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कौन हूं मैं ?

कौन हूं मैं मुझे किसकी तलाश है?


दिन है रात है ,

दिल में जज़्बात है,

फिर भी न जाने क्यों ?


कौन हूं मैं मुझे किसकी तलाश है?


रिश्ते हैं नाते है ,

और प्यार पाते हैं,

फिर भी ना जाने क्यों,


कौन हूं मैं मुझे किसकी तलाश है?


जानी अनजानी राहें है,


सपने ढेर सारे है।


फिर भी ना जाने क्यों?


कौन हूं मैं मुझे किसकी तलाश है?


मृत्यु है अमरता है,

प्रेम है समरसता है।


फिर भी ना जाने क्यों?


कौन हूं मैं मुझे किसकी तलाश है।


अंत है अनंत है, देव है संत है।


जड़ है चेतन है और आनंद है।


फिर भी ना जाने क्यों?


कौन हूं मैं मुझे किसकी तलाश है?

दिल चाहता है

मैं सोचता हूं कुछ लिखूं तेरे बारे में
ये दिल है कि छुपाने को कहता है।

मैं चाहता हूं कि चिल्ला के कहूं सबसे
ये दिल है कि चुप रहने को कहता है।

मैं चाहता हूं हल्का हो दिल के बोझ
ये दिल है कि बोझ ढोने को कहता है।

मैं चाहता हूं ये गम और प्यार का इजहार करुं
ये दिल है कि दिल ही दिल में दबाने को कहता है।

मैं चाहता हूं युद्ध विराम करूं दिल का
ये दिल है कि घमासान चाहता है।