बर्दाश्त

बहुत कुछ झेला है देश ने
अब बर्दाश्त नहीं कर पाता हूं,
ऐ भारत माता तू कहे तो ,
अब डंडा लेके चलता हूं।

लूटता आया है कई सदी से,
अब लूटने को क्या खाक रहा
रहम रहम के चक्कर में
रहमोकरम पर ही छोड़ा

क्या कम थी पहले परेशानी ,
जो तुमने और बढ़ाई।

जाति ,धरम, मजहब,
ये सब लगते उलुल जुलुल।

इसने खींचा उसने खींचा,
देश का बंटाधार किया।

जब रहेगा ना ये देश तो ,
आसमान में रहोगे क्या?

अब हमें नहीं चाहिए तेरी समझदारी ,

अपनी अपने पास रखो।

हिन्दू ,मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई सुन लो
गद्दारों की नहीं ये भूमि
गद्दारों को कहो कहीं और रहे।

सबको झेला है देश ने ,

अब बर्दाश्त नहीं कर पाता हूं।
ऐ भारत माता तू कहे ,
तो डंडा लेके चलता हूं।

अपना झोला भरने के चक्कर
देश का बंटाधार किया

अपने हिसाब से चलाने के चक्कर में
देश का हुआ हाल बुरा।

अब तो तू नींद से जागो
जागने में क्यूं देर किया।
अब नहीं जागोगे वीर सपूतों
तो ये शमशान हुआ।

सबको झेला है देश ने
अब बर्दाश्त नहीं कर पाता हूं,
ऐ भारत माता तू कहे तो डंडा
लेके चलता हूं।

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