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खेल

ना तुमने जाना है ना हमने जाना है
ये खेल विधाता ने क्या खूब रचाया है
किसी ने पाया जन्नत तो कोई नरक पाया
किसी को मिली माया किसी ने पाया काया

जीवन का खेल

जीवन है दो पल का

फिर भी कामना अनेकों है
ये तो खेल है जीवन का
कोई जान न पाया है ।

फिक्र है सारे जग की
पर जाने ना ये माया है।

सब करता मेरा मेरा

जो दो पल साया है।

अब बस भी कर दो मानव

क्या तेरा क्या मेरा है?

जीवन है दो पल का,

फिर भी कामना अनेकों है।
ये तो खेल है जीवन का
कोई जान न पाया है ।