तलाश

किसकी है तलाश मुझे, जाना कहां है

किससे मिलना मुझे ,ठिकाना कहां है

न रात की खबर ,ना दिन का पता है।

इस बेतरतीब जिंदगी का मुहाना कहां है,

ना जीने का पता ना मरने का ठिकाना है।

ये आशियां बस अब दर्द देते हैं, तो रह जाना कहां है।

आशियां

तंग गलियां मन की बैचैनी का सबब बनती है,

जाने कब कौन सा जख्म टकराए,रोना कहां है।

किसी के आशियाने को देखकर जोरों से हंसता हूं,

ये आशियां तो ठीक ,ठिकाना कहां है।

किसकी तलाश मुझे ,जाना कहां है

किससे मिलना मुझे , ठिकाना कहां है।

जाने कौन सा डगर अंतिम डगर हो,

डगरों के जाल में उलझना कहां है।

डगर

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