दूसरों से तो जीत सकता हूं
पर
अपने मन से कैसे जीतें
जो की
हमारे सारे कमजोरी को जानता है।
************ “मनवीर” *****
****************************
ससुरा कमजोरी तो कमजोरी अपने अंदर की अच्छाई को भी नहीं छोड़ता है,
रह – रह के सब की बैंड बजाता रहता है।
दूसरों से तो जीत सकता हूं
पर
अपने मन से कैसे जीतें
जो की
हमारे सारे कमजोरी को जानता है।
************ “मनवीर” *****
****************************
ससुरा कमजोरी तो कमजोरी अपने अंदर की अच्छाई को भी नहीं छोड़ता है,
रह – रह के सब की बैंड बजाता रहता है।