
इसीलिए तो मेरे दोस्त पागल समझते है।
क्लेश कष्ट करुणा
मरणासन्न बुढ़ापा तरुणा।
लू पेड़ छाया
कंचन काया माया।
सब्र विश्वास मीठा
बेसब्र अविश्वास तीखा।
नायक,जीवन कठिन
जीवन मृत्यु पलछिन्न।
अपमान अनादर प्रतिष्ठा
सत्य कर्म निष्ठा।
अविवेक क्रोध घमंड
अंत प्रलय तांडव।
भय घृणा,तृष्णा
अंत समय सब कृष्ण।
कौन हूं मैं मुझे किसकी तलाश है?
दिन है रात है ,
दिल में जज़्बात है,
फिर भी न जाने क्यों ?
कौन हूं मैं मुझे किसकी तलाश है?
रिश्ते हैं नाते है ,
और प्यार पाते हैं,
फिर भी ना जाने क्यों,
कौन हूं मैं मुझे किसकी तलाश है?
जानी अनजानी राहें है,
सपने ढेर सारे है।
फिर भी ना जाने क्यों?
कौन हूं मैं मुझे किसकी तलाश है?
मृत्यु है अमरता है,
प्रेम है समरसता है।
फिर भी ना जाने क्यों?
कौन हूं मैं मुझे किसकी तलाश है।
अंत है अनंत है, देव है संत है।
जड़ है चेतन है और आनंद है।
फिर भी ना जाने क्यों?
कौन हूं मैं मुझे किसकी तलाश है?
इस फरेबी संसार से तू
ऐसे मत जुड़ जाना
जब आए तेरी आजादी
उड़ना मत भूल जाना।
जिन्दगी की इस दौड़ में
संतुलन बनाए रखना ,या बड़ा बनके
खुद को खुदा मत समझना,
जब आए तेरी आजादी
उड़ना मत भूल जाना।
आग भी राख होती है ,
जिन्दगी के भी शाख होते है,
शाखों में उलझ कर खुद को हराभरा न समझना।
जब आए तेरी आजादी
उड़ना मत भूल जाना।
तेरा किरदार तुझे निभाना है
ये जीवन को जी के जाना है,
अपने किरदार में खुद को ना भूल जाना,
जब आए तेरी आजादी
उड़ना मत भूल जाना।
ये जीवन का पहेली ,
उलझाना इस का काम।
इस जीवन के पहेली में
तुम ना उलझ जाना,
जब आए तेरी आजादी
उड़ना मत भूल जाना
रास्ते कितने भी कठिन हो,
चलना मत छोड़ ,चलना मत छोड़।
बात – बात में ही बात बढ़ती है,
बूंद – बूंद ही तालाब भरती है।
इक – इक इंट से ही घर बनता है,
छोटे – छोटे पग ही बड़ी मंजिल तक
पहुंचाती है।
इसलिए रास्ते कितने भी कठिन हो,
चलना मत छोड़ ,चलना मत छोड़।
पांव के नीचे आएंगे कभी फूल तो कभी कांटे भी
इन छोटी – मोटी दुश्वारियों से डर के
चलना मत छोड़, चलना मत छोड़।
राह में आएंगे कभी ऊंचे पहाड़, कभी गहरी खाई भी,
मंजिल दूर समझ के,
चलना मत छोड़ ,चलना, मत छोड़।
हौसले बुलंद रख, दिमाग में ठंड रख,
आने वाली परेशानियों से डर के,
चलना मत छोड़, चलना मत छोड़।
अनजान नहीं है ये जहां तेरे लिए, तूने कई वार पग रखे यहां ,
अनजानी राहों को देख कर।
चलना मत छोड़ ,चलना मत छोड़।
रास्ते कितने भी कठिन हो,
चलना मत छोड़ ,चलना मत छोड़।
ऐ वक्त तेरे साथ चलने को
भरसक कोशिश कर रहा हूं
ऐसा लगता है कभी तू आगे और कभी मैं आगे निकल रहा हूं।

तू मेरे साथ है यही सोच के
कभी तन्हा कभी महफ़िल
कभी कारवां के साथ निकल रहा हूं।
तेरे साथ कदम से कदम मिला कर चलने में
अब अंधेरों को भी पार कर रहा हूं।
ऐ वक्त तेरे साथ चलने को
भरसक कोशिश कर रहा हूं
ऐसा लगता है कभी तू आगे और कभी मैं आगे निकल रहा हूं।
तेरे साथ चलते चलते मेरा उम्र गुजर रहा है
मुझे ऐसा लगता है मेरा वक्त गुजर रहा है।
आस रहती है मन में तुझ से हमेशा आगे निकलने की
इसी जद्दोजहत में समय से पहले बूढ़ा हो रहा हूं।
तेरी मेरी दौड़ का सिलसिला जारी रहेगा ,
मैं अंत तक तुझे हराने की कोशिश करता रहूंगा।
कोशिश कितनी कामयाब होती हैं।
ये देखना तुझे भी है ये देखना मुझे भी है।
ऐ वक्त तेरे साथ चलने को
भरसक कोशिश कर रहा हूं
ऐसा लगता है कभी तू आगे और कभी मैं आगे निकल रहा हूं।
तेरे साथ चलने के इन कशमकश भरी रास्तों में
कुछ उजली कुछ काली रात लिए चल रहा हूं।
जिन्दगी का इक – इक पल लगा दिया
तेरे साथ चलने में ,तू समझे ना समझे मैं समझ रहा हूं।
ऐ वक्त तेरे साथ चलने को
भरसक कोशिश कर रहा हूं
ऐसा लगता है कभी तू आगे और कभी मैं आगे निकल रहा हूं।
तेरे साथ चलने का मैं क्या मोल चुका रहा हूं ?
ये तुझे क्या पता ,क्या मैं तुझे बता रहा हूं ?
फिर भी तुझे लगता है मैं खुशी – खुशी
चल रहा हूं ।
अगर अनजान मैं भी हूं तो अनजान तू भी है। लेकिन जानता तू भी है और जानता मैं भी हूं।
ऐ वक्त तेरे साथ चलने को
भरसक कोशिश कर रहा हूं
ऐसा लगता है कभी तू आगे और कभी मैं आगे निकल रहा हूं।
तेरे साथ चलते चलते कितने अपने हुए कितने बेगाने हुए
सब से मिलते बिछड़ते साथ चल रहा हूं!
तेरे साथ साथ दौड़ते ,चलते
कभी आगे निकलते
कभी छूटती ये सांसे
पर पता नहीं चलता तू मुझे पीछे छोड़ आया या मैं आगे निकल रहा हूं।
ऐ वक्त तेरे साथ चलते चलते
मेरे साथ कोई हो ना हो
उनकी यादें साथ रहतीं है।
उन्ही यादों का सहारा लिए
साथ चल रहा हूं।
ऐ वक्त तेरे साथ चलने को
भरसक कोशिश कर रहा हूं
ऐसा लगता है कभी तू आगे और कभी मैं आगे निकल रहा हूं।
लगता है तेरा मेरा रिश्ता है कई जन्मों का
इसलिए तो तू साथ छोड़े भी मैं फिर भी साथ आ रहा हूं।
तेरा मेरा दौड़ ये कब तक चलेगा ये नहीं मुझे पता ,तो क्या पता तुझे भी नहीं???
ऐ वक्त तेरे साथ चलने को
भरसक कोशिश कर रहा हूं
ऐसा लगता है कभी तू आगे और कभी मैं आगे निकल रहा हूं।
अल्प ज्ञानी ,कुछ ना मानी।
कुछ सही कुछ ग़लत पैमानी।।
ना दिन ना रात जानि।
अल्प बोधी वयक्त अभिमानी।।
शोभा सुंदर की बात बेईमानी।
अक्खर पक्कर सब सहानी।।
तृष्णा कृष्णा घोर माया।
ना ममता ना देही काया।।
रस रंग सब उपज की खानी।
मन में बसे दिल में नाही।
दिल में बसे सब जगह पांही।।।
अनहद नाद सुवाद सबे ओर।
जिन सुना सब पाया।।
ज्ञान जगी अभिमान ना उपजे।
सत्य की खोज में हरदम रहे।।
प्रेम की भाषा प्रेम से जाने।
प्रेम ही प्रेम , प्रेममय वाणी।।
बहुत कुछ झेला है देश ने
अब बर्दाश्त नहीं कर पाता हूं,
ऐ भारत माता तू कहे तो ,
अब डंडा लेके चलता हूं।
लूटता आया है कई सदी से,
अब लूटने को क्या खाक रहा
रहम रहम के चक्कर में
रहमोकरम पर ही छोड़ा
क्या कम थी पहले परेशानी ,
जो तुमने और बढ़ाई।
जाति ,धरम, मजहब,
ये सब लगते उलुल जुलुल।
इसने खींचा उसने खींचा,
देश का बंटाधार किया।
जब रहेगा ना ये देश तो ,
आसमान में रहोगे क्या?
अब हमें नहीं चाहिए तेरी समझदारी ,
अपनी अपने पास रखो।
हिन्दू ,मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई सुन लो
गद्दारों की नहीं ये भूमि
गद्दारों को कहो कहीं और रहे।
सबको झेला है देश ने ,
अब बर्दाश्त नहीं कर पाता हूं।
ऐ भारत माता तू कहे ,
तो डंडा लेके चलता हूं।
अपना झोला भरने के चक्कर
देश का बंटाधार किया
अपने हिसाब से चलाने के चक्कर में
देश का हुआ हाल बुरा।
अब तो तू नींद से जागो
जागने में क्यूं देर किया।
अब नहीं जागोगे वीर सपूतों
तो ये शमशान हुआ।
सबको झेला है देश ने
अब बर्दाश्त नहीं कर पाता हूं,
ऐ भारत माता तू कहे तो डंडा
लेके चलता हूं।