राह दिखाओ ना

राह दिखाओ ना

प्रभु मोरे, राह दिखाओ ना।

तुम सा कोई पथिक नहीं है,

सत्य राह दिखाओ ना,

प्रभु मोरे, राह दिखाओ ना।

तुम सा कोई तेज नहीं है

मेरो अंधेरा मिटाओ ना,

प्रभु मोरे, राह दिखाओ ना।

तुम बिन कोई ना विघ्नहर्ता नहीं है

मेरो विघ्न मिटाओ ना,

प्रभु मोरे, राह दिखाओ ना।

विघ्नहर्ता

तुम सा नहीं कोई अंतर्यामी है

मेरो कष्ट मिटाओ ना,

प्रभु मोरे, राह दिखाओ ना।

तुम बिन मेरो जग सुना– सुना है,

प्रभु मेरो आ भी जाओ ना,

प्रभु मोरे, राह दिखाओ ना।

करने वाला कोई और है

मैं करता हूं ,मैं करता हूं

कर्ता कुछ करता नहीं

तू भरम मत पाल बंदे,

करने वाला कोई और,

तेरा करनी ना तेरा है

तू माटी का पुतला है

जैसे रचे हैं खेल विधाता

वैसा ही तू नाचेगा।

पुतला

जो लिखा तेरी किस्मत में

उससे कम ना पायेगा।

तेरी सोच की तू करे है

नेकी का फल पायेगा।

कर्म करे तू अच्छा अच्छा

फल का करे ना चिंता

ईश्वर पर रख भरोसा

तुझको सही राह दिखाएगा

तू भरम मत पाल बंदे

करने वाला कोई और है

तू ही मेरा प्यार

तू दिल तू ही धड़कन

तू ही मेरी जान है।

तुझ से ही मेरा प्यार शुरू है,

तुझपे ही खतम है।

हो. हो.. हो ..हो ..हो ..हो ..हो….

तुझ से है रात की चांदनी,

तुझ से ही सुबह है,

तुझ से मेरा प्यार शुरू है

तुझ पे ही खतम है।

चांदनी

तेरे बिन तो सब सुना है,

तू ही मेरा जहान है,

दिल ,जिगर जान क्या,

तुझ पे सब कुर्बान है।

तुझ से ही मेरा प्यार शुरू है

तुझ पे ही खतम है।

हो. हो.. हो ..हो ..हो ..हो ..हो….

अब ना होगा इंतजार

अब ना होगा मुझसे सनम तेरा इंतजार

सनम तू नहीं तो कोई नहीं।

कब तक रहूंगा मैं तन्हा –तन्हा,

कब तक करूं इंतजार।

अब ना होगा मुझसे सनम तेरा इंतजार।

तन्हा

तेरे लिए मैंने सपने सजाए,

तू ही रहेगा मेरा प्यार,

अब ना होगा मुझसे सनम तेरा इंतजार।

राह मैं देखूं तेरे आने की,

कब तू आएगा मेरे यार,

अब ना होगा मुझसे सनम तेरा इंतजार।

बिनती मेरी तुझसे है

जब–जब जनम लें श्याम

हर बार मिले मुझे तू

मेरे सांवरे सलोने श्याम

बिनती मेरी तूझसे है।

मेरा हाथ पकड़ लो श्याम

मुझे पार लगाओ न

बिनती मेरी तुझसे है।

बिनती मेरी तुझसे है

डर–डर के मैं जीता हूं,

मेरे डर को मिटाओ न,

बिनती मेरी तुझसे है।

इस भव सागर में मोहन

तू ही साथ निभाओगे।

बिनती मेरी तुझसे है।

मेरे जीने के सहारे हो,

तुम मुझको प्यारे हो,

बिनती मेरी तुझसे है।

दुखियों के सहारे हो,

तुम दीनदयाल हो,

बिनती मेरी तुझसे है।

बेटा तुमसे ना होगा

बेटा तुम से ना होगा

जितनी तेरी उमर है,

उससे ज्यादा तो मेरी कमर है।

जितने तूने देखें हैं,

उतने मैं रोज गिनता हूं।

बेटा तुमसे ना होगा।

मत जोर आजमा अकेला जानकर ,

बाप हूं तेरा ये चलो मानकर

बेटा तुमसे ना होगा।

तू लोटा भर पानी है

तेरे सामने समंदर है,

तू जितना सोचेगा ,

उतना ही डूबेगा,

बेटा तुमसे ना होगा।

समुंद्र

तू जिस कॉलेज में पढ़ता है,

उधर का तो मैं प्रिंसिपल था,

बेटा तुमसे ना होगा।

जिधर जाने से सपने में भी तू डरता है,

बेटे अपुन उधर तो ही रहता है।

बेटा जितना तू पीता है,

उतना से मैं मुंह धोता हूं।

बेटे तुमसे ना होगा

रावण तू कैसा अभिमानी?

रावण तू कैसा अभिमानी?

क्या तुम्हे अभिमान था अपने भाई पर

या अभिमान था अपने दशो दिशाओं में फैले अपने कुटुंबों पर,

क्या तू अनजान था अपने अंत से?

क्या तू विभिन्न शास्त्रों का ज्ञाता था?

क्या तू भक्त था महाकाल का?

रावण तू कैसा अभिमानी ?

महाकाल

क्या तू अनजान था अपनी अमरता से?

या अनजान था अपनी जय पराजय से ?

जब सब कुछ था तू जानता,

तो दानव कैसे हुआ ?

क्या तू ऋषि का संतान नहीं ?

तेरे खून में उनका खून नही ?

रावण तू कैसा अभिमानी?

युद्ध

क्या तूने बड़ों की बात नहीं मानी?

क्या था तूने मन में ठानी?

रावण तू कैसा अभिमानी?

क्या तू युद्ध के अंत को जानता न था?

रावण तू कैसा स्वाभिमानी ?

क्या अपने इज्जत के खातिर ईश्वर से युद्ध ठानी ?

रावण तू कैसा अभिमानी ?

तेरे शहर में

जाने अनजाने चेहरे तेरे शहर में

मैं देखूं किसे सारे अनजान बनते…

लिखा तख्त पे अंदर आना मना है..

लिखा तख्त पे अंदर आना मना है..

मैं किस ओर जाऊं………

उधर जाना मना है…

मैं किस ओर जाऊं………

उधर जाना मना है…

मैं देखूं किसे सारे अनजान बनते…

जाने अनजाने चेहरे तेरे शहर में..

तख्त

मैं देखूं किसे सारे अनजान बनते…

मैंने खोजा जिसे ओ शख्स आम न था..

जब मिला तो समझा.. ओ शहरी हो गया था

जाने अनजाने चेहरे तेरे शहर में..

मैं देखूं किसे सारे अनजान बनते…

मैने सोचा था जैसा वैसा कुछ भी न पाया…

सब पैसा के पीछे इस कदर पड़े थे…

न अपना ख्याल न दिन का पता था…

मैने देखी नहीं इक भी तितलियां …

ना फूलों पे भंवरे …न नदी में कमल थे..

न नदी में कमल थे..

फूल

ऐसा लगता था सब.. कमाने गए थे..

ऐसा लगता था सब.. कमाने गए थे..

जाने अनजाने चेहरे तेरे शहर में..

मैं देखूं किसे सारे अनजान बनते…

अतीत से वर्तमान की ओर

मैने माना आप भूत काल में यानी पीछे नहीं जा सकते,आपने जो पीछे समय गंवाए है उसको वापस नहीं ला सकते,

पर आप वर्तमान में क्या कर रहें हैं आप अपने बीते समय को याद करके अपने को कोसते है,। तब मैने ऐसा किया होता तो आज मैं ऐसा होता।

बीता समय

तो क्या आप के अपने आप को कोसने से पिछला समय वापस आ सकता है?

तब आपको अगर ये पता है आप पिछला समय वापस नहीं ला सकते तो…

आप अभी एक अच्छी शुरुआत क्यों नही कर रहें हैं?

आप पीछे हुए घटनाओं से सिख ले कर वर्तमान में अच्छी शुरुआत कर सकते है।

तो आइए हम सब अतीत को सबक मानते हुए वर्तमान में एक नया शुरुआत करते है।

और जिंदगी को सहज सरल और आनंदमय बनाते हैं।

धन्यवाद

हर बार मैं हारा हूं

हर बार मैं हारा हूं

हर बार तू जीता है

ये जिंदगी मुझे अब बस

लगता इक धोखा है…..

हर बार मैं हारा हूं..

हर बार तू जीता है..

फिर हारे हुए का तू

बनता क्यों सहारा है..

हर बार मैं हारा हूं..

हर बार तू जीता है…

सुनता नहीं अर्जी है

क्या तेरी मर्जी है..

कब तक यूं मोहन

माया में नचाओगे…

कब मेरी सुध लोगे..

कब पार उतारोगे….

हर बार तू जीता है..

हर बार मैं हारा हूं…

विश्व चेतना