जिंदगी और सफर

जिंदगी और सफर ये दोनों एक दूसरे के पूरक है।

आप जिंदगी के बारे में सोचो,

या

की सफर के बारे में सोचो,

आप को समझ में आ जायेगा।

आइए थोड़ा विचार करें?

पूरा जिंदगी एक सफर है

जिस में हम सफर करके जिंदगी के एक छोड़ से दूसरे छोड़ तक जाते है,

यानी

बचपन से बुढ़ापा, जन्म से मृत्यु।

सफर भी हमें एक छोड़ से अपनी मंजिल तक पहुंचाती है,

जिंदगी आपकी है आप चुनते है आप कैसे तय करेंगे,और सफर भी विकल्प देते हैं को आप कैसे रास्ते तय करेंगे,

जैसे कभी कभी –कभी सफर में कोई सवारी नहीं मिलती और आपको पैदल सफर करना परता है।

ठीक उसी तरह जिंदगी में भी कभी–कभी आपको बिना किसी सहारे के चलना पड़ता है।

अकेले

सफर पर आपके बैकअप काम करते हैं जैसे परिवार,दोस्त,आपको अगर कोई सवारी नहीं मिली ,तो आपको लेने आते है,आपको मंजिल तक पहुंचने में मदद करते हैं।

जिंदगी में भी उसी तरह आपका बैकअप काम करता है, आपका मदद करता है जैसे– परिवार ,दोस्त,आपके मुश्किल वक्त में आपका साथ देता है।

मदद

जिस तरह आप सफर में रास्ते का चयन करते हैं की आपको किस रास्ते से जाना है सड़क कैसी है? आप सफर ship से करते हो या plane से करते हो ,कैसे शॉर्टकट लेते हो,ये सारे आपके मंजिल तक पहुंचने में मदद करते हैं,लेकिन ये आपको की किस तरह के मंजिल पर पहुंचाता है ये आप पर है की आपने कैसा शॉर्टकट लिया है।

जहाज

जिंदगी में भी आपके द्वारा सोचा गया सफर की आप किस तरह अपनी जिंदगी की सफर पूरा करोगे, आपने कैसी मंजिल चुनी है,मंजिल तक पहुंचने के लिए आपने कैसी तैयारी की है,या आपने शॉर्टकट लिया है।

जैसे सफर में चलते वक्त आपको साथी मिलते है,आपको नए तरह के दोस्त मिलते है,कितने ऐसे मिलते है जो आपको अपने रास्ते से भटकाकर आपको लुटते है,कितने आपके साथ आपको मंजिल तक देते हैं।अगर भटक गए सफर में तो रास्ते में ही रह जाते हैं।

जिंदगी ठीक सफर की तरह आपको कई मिलते है जो दोस्त बनते है दुश्मन बनते है, सही राह दिखाते है, कोई मंजिल से भटकाते है, कोई बिभन्न तरह के गंदी आदतों को लगाते हैं।अगर हम भटक गए तो अपनी मंजिल तक नहीं पहुंच पाते है।

गंदी आदत

अगर हम सूक्ष्मता से विचार करें तो सफर और जिंदगी में बहुत समानता देखने को मिलती है।

इस लिए तो कहते हैं– जिंदगी एक सफर है सुहाना ..यहां कल क्या हो किसने जाना?

सर पे मौत खड़ी है ।

सर पे मौत खड़ी है,

फिर भी लोभ में पड़ी है।

क्या ये तेरे जिंदगी से बड़ी है,

फिर भी जिद पे अड़ी है ।

तू किसके लिए ये लफड़ा ले रहा है,

है कौन जिससे खेल रहा है?

क्या ये बात इतनी बड़ी है?

सर पे मौत खड़ी है,

फिर भी जिद पे अड़ी है।

लफड़ा

कैसी ये आरजू कैसा नशा है?

किसने बहकाया तुझे,

किसकी खता है?

अरे सर पे मौत खड़ी है ,

फिर भी जिद पे अड़ी है।

लोभ के कारण क्यों पाप करे है?

पाप के घड़ा को क्यों भरे है?

ये बदमाशी क्यों करे है?

अरे सर पे मौत खड़ी है,

फिर भी जिद पे अड़ी है।

टूटते रिश्ते

छोटी– छोटी बातों पे टूटते रिश्ते

बैचेन दिल ना संभाल पाते रिश्ते

अक्सर टूट जाते रिश्ते।

बाहर के परेशानियों से जूझते रिश्ते,

छोटी छोटी बातों पे टूटते रिश्ते।

एक दूसरे के लिए न वक्त निकाल पाते रिश्ते

बनती दूरी न घटा पाते रिश्ते,

अक्सर सिसकते रूह,आंसू बनते रिश्ते,

अक्सर टूट जाते रिश्ते।

एक दूसरे की कमी निकालते रिश्ते,

अहंकार ,लोभ से पिसते रिश्ते,

छोटी–छोटी बातों पे टूटते रिश्ते।

केवल प्रेम से बनते रिश्ते,

एक दूसरे को समझते रिश्ते।

भरोसा

तू मत समझना गमजदा नहीं मैं तेरे गम से,

अश्क सुख गए है आंखों से गिरते– गिरते ,

तेरे गम के लिए आंसू कहां से लाऊं मैं।

तू न समझे तो कैसे तुझे समझाऊं मैं,

आंखों के आंसू

तेरे पीछे मैं खड़ा रहा हर पल,

तेरे दुःख में करीब रहा हर पल,

ये बात कैसे बताऊं मैं।

तू न समझे तो कैसे तुझे समझाऊं मैं।

तेरे करीब

तुझे भरोसा हो ना हो मेरे बातों का,

तू बात समझे नहीं मेरे जज्बातों का,

शायद किस्मत कोई खेल ,

खेल रही हो मुझसे,

तू न समझे तो कैसे तुझे समझाऊं मैं।

वक्त का तूफान

वक्त के तूफान से घिरा हूं

कभी इधर तो कभी उधर पड़ा हूं।

लेकिन क्या कहूं ?

देखता हूं ख्वाब ,

ऊंचे आसमान का,

ये बात अलग है,

गर्दिश में सितारे हैं ।

पर

चांद लाने की जिद छोड़ी नहीं मैने,

चांद लाने की जिद छोड़ी नहीं मैने,

चांद

अब देखना है,

किस्मत कितना जोर लगाती है।

मेरे कर्म मुझे कितना उठाती है,

या मेरी जिद मुझे डुबाती है।

वक्त और मेरे बीच होड़ लगी है।

वक्त के तूफान से घिरा  हूं,

कभी इधर तो कभी उधर पड़ा हूं।

जो मैं लिखना चाहूं ,लिख नहीं पाता हूं।

क्यों दिल का दर्द

मैं बाहर नहीं निकाल पाता हूं

जो मैं लिखना चाहूं,

लिख नहीं पाता हूं।

मैंने सहे एक से एक जख्म,

क्यों दिल के जख्म दिखा नहीं पाता हूं,

जो मैं लिखना चाहूं,

लिख नहीं पाता हूं।

ये सर्द हवाएं और बारिश की बूंदे,

सब महसूस करता हूं,

पर अपने जज्बात,

बाहर निकाल नहीं पाता हूं,

जो मैं लिखना चाहूं ,

लिख नहीं पाता हूं।

बारिश की बूंदे

इतना सुंदर ईश्वर की रचना है,

फिर क्या सोचना है,

अपने सोच को ,

बाहर निकाल नहीं पाता हूं,

जो मैं लिखना चाहूं,

लिख नहीं पाता हूं ।

किसको सुनाऊं

अपनी दिल के जख्म को,

किसको दिखाऊं,

दिल के दर्द को ,

किसको सुनाऊं।

बदलते हालात को,

कैसे काबू में लाऊं,

किसको बुलाऊं।

बदलते हालात

तेरे साए में ही

जिंदगी बिताऊं ,

तेरे सामने कैसे ,

बड़ा बन जाऊं,

कैसे समझाऊं।

तेरा साया

सुलगते आग में ,

कैसे घी डालूं।

बिखरते रिश्ते को,

कैसे बचाऊं।

जो रूठे हैं उन्हें,

कैसे मनाऊं।

रोते हुए को ,

कैसे हंसाऊं।

रोते हुए

कैसे मैं इंसानियत भुलाऊं,

जश्न ए आजादी,

कैसे मनाऊं।

सब के बस की बात नहीं

अपनी इज्जत बनाना,

इज्जत बचा के रखना,

सब के बस की बात नहीं।

इज्जत

अच्छी आदत डालना ,

गंदी आदत छोड़ना ,

सब के बस की बात नहीं।

गंदी आदत

सब के सामने सच बोलना ,

सच बोल के सच पर रहना ,

सब के बस की बात नहीं।

सच बोलना

अपने मन को बहलाना,

और उसको काबू में रखना ,

सबके बस की बात नहीं।

मन

अपने अहंकार को दबाना ,

गुस्से को काबू में रखना,

सबके बस की बात नहीं।

सफ़र

कैसा है सफर ये चेहरा बोलता है,

तेरी खामोशी बहुत राज खोलता है।

कितने तकलीफ में तू है सफर में

ये तेरा चलने का अंदाज बोलता है।

कैसा है ये सफर ये चेहरा बोलता है,

तेरी खामोशी बहुत राज खोलता है।

चलने का अंदाज

तू छुपा ले चाहे सारे सफर का राज

ये राज भी तेरा आवाज खोलता है।

कैसा है सफर ये चेहरा बोलता है,

तेरी खामोशी बहुत राज खोलता है।

सफर तन्हा रहा या साथी मिला,

ये बात भी तेरा खुशमिजाज बोलता है।

खुशमिजाज

आइना मत देखना अभी,ये तो छुपे राज भी खोलता है।

कैसा है सफर ये चेहरा बोलता है,

तेरी खामोशी बहुत राज खोलता है।

आईना

किसको देखें

किसको देखें अब तुम्हे देखकर,

जिधर देखूं उधर तू आए नजर,

आए नजर..

किसको देखें अब तुम्हे देखकर,

जिधर देखूं उधर तू आए नजर,

आए नजर…

नजर

मेरा दिल था बेखबर ,

जब मिली तेरी खबर,

और कुछ ना आए नजर..

आए नजर…

जिधर देखूं उधर तू आए नजर,

आए नजर..

तेरी नजरों ने क्या जादू किया,

मेरे दिल को बेकाबू किया।

अब किधर जाऊं मैं…..

किधर जाऊं मैं

कुछ ना आए नजर..

कुछ ना आए नजर..,

किसको देखें अब तुम्हे देखकर,

जिधर देखूं उधर तू आए नजर ,

आए नजर……

तूने जिंदगी को नया नाम दिया ,

तूने आकार ये काम किया,

कैसे कह दूं तेरा इंतजार नहीं,

तू नहीं तो मेरा कोई छोड़ नहीं

तू आई तो किनारा मिला ..

मेरे टूटे दिल को सहारा मिला

सहारा मिला…

किनारा

किसको देखें अब तुम्हे देखकर,

जिधर देखूं उधर तू आए नजर ,

आए नजर….

विश्व चेतना