क्या कहूं
किस बात की दुहाई दूं
दिल जिगर जान की
या तेरे फरमान की।
क्या कहूं?
किस बात की बधाई दूं
पुराने गहरे जख्म की
या नए बने घाव की।
क्या कहूं?
क्या क्या दर्द दिखाऊं
अपनी आजादी की
या अपनी गुलामी की
क्या कहूं
किस बात की दुहाई दूं
दिल जिगर जान की
या तेरे फरमान की।
क्या कहूं?
किस बात की बधाई दूं
पुराने गहरे जख्म की
या नए बने घाव की।
क्या कहूं?
क्या क्या दर्द दिखाऊं
अपनी आजादी की
या अपनी गुलामी की
नमस्कार दोस्तों
आइए आज हम बात करते है काजू के बारे में
की काजू cashew खाने के क्या फायदे है।
और इसको खाने के क्या नुकसान है,
और ये कहां से आए है ?
काजू किसके लिए फायदेमंद है?
काजू किसके लिए नुकसान दायक है?
यूं तो काजू का इतिहास बहुत पुराना है,काजू को 16वीं शताब्दी में ब्राजील से पुर्तगाली भारत लेकर आए थे।
काजू का इस्तेमाल हम अक्सर खाने में करते है।
सब्जियों में, चटनी में,sweets में एवम पुलाव बनाने में करते हैं।
काजू खाने के फायदे…
काजू का सही मात्रा में उपयोग हमें विभिन्न तरह के बीमारियों से बचाता है।
काजू में bitamin E पाए जाते हैं,जो एंटी एजिंग का काम करते हैं।काजू में हृदय रोग में ,blood pressure में
Hair growth होने में एवम
skin के लिए भी फायदेमंद होता है।
काजू में bitamins एवम minirals भरपूर मात्रा में पाए जाते है।
इसलिए गर्भवती महिला को भी खाने में दिया जाता है।
जिससे की बच्चा स्वस्थ पैदा हो।
काजू bloodsugar,एवम bloodpressure को control करने में काम आता है।
जिस तरह काजू खाने के विभिन्न फायदे है ,
उसी तरह इसके कुछ नुकसान भी है।
काजू खाने से नुकसान…
काजू का अधिक मात्रा में सेवन नुकसानदायक है।
1) इसके अधिक मात्रा में प्रयोग से bloodpressure को high कर सकता है, क्योंकि इसमें sodium की मात्रा अधिक होती है।
2) आप अगर सिर दर्द या माइग्रेन से पीड़ित हैं तो ये अधिक मात्रा में सेवन करना आपके लिए नुकसान दायक हो सकता है इससे आपके सिर का दर्द बढ़ सकता है।
आपका माइग्रेन बढ़ सकता है। क्योंकि काजू में अमीनो एसिड होता है जो सिर दर्द को बढ़ाता है।
3) इसके अधिक प्रयोग से आपके वजन कम करने की चाहत को धक्का लग सकता है।
इससे आपका वजन बढ़ सकता है,क्योंकि इसमें कैलोरी बहुत अधिक मात्रा में पाया जाता है।
और अंत में इसका सेवन हम सही अनुपात में नहीं करेंगे तो
हमारा पेट भी खराब हो सकता है ।
धन्यवाद
हर हार के बाद.. तेरी जीत अभी बांकी है.. अभी बांकी है..
क्योंकि उम्मीद अभी बांकी है..
उम्मीद अभी बांकी है..
रात गहरी हो कितनी भी ..पर तेरी सुबह … अभी बांकी है ..
सुबह अभी बांकी है..
दर्द सहे है कितने तुमने…
कितने तुमने ..
उन दर्दों का हिसाब अभी बांकी है..
हिसाब अभी बांकी है..
क्योंकि उम्मीद अभी बांकी है..
उम्मीद अभी बांकी है..
तूने सजाए कई सपने है ..
कई सपने है..
इन सपने को पूरा करना बांकी है..
अभी बांकी है..
क्योंकि उम्मीद अभी बांकी है..
उम्मीद अभी बांकी है..
अब दर्द का दर्द से रिश्ता बन रहा है।
तेरा यूं नजर चुराना मेरे दर्द का सबब बन रहा है।
दिन हो या रात हो बस तेरी ही बात हो।
डूब के दर्द में दर्द से ही इश्क करने लगा हूं।
ये मेरे दिल का भ्रम है या सचमुच तुम हो।
मेरी बातों का हो सकता है
कोई अर्थ ना हो तेरी नजरों में,
मगर मेरी बातों को मैं या मेरा दिल जानता है।
राहत मिलती नजर नहीं आती अब तो,
रह रह के इक हुक सी उठती है।
जाने कब तक ,जाने कब तक
तेरे लिए चाहतों का गुब्बार सा उठता है,
पर तेरी चाहतें भी तो दर्द देके जाती है।
लाख अनजान बनू तुझसे,
पर तू है कि दिल का दर्द बन के निकलती है।
हालाते दर्द बयां नहीं होता ,
हालाते दर्द बयां नहीं होता, दोस्तों,
और दिल है कि उसे और दर्द चाहिए!!
मेरे दिल के अरमां सारे चुर हो गए ,
मेरे दिल के अरमां सारे चुर हो गए ,दोस्तों,
और उनके अरमानों के पंख लग गए।
आसमां भी आज रो दिया होगा,
आसमां भी आज रो दिया होगा ,दोस्तों,
जब उसने देखा होगा मेरा दर्दे दिल।
अब अपने ही दर्द देते हैं ,
अब अपने ही दर्द देते हैं, दोस्तों,
अरे! दूसरों को क्या पता मेरा जख्मे दिल।
इक इक जख्म को कुरेदा है अपनों ने,
इक इक जख्म को कुरेदा है अपनों ने,दोस्तों,
ये आदत है कि उनकी जाती नहीं।
अब स्वर्ग जाने की तमन्ना नहीं ,
अब स्वर्ग जाने की तमन्ना नहीं, दोस्तों,
वतने धरा ही काफी है मेरे लिए।
और अंत में जमाने से कह दो ,
और अंत में जमाने से कह दो, दोस्तों,
ये जमाना हमसे है हम जमाने से नहीं।

तेरे दर्द से परेसां हूं मैं !
ऐसा लगता है कि बिमार हूं मैं!!
मेरी खामोशी का मतलब ना निकालना!
तुम्हे क्या पता,
मतलब निकालने में माहिर हूं मैं!!
तुम्हे पसंद नहीं मेरा आना!
पर तुम्हे क्या पता ,
घर से भागने में माहिर हूं मैं!!
यूं ना दिल जलाओ मेरा !
तुम्हे क्या पता,
परवाना , जलने में माहिर हूं मैं !!
मैंने जब भी तुम्हे देखा तुम मुस्कुराने लगी !
तुम्हे क्या पता,
सपने सजाने में माहिर हूं मैं!!
दर्द उठता है तेरे जाने के नाम से!
तुम्हे क्या पता,
दर्द छुपाने में माहिर हूं मैं!!
अक्सर डराते है लोग मुझे प्यार के नाम से!
उन्हें क्या पता ,
धोखा खाने में माहिर हूं मैं!!
रातों के अंधेरे में अक्सर खोजता हूं चांद को !
आपको क्या पता,
अंधेरों में खोजने में माहिर हूं मैं!!
अक्सर चलते चलते रुक जाता हूं मैं!
,तुम्हे क्या पता,
मन ही मन योजना बनाने में माहिर हूं मैं !!
मुझे डराते है , वही जो डरपोक हैं!
उन्हें क्या पता ,
पेड़ की पत्तियां तोड़ने से भी डरता हूं मैं !!
अक्सर मेरा मुकाबला होता है मुझसे !
मुझे ही है पता है,
कि मेरे मैं से लड़ता रहता हूं मैं!!
दिल के जज़्बात से अक्सर हार जाता हूं मैं!
दिल को क्या पता,
उनसे कितना प्यार करता हूं मैं!!
मैं अक्सर सीधा चलने की कोशिश करता हूं!
पांव को क्या पता,
रास्ते है की अक्सर मूड़ जाते हैं!!