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चक्र

ये जन्म मृत्यु खेल ही तो है ,


एक माता के गर्भ से निकलना जन्म है,

तो दूसरे माता के गर्भ में जाना मृत्यु।


सत्य तो ये है ये भटकन कब तक है ये तो ईश्वर ही जाने ।


इस पूरे यात्रा को सब नहीं जान सकता,हम तो बस जन्म के बाद और मृत्यु से पहले की जानकारी रखते है।


बांकी यात्रा की जानकारी कैसे हो?
ये चक्र जो है कैसे टूटे?

(ये चक्र कैसा है जाने कोई
ज्ञानी,
मनवीर चिंता छोड़ के नाम की महिमा गाई)

जीवन चक्र

क्लेश कष्ट करुणा
मरणासन्न बुढ़ापा तरुणा।

लू पेड़ छाया
कंचन काया माया।

सब्र विश्वास मीठा
बेसब्र अविश्वास तीखा।

नायक,जीवन कठिन

जीवन मृत्यु पलछिन्न।

अपमान अनादर प्रतिष्ठा
सत्य कर्म निष्ठा।

अविवेक क्रोध घमंड
अंत प्रलय तांडव।

भय घृणा,तृष्णा
अंत समय सब कृष्ण।