जख्म

हालाते दर्द बयां नहीं होता ,

हालाते दर्द बयां नहीं होता, दोस्तों,

और दिल है कि उसे और दर्द चाहिए!!

मेरे दिल के अरमां सारे चुर हो गए ,

मेरे दिल के अरमां सारे चुर हो गए ,दोस्तों,

और उनके अरमानों के पंख लग गए।

आसमां भी आज रो दिया होगा,

आसमां भी आज रो दिया होगा ,दोस्तों,

जब उसने देखा होगा मेरा दर्दे दिल।

अब अपने ही दर्द देते हैं ,

अब अपने ही दर्द देते हैं, दोस्तों,

अरे! दूसरों को क्या पता मेरा जख्मे दिल।

इक इक जख्म को कुरेदा है अपनों ने,

इक इक जख्म को कुरेदा है अपनों ने,दोस्तों,

ये आदत है कि उनकी जाती नहीं।

अब स्वर्ग जाने की तमन्ना नहीं ,

अब स्वर्ग जाने की तमन्ना नहीं, दोस्तों,

वतने धरा ही काफी है मेरे लिए।

और अंत में जमाने से कह दो ,

और अंत में जमाने से कह दो, दोस्तों,

ये जमाना हमसे है हम जमाने से नहीं।

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