Category Archives: गीत

तेरे शहर में

जाने अनजाने चेहरे तेरे शहर में

मैं देखूं किसे सारे अनजान बनते…

लिखा तख्त पे अंदर आना मना है..

लिखा तख्त पे अंदर आना मना है..

मैं किस ओर जाऊं………

उधर जाना मना है…

मैं किस ओर जाऊं………

उधर जाना मना है…

मैं देखूं किसे सारे अनजान बनते…

जाने अनजाने चेहरे तेरे शहर में..

तख्त

मैं देखूं किसे सारे अनजान बनते…

मैंने खोजा जिसे ओ शख्स आम न था..

जब मिला तो समझा.. ओ शहरी हो गया था

जाने अनजाने चेहरे तेरे शहर में..

मैं देखूं किसे सारे अनजान बनते…

मैने सोचा था जैसा वैसा कुछ भी न पाया…

सब पैसा के पीछे इस कदर पड़े थे…

न अपना ख्याल न दिन का पता था…

मैने देखी नहीं इक भी तितलियां …

ना फूलों पे भंवरे …न नदी में कमल थे..

न नदी में कमल थे..

फूल

ऐसा लगता था सब.. कमाने गए थे..

ऐसा लगता था सब.. कमाने गए थे..

जाने अनजाने चेहरे तेरे शहर में..

मैं देखूं किसे सारे अनजान बनते…

हर बार मैं हारा हूं

हर बार मैं हारा हूं

हर बार तू जीता है

ये जिंदगी मुझे अब बस

लगता इक धोखा है…..

हर बार मैं हारा हूं..

हर बार तू जीता है..

फिर हारे हुए का तू

बनता क्यों सहारा है..

हर बार मैं हारा हूं..

हर बार तू जीता है…

सुनता नहीं अर्जी है

क्या तेरी मर्जी है..

कब तक यूं मोहन

माया में नचाओगे…

कब मेरी सुध लोगे..

कब पार उतारोगे….

हर बार तू जीता है..

हर बार मैं हारा हूं…

टूटते रिश्ते

छोटी– छोटी बातों पे टूटते रिश्ते

बैचेन दिल ना संभाल पाते रिश्ते

अक्सर टूट जाते रिश्ते।

बाहर के परेशानियों से जूझते रिश्ते,

छोटी छोटी बातों पे टूटते रिश्ते।

एक दूसरे के लिए न वक्त निकाल पाते रिश्ते

बनती दूरी न घटा पाते रिश्ते,

अक्सर सिसकते रूह,आंसू बनते रिश्ते,

अक्सर टूट जाते रिश्ते।

एक दूसरे की कमी निकालते रिश्ते,

अहंकार ,लोभ से पिसते रिश्ते,

छोटी–छोटी बातों पे टूटते रिश्ते।

केवल प्रेम से बनते रिश्ते,

एक दूसरे को समझते रिश्ते।

भरोसा

तू मत समझना गमजदा नहीं मैं तेरे गम से,

अश्क सुख गए है आंखों से गिरते– गिरते ,

तेरे गम के लिए आंसू कहां से लाऊं मैं।

तू न समझे तो कैसे तुझे समझाऊं मैं,

आंखों के आंसू

तेरे पीछे मैं खड़ा रहा हर पल,

तेरे दुःख में करीब रहा हर पल,

ये बात कैसे बताऊं मैं।

तू न समझे तो कैसे तुझे समझाऊं मैं।

तेरे करीब

तुझे भरोसा हो ना हो मेरे बातों का,

तू बात समझे नहीं मेरे जज्बातों का,

शायद किस्मत कोई खेल ,

खेल रही हो मुझसे,

तू न समझे तो कैसे तुझे समझाऊं मैं।

वक्त का तूफान

वक्त के तूफान से घिरा हूं

कभी इधर तो कभी उधर पड़ा हूं।

लेकिन क्या कहूं ?

देखता हूं ख्वाब ,

ऊंचे आसमान का,

ये बात अलग है,

गर्दिश में सितारे हैं ।

पर

चांद लाने की जिद छोड़ी नहीं मैने,

चांद लाने की जिद छोड़ी नहीं मैने,

चांद

अब देखना है,

किस्मत कितना जोर लगाती है।

मेरे कर्म मुझे कितना उठाती है,

या मेरी जिद मुझे डुबाती है।

वक्त और मेरे बीच होड़ लगी है।

वक्त के तूफान से घिरा  हूं,

कभी इधर तो कभी उधर पड़ा हूं।

किसको सुनाऊं

अपनी दिल के जख्म को,

किसको दिखाऊं,

दिल के दर्द को ,

किसको सुनाऊं।

बदलते हालात को,

कैसे काबू में लाऊं,

किसको बुलाऊं।

बदलते हालात

तेरे साए में ही

जिंदगी बिताऊं ,

तेरे सामने कैसे ,

बड़ा बन जाऊं,

कैसे समझाऊं।

तेरा साया

सुलगते आग में ,

कैसे घी डालूं।

बिखरते रिश्ते को,

कैसे बचाऊं।

जो रूठे हैं उन्हें,

कैसे मनाऊं।

रोते हुए को ,

कैसे हंसाऊं।

रोते हुए

कैसे मैं इंसानियत भुलाऊं,

जश्न ए आजादी,

कैसे मनाऊं।

सफ़र

कैसा है सफर ये चेहरा बोलता है,

तेरी खामोशी बहुत राज खोलता है।

कितने तकलीफ में तू है सफर में

ये तेरा चलने का अंदाज बोलता है।

कैसा है ये सफर ये चेहरा बोलता है,

तेरी खामोशी बहुत राज खोलता है।

चलने का अंदाज

तू छुपा ले चाहे सारे सफर का राज

ये राज भी तेरा आवाज खोलता है।

कैसा है सफर ये चेहरा बोलता है,

तेरी खामोशी बहुत राज खोलता है।

सफर तन्हा रहा या साथी मिला,

ये बात भी तेरा खुशमिजाज बोलता है।

खुशमिजाज

आइना मत देखना अभी,ये तो छुपे राज भी खोलता है।

कैसा है सफर ये चेहरा बोलता है,

तेरी खामोशी बहुत राज खोलता है।

आईना

किसको देखें

किसको देखें अब तुम्हे देखकर,

जिधर देखूं उधर तू आए नजर,

आए नजर..

किसको देखें अब तुम्हे देखकर,

जिधर देखूं उधर तू आए नजर,

आए नजर…

नजर

मेरा दिल था बेखबर ,

जब मिली तेरी खबर,

और कुछ ना आए नजर..

आए नजर…

जिधर देखूं उधर तू आए नजर,

आए नजर..

तेरी नजरों ने क्या जादू किया,

मेरे दिल को बेकाबू किया।

अब किधर जाऊं मैं…..

किधर जाऊं मैं

कुछ ना आए नजर..

कुछ ना आए नजर..,

किसको देखें अब तुम्हे देखकर,

जिधर देखूं उधर तू आए नजर ,

आए नजर……

तूने जिंदगी को नया नाम दिया ,

तूने आकार ये काम किया,

कैसे कह दूं तेरा इंतजार नहीं,

तू नहीं तो मेरा कोई छोड़ नहीं

तू आई तो किनारा मिला ..

मेरे टूटे दिल को सहारा मिला

सहारा मिला…

किनारा

किसको देखें अब तुम्हे देखकर,

जिधर देखूं उधर तू आए नजर ,

आए नजर….

तलाश

किसकी है तलाश मुझे, जाना कहां है

किससे मिलना मुझे ,ठिकाना कहां है

न रात की खबर ,ना दिन का पता है।

इस बेतरतीब जिंदगी का मुहाना कहां है,

ना जीने का पता ना मरने का ठिकाना है।

ये आशियां बस अब दर्द देते हैं, तो रह जाना कहां है।

आशियां

तंग गलियां मन की बैचैनी का सबब बनती है,

जाने कब कौन सा जख्म टकराए,रोना कहां है।

किसी के आशियाने को देखकर जोरों से हंसता हूं,

ये आशियां तो ठीक ,ठिकाना कहां है।

किसकी तलाश मुझे ,जाना कहां है

किससे मिलना मुझे , ठिकाना कहां है।

जाने कौन सा डगर अंतिम डगर हो,

डगरों के जाल में उलझना कहां है।

डगर

सब तेरी नजर है

सब तेरा असर है ईश्वर

सब तेरी नजर है।

तू लाख छिप जाए ,

तुझपे सबकी नजर है।

सब तेरा असर है ईश्वर

सब तेरी नजर है।

सब ओर है तू,

तू सब में है,

दिखता नहीं तू क्या नभ में है ?

दिखता नहीं तू क्या नभ में है ?

नभ

सब तेरा असर है ईश्वर,

सब तेरी नजर है।

सब ओर है रंज फैला ,

ये कैसी तेरी लीला,

घर घर है ये खेला,खेला,खेला,

सब खौफ में जी रहें है,

सब खौफ में जी रहें है,

कब होगी तेरी किरपा,

कब होगी तेरी किरपा,

सब लोग डर रहे हैं,

सब लोग डर रहे हैं।

सब तेरा असर है ईश्वर,

सब तेरी नजर है।