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आजादी

आजादी तो आजादी होती है दोस्तों
मगर जिसने संस्कार में गुलामी पाया हो
उसके लिए आजादी क्या ?

आजादी के परवाने आजादी के लिए क्या कर नहीं गुजरते,

लेकिन जो जन्म से ही बंधा हो, उसके लिए आजादी क्या ?

अक्सर इस दुनिया में बिरले ही मिलते हैं आजाद,

जो जान बूझ कर बंधन में बंधे हैं,

उसके लिए आजादी क्या ?

चक्र

ये जन्म मृत्यु खेल ही तो है ,


एक माता के गर्भ से निकलना जन्म है,

तो दूसरे माता के गर्भ में जाना मृत्यु।


सत्य तो ये है ये भटकन कब तक है ये तो ईश्वर ही जाने ।


इस पूरे यात्रा को सब नहीं जान सकता,हम तो बस जन्म के बाद और मृत्यु से पहले की जानकारी रखते है।


बांकी यात्रा की जानकारी कैसे हो?
ये चक्र जो है कैसे टूटे?

(ये चक्र कैसा है जाने कोई
ज्ञानी,
मनवीर चिंता छोड़ के नाम की महिमा गाई)

प्रेम

जन्म, प्रेम , मृत्यु एक अटल सत्य है।


जन्म लेता है जीव और अपने ईश्वर से प्रेम करता है।


एवम अंत में मृत्यु को प्राप्त होता है।


जन्म और मृत्यु आपके वश में नहीं ,


लेकिन प्रेम तो आपके वश में है ,


आपका प्रेम कैसा है

ये आपने अपने प्रेम को कितना समझा है ,

इसपर निर्भर करता है।


आप जिंदगी भर जिसकी तलाश करते है?


और जब अंत समय में जब आपको समझ मिलता है

तब आप मृत्यु के नजदीक रहते हैं ,

तो पछताने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता है।


तब आप अपने आप को कोसते है ,

मैंने इतना समय इसको खोजने में लगा दिया।


प्रेम के वश में हैं भगवान,


जीव एक दुसरे से प्रेमवश जुड़ा रहता है।