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उन्हें क्या पता

तेरे दर्द से परेसां हूं मैं !

ऐसा लगता है कि बिमार हूं मैं!!

मेरी खामोशी का मतलब ना निकालना!

तुम्हे क्या पता,

मतलब निकालने में माहिर हूं मैं!!

तुम्हे पसंद नहीं मेरा आना!

पर तुम्हे क्या पता ,

घर से भागने में माहिर हूं मैं!!

यूं ना दिल जलाओ मेरा !

तुम्हे क्या पता,

परवाना , जलने में माहिर हूं मैं !!

मैंने जब भी तुम्हे देखा तुम मुस्कुराने लगी !

तुम्हे क्या पता,

सपने सजाने में माहिर हूं मैं!!

दर्द उठता है तेरे जाने के नाम से!

तुम्हे क्या पता,

दर्द छुपाने में माहिर हूं मैं!!

अक्सर डराते है लोग मुझे प्यार के नाम से!

उन्हें क्या पता ,

धोखा खाने में माहिर हूं मैं!!

रातों के अंधेरे में अक्सर खोजता हूं चांद को !

आपको क्या पता,

अंधेरों में खोजने में माहिर हूं मैं!!

अक्सर चलते चलते रुक जाता हूं मैं!

,तुम्हे क्या पता,

मन ही मन योजना बनाने में माहिर हूं मैं !!

मुझे डराते है , वही जो डरपोक हैं!

उन्हें क्या पता ,

पेड़ की पत्तियां तोड़ने से भी डरता हूं मैं !!

अक्सर मेरा मुकाबला होता है मुझसे !

मुझे ही है पता है,

कि मेरे मैं से लड़ता रहता हूं मैं!!

दिल के जज़्बात से अक्सर हार जाता हूं मैं!

दिल को क्या पता,

उनसे कितना प्यार करता हूं मैं!!

मैं अक्सर सीधा चलने की कोशिश करता हूं!

पांव को क्या पता,

रास्ते है की अक्सर मूड़ जाते हैं!!