अंतरिक्ष के जीव

ये कहानी एक छोटे बच्चे की जिसका जन्म अंतरिक्ष की गहराइयों में हुआ ।

क्या आप जानना चाहेंगे उस अंतरिक्ष में जन्मे बच्चे के बारे में ?

जब धरती के सारे वैज्ञानिक अंतरिक्ष में घर बनाने के लिए होड़ लगा रहे थे।और कई देशों ने तो देखते- देखते अंतरिक्ष में, अपना अपना स्टेशन बना कर वहां रिसर्च भी शुरू कर दिया था।
उस में से कुछ वैज्ञानिक ऐसे भी थे जो ये प्रयोग कर रहे थे कि
बिना किसी आवरण के हम अंतरिक्ष में कैसे रह सकते है।
मगर हर बार उसे असफलता ही हाथ आई, और साथ ही इसमें कई आदमियों का बलिदान भी देना पड़ा।
हर बार के असफलता से परेशान होकर उस अभियान को चलाने वाली संस्थाओं ने पैसा देना बंद कर दिया । जब इसका पैसा आना बंद हो गया तब वैज्ञानिकों को अंतरिक्ष में रहकर ये प्रयोग करना कठिन हो गया ।

अभी तक धरती से गए जितने भी प्रयोग हेतु वस्तु थे, लगभग सभी का उपयोग किया जा चुका था ।
उसमें से कुछ पदार्थ बचे थे।
अब जब की वैज्ञानिकों को अंतरिक्ष छोड़ने में अब कुछ दिन ही शेष बचे थे। और सभी धरती पर जाने की तैयारी में लगे थे।लेकिन , एक वैज्ञानिक ऐसा भी था जो लगातार अपने काम में लगा था।और उसके हाथ कुछ ऐसी सफलता लगी, जिससे वह खुश हो गया। और अपनी योजना सब को बताने के लिए तैयारी करने लगा ।रवि नाम के उस वैज्ञानिक ने अपनी योजना बताने के लिए, उसने उस अंतरिक्ष के प्रयोगशाला में मौजूद सभी वैज्ञानिकों की आपात बैठक बुलाई और अपनी योजना को विस्तार पूर्वक बताया ।ये योजना कुछ इस प्रकार का था -: की हम सब मिलकर एक ऐसा ट्यूब बनाएंगे जिसमें बच्चा पल सके और इसका जन्म इसी अंतरिक्ष में हो ।
साथ ही इसके शरीर निर्माण में अंतरिक्ष के पदार्थ के साथ धरती के पदार्थ को मिलाकर किया जाए । सभी वैज्ञानिक उसकी बात ध्यान से सुन रहे थे ।
उसने आगे बताना शुरू किया कि एक वैज्ञानिक ने कहा कि,” हम वो अंतरिक्ष का पदार्थ कहां से लाएंगे?”
इस बात पर उस वैज्ञानिक ने जबाव दिया, मैंने कुछ पदार्थ यहां के वातावरण से तैयार किया है ।कुछ यहां के आस पास मिलने वाले पत्थरों से निकाला है।
इतने पर दूसरे वैज्ञानिक ने पूछा, “इतने काम इतने कम दिन में कैसे कर पाएंगे,और जब की ये काम अब बंद हो गया है तो इसको हम कैसे आगे बढ़ाएंगे और भविष्य में इसका मॉनिटर हम कैसे कर पाएंगे?”
इस बात पर उस वैज्ञानिक ने जबाव दिया, ये सारी बातें हम लोगों के मध्य ही रहेंगी ,और हम इसका भेद तब तक नहीं खोलेंगे।
जब तक ये योजना सफल नहीं हो जाती ।और इसका मॉनिटर हम धरती से गुपचुप तरीके से करेंगे।
और अब रही बात इसको सब के नजर से बचाने की तो हम इसको एक ऐसे जगह पर इंस्टाल करेंगे जो ये सब के नजर से बचा रहे और अपना काम भी होता रहे।
और हम इसको ऐसे सेट करेंगे की ये बाहर से खुल सके ऑटोमैटिक हो अगर हम लोग इसको कमांड नहीं भी दे तो भी ये अपना काम करता रहे और इसको हम कम से कम चार साल के लिए कमांड दे कर रखेंगे।
और जब जरूरत होगा तब इसको धरती से कमांड देंगे, और अन्य जानकारी उस योजना से सम्बन्धित सभी को समझाने लगा।
सभी कुछ समझने के बाद सब अपने अपने कार्य में लग गए ।
बहुत हद तक कार्य , रवि ने पहले ही कर दिया था ,जब सारा system तैयार हो गया । उसको उस अंतरिक्ष यान के एक ऐसे हिस्से में सेट किया गया कि वह किसी के नजर में ना आए ,और उसकी एनर्जी ,पॉवर संबंधित आवश्यकता भी पूरी होता रहे ।साथ ही जब जरूरत हो ,उसको बाहर लाने का,तब बाहर लाया जा सके। उसी मशीन के अंदर
उसके पालन पोषण का सारा व्यवस्था किया गया था,मशीन ऐसा सिस्टम इंस्टाल किया गया कि ,
उसके अंदर हो रही पल पल की गतिविधि का पता उसको चलता रहे।
अब आखिर जाने का दिन आ ही गया ,जाने से पहले एक बार सभी ने जाके अपना अपना सिस्टम चेक किया । सभी सिस्टम सही से कार्य कर रहे थे ,अब सभी धरती पर जाने के लिए सभी जाके अपने यान में बैठ गए और धरती की ओर रवाना हो गए ।

धरती पर लौटने के करीब एक साल के बाद
अचानक एक दिन उन सब के द्वारा जो सिस्टम सेट किया गया था उसमे हलचल तेज हो गई।
अचानक हुई इस हलचल से उस ग्रुप के सारे सदस्य सक्रिय हो गए।
अब इंतजार था उस system के सही से कार्य करते रहने का ,साथ उन सब को ये आश्चर्य हो रहा था कि हलचल तो है लेकिन,बच्चा अभी तक पूर्ण रूप से विकसित क्यों नहीं हुआ , ये इतना समय क्यों लगा रहा है । ये सोचने के अलावा और कर भी क्या सकते थे , इंतजार के अलावा कुछ कर भी नहीं सकते थे ।
क्योंकि,ये सारी गतिविधि गुप्त रूप से चल रही थी ,तो सावधानी रखना जरूरी था।
उस मशीन में हलचल लगातार हो रही थी मगर कुछ ज्यादा कहा नहीं जा सकता था ।
करीब दस महीने के बाद सबको ऐसा लगा, जैसे सिस्टम में बच्चा अब परिपक्व हो चुका है ,और सिस्टम से मैसेज आ रही बेबी ट्यूब ने आखिर उस बच्चे को जन्म दे ही दिया
और अब था टाइम बच्चे को खुले अंतरिक्ष में बिना किसी आवरण के निकालना ।
आखिर उस इंतजार का घड़ी खत्म हुआ और उस ऑटोमैटिक मशीन ने उसको बाहर निकाला कुछ सेकंड के लिए और फिर उसको अंदर ले लिया ।
अब तक बच्चा सही सलामत था ,
अब देखना था दूसरा चरण ।
दूसरे सप्ताह में बच्चे को मशीन ने फिर निकाला इस बार दो मिनट के लिए सबको अंदेशा था इस बार बच्चे को नुकसान होना ही है।
मगर ,दो मिनट के बाद बच्चे को मशीन फिर अंदर ले लिया ।
अब उस मिशन के सारे मेंबर को आखिर प्रयोग के उपर नजर था ।
इस बार का प्रयोग एक महीने के बाद होना था ।सारे सदस्य बेसब्री से इंतजार कर रहे थे।
की अचानक इस मिशन के सारे मेंबर एक्टिव है ये खबर खुफिया विभाग को पता चल गई ।
अब ये पता करना था कि ये सारे सदस्य आखिर इतने एक्टिव क्यों हो गए।
अब खुफिया विभाग के सारे सदस्य एक्टिव हो गए उनके फोन से लेकर मोबाइल कंप्यूटर उसके हर एक्शन पर नजर रखने लगे ।
इनको पता करने में ज्यादा समय नहीं लगा ।की ये सब किसी ऐसे मिशन पर काम कर रहे है ।जो समाप्त हो चुका है । और ये इसको गुपचुप तरीके से सब के नजर से बचा के कर रहे है।
ओर इन सबको दो चरण की सफलता भी मिल चुकी है ।
खुफिया विभाग के चीफ ने मिशन को जानने के बाद उसने उसका तीसरा चरण पूरा होने देने का आदेश दे दिया ,और उसके बाद ही
इसके बारे में सदस्यों से पूछताछ की कारवाही को आगे बढ़ाएंगे।
अब तीसरे चरण को पूरा होने में दो दिन ही बांकी था कि इस मिशन के बारे में कुछ न्यूज वहां के अपराधियों तक भी पहुंच गए।
और उस मिशन के एक सदस्य को छोड़ कर सारे सदस्य को अगवा कर लिया गया।
अब एक दिन मात्र शेष बचा था।
इस बार मशीन को पूरे 1/2 घंटे तक बच्चे को बाहर रखना था ।
मशीन ने सारे कार्य पूरे किए और बच्चे को बाहर निकाला और मशीन उसका लगातार मॉनिटर कर रहा था। समय धीरे धीरे गुजरता गया ।
ये 1/2घंटे भी सफलता पूर्वक पूरे हो गए । अब अंतिम जो था वो पूरे एक साल के बाद होने वाले प्रयोग थे।
तब तक ये सारे मिशन लिक हो गए । और सभी सदस्य तो पहले से ही अगवा कर लिए गए थे।
बस एक ही सदस्य बचा था । और उसके बारे में पता करना था।
उस मिशन के सारे डॉक्यूमेंट उसी के पास था , और वही एक था, जो सब के पकड़ से बाहर था । ना उसको खुफिया विभाग पकड़ पा रही थी,ना ही अपराधियों के हाथ आ रहा था।
ये खबर अब लगभग हर देश के खुफिया विभाग में पहुंच चुका था।
और ये न्यूज़ अब ट्रेंड में थी ।
सारे जहां के आतंकवादी इस न्यूज़ के आते ही एक्टिव हो गए।
पूरे विश्व में ये खबर फैल गई,की अब हम अंतरिक्ष में बिना किसी आवरण के रह सकते है।
इसका सारा प्रयोग सफल रहा,
पूरे विश्व में बस यही न्यूज़ चल रही थी ,और सब न्यूज़ को बढ़ाचढ़ा कर दिखा रहे थे।
इधर सभी उस आदमी को खोज रहे थे ,जिसके पास वो सारा डॉक्यूमेंट था इस प्रयोग से संबंधित।

रुक मत

हम चलते है बिना थके ,

कभी धूप में कभी छांव में ।

हम चलते है बिना थके,

कभी धूप में कभी छांव में

हमें रोकते ये जहां, हमें टोकते है ये जहां।
फिर भी हम चलते है बिना रुके,

कभी धूप में कभी छांव में।

कभी धूप में कभी छांव में।

क्योंकि भविष्य हमें है देख रहा
और है हमसे ये कह रहा
पथ पर कांटे हो चाहे लाख बिछे।
तू रुक जाना नहीं, तू झुक जाना नहीं।
तू संभल के चल ,तू देख के चल
क्योंकि तेरा जिन्दगी है चलना ।

इसलिए तो हम चलते है बिना थके

कभी धूप में कभी छांव में।

कभी धूप में कभी छांव में।

हमे रोकती है वक्त का ये फासला,
हमें रोकती है उम्र का ये सिलसिला।
हमें रोकोगी तुम भी कभी ना कभी,
क्योंकि तुम्हें डर है मेरे हारने का मेरे रुकने का।
और मुझे हौसला है जीतने का, और मुझे हौसला है जीतने का।
अरे तुम ही क्या ? मुझे रोकेगा ये वक्त भी ,
मुझे रोकेगा ये जहां भी ,
ऐसा होता है हर कर्मपथ पर चलने वाले के साथ भी।
मगर जो चलता रहता है वो है जीतता , मगर जो चलता रहता है वो है जीतता।

इसलिए हम चलते है बिना थके
कभी धूप में कभी छांव में,
कभी धूप में कभी छांव में।

जिन्दगी का धुंध ये जिन्दगी के मायने
हमें पता करते है जाना , हमें पता करते है जाना।
क्योंकि कब अंत हो मेरे पथ का
ये मैंने नहीं जाना ,क्योंकि कब अंत हो मेरे पथ का ये मैंने नहीं जाना ।
अभी तक मैंने जो है जाना रुक जाना है मर जाना और
खो जाना है उस बिराने में जहां से न है किसी का आना।
इसलिए हमको चलते जाना है ,
बस चलते जाना।
इसलिए हम चलते है बिना थके
कभी धूप में कभी छांव में ।

कभी धूप में कभी छांव में।

चाहे तेरे रास्ते में आये लाख तुफां,

चाहे तुझे झुकाने को ,तुझे अपने पथ से डिगाने को, आसमां ही क्यों न उतर जाए, तू रुकना नहीं तू झुकना नहीं ।
तेरे चलने पर ही तो है तेरा भविष्य टिका ,
जब तक तू चलेगा तेरा साथ देने हो सकता है कोई ना आए ,
मगर तेरे चले रास्ते पर हर कोई चलेगा ,
मगर तेरे चले रास्ते पर हर कोई चलेगा।

इसलिए हम चलते हैं बिना थके

कभी धूप में कभी छांव में।

कभी धूप में कभी छांव में।

नाव

नाव हिलती डुलती है पर मंजिल की ओर अग्रसर रहती है।

नाव हिलती डुलती है पर मंजिल की ओर अग्रसर रहती है।
पर पतवार किसी और के हाथ में
नाव के अंदर है सवारी बहुत पर मंजिल सब की एक है।
जाना है सबको उस पार,
मगर नाव का तो काम है ढोना
उसे किस बात का रोना ।
ना उसके अपने कोई, ना कोई पराया
ना कोई हमसफ़र, ना कोई साया
सारा संसार बस है माया,
नाव का तो काम है बिना रुके मंजिल तक पंहुचना ।
अगर नाव रुक गया तो रुक जाएगा उसके साथ बहुतों का सफर ।हो सकता है अंत हो जाए ये सफर सुहाना।
मगर नाव रुकता नहीं चलता रहता अपने पथ पर।
लहरें उसको डगमगाती है
कभी आगे कभी पीछे गिराती है
कभी जीतती है कभी हार जाती है।
पर अपने काम को छोड़ नहीं पाती है
नाविक जब थक कर सो जाता है नाव में वह धीरे धीरे उसको सहलाती है

सत्य की खोज

सत्य क्या है क्या सत्य ही ईश्वर है ? अगर सत्य ही ईश्वर है तो वो कौन सा सत्य है जिसको हम ईश्वर के रूप में मानते है ?

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सत्य छिपा है

नमस्कार दोस्तों

दोस्तों आज का जमाना जो कि पूर्णतः भ्रष्ट हो चुका है और इसको भ्रष्ट करने में हम सब की अहम भूमिका है ।इस तरह से एक बात और सामने आती है कि जो व्यक्ति जैसा है समाज में उसके आसपास वैसा ही व्यक्ति उसको मिलता है और जैसा सोचता है वह वैसा ही पाता है।

इसलिए अभी भी दुनिया में सत्य नाम की कोई चीज है ।जिस के बारे में लोग कहते है कि ये धरा सत्य पर टिकी है ।तो वो कौन सा सत्य है?
आज हम बात करेंगे सत्य के बारे और हम जानेंगे की सत्य क्या है ? सत्य के मायने क्या है ? क्या हम जिस सत्य को जानते हैं वही सत्य हमें ईश्वर के रूप में मिलता है ? वह कौन सा सत्य है ? क्या उसी सत्य को पा के परमात्मा को पाया जा सकता है?
क्या सत्य का भी कसौटी होता है ?
इन सब बातों पर ध्यान देने पर पता चलता है । सत्य की सत्यता क्या है ? सत्य को हम क्या मानते है ? सत्य मेरे लिए क्या है ।
और अब इस सब से आगे सत्य की परिकल्पना का आधार क्या है?
सत्य हम किसे मानते है ? क्या हम इसको सत्य मानते है किसी ने किसी के साथ ईमानदारी दिखाई ये पूरी जिंदगी में कोई असत्य कर्म नहीं किया ।या पूरी जिन्दगी जो वैष्णव रहा और किसी तरह के मांस आदि का सेवन नहीं किया। हम इसको ही सत्य मानते हैं ?अगर हां है तो इस तरह का
सत्य हर युग में बदलता है ।
सत्य हर परिस्थिति में बदलता है।
सत्य को हर आदमी अपने हिसाब से देखता है।
किसी ने कोई कर्म किया तो उसके लिए वो सत्य है और वही दूसरों के लिए गलत है ।
मानव सभ्यता के आरंभ में मनुष्य का खान पान कुछ और था तब वो शिकार करते थे और वही खाते थे ।जैसे जैसे मानव सभ्यता का विकास हुआ मानवों ने अन्न उपजाना शुरू किया और अन्न को खाने लगे ।समय के साथ खान पान बदला ।
रहन- सहन पहले लोग बिना कपड़ों के रहते थे जैसे जैसे मानव का सोच विकसित होता गया और सब कपड़ा पहनने लगे ।
उपर के दो बातों से ये बात निकल के सामने आती है कि जो बात एक समय सत्य थी वहीं बात दूसरे समय असत्य हो गई।

किसी आदमी या किसी जीव की हत्या करना असत्य है ।अगर वही अपनी रक्षा के लिए या अपने समाज अपने देश के लिए हम हत्या करते है तो वह सत्य है और हम इसको सत्य से तुलना करते है और वो अच्छी बात है ।तो सत्य का क्या हुआ ।किसी को दण्ड देना असत्य है ।मगर किसी को सुधारने के लिए दण्ड देना सत्य है। इसलिए उपर के सत्य को हम कसौटी पर परख सकते है और हर युग में ये सत्य बदलेगा और सत्य को उसी युग के हिसाब से परखा जाएगा ।तो हम सत्य किसे माने एक वो सत्य जो वक्त के साथ बदलता है या एक वो सत्य जो वक्त और समाज से परे है उसे ।
आदि समय से हमारे समाज के संत ,ऋषि मुनियों ने जिस सत्य को पाया वो क्या था ?
महात्मा बुद्ध ने जिसको पाया वो क्या था? वो कौन सा सत्य है जो सबसे छुपा है, और उसको पाने के लिए महात्मा बुद्ध को इतनी तपस्या करनी पड़ी ।इसी तरह कईयों ने पाया है। संत कबीर ने जिस सत्य के बारे में बताया वो क्या है ? विभिन्न तरह संप्रदाय ने सत्य को अपने हिसाब से परिभाषित किया है ।मगर आपने कौन से सत्य को देखा है माना है तो क्या इस सत्य को हम ईश्वर मान सकते है जो कि हर युग के साथ बदलता है तो क्या सत्य की ये परिभाषा उचित प्रतीत होती है?
तो सत्य की परिभाषा क्या है ?
जहां तक मैंने जाना है ईश्वर सत्य असत्य से ऊपर है । सत्य -असत्य इंसान ने अपनी जरूरत को पूरा करने के लिए बनाया है ।शुरू से ही मानव समूह में रहता आया है और इसी समूह से उसने समाज का निर्माण किया ।समाज को अनुशासित रखने के लिए और उसके उचित विकास के लिए उसने बहुत से नियमो को बनाया ।कुछ नियम वक्त के साथ अपने आप बनते गए ।जिसमें कुछ नियम बाध्यकारी थे जिसका पालन करना जरूरी था और कुछ नियम अबाध्यकारी थे।
ये सारे नियम कानून वह अपने समाज को सुरक्षित रखने के लिए और समाज को अनुशासित रखने के लिए ,उसके समाज के द्वारा बनाए गए नियम मात्र है। इसके अलावा बहुत सारे नियम जो वक्त के साथ बनते बिगड़ते गए जो हमारे अंदर घर कर गए ।वक्त के साथ साथ वही नियम हमारे लिए सत्य और असत्य के पर्याय बन गए और हम असली सत्य को भूलते गए । जिसको हम सत्य मानते है । ये सारे सत्य से ईश्वर की तुलना करना उचित नहीं लगता है।तो उचित सत्य क्या है ? क्या आप ने सत्य का अनुभव किया है ?क्या आप हमसे शेयर करेंगे? की सत्य क्या है सत्य के बारे में आपका अनुभव कैसा रहा है अभी तक और आपने अभी तक किसको सत्य माना है?
आपके अनुसार क्या सत्य ही ईश्वर है तो वह कौन सा सत्य है?सत्य की परिभाषा क्या है?
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धन्यवाद

अपना time आएगा

नमस्कार दोस्तोंअक्सर मैंने अपने आस पास अपने दोस्तों से ये कहते सुना है अपना टाइम आएगा ! ये अपना टाइम कब आएगा मेरे भाई!
जब हम बच्चे थे हमारी अलग ख्वाहिशें थी । छोटी -छोटी मगर बहुत सारी थी बहुत सारे पूरे हुए और बहुतों को भूल गया ।
जब थोड़ा और बड़े हुए मेरे देखने का नजरिया थोड़ा बदला और सपने भी बदले कुछ अपने थे कुछ लादे गए थे कुछ परिवार के द्वारा और कुछ समाज के द्वारा कुछ कहानियों और कुछ फिल्मों के द्वारा उसमे में भी कुछ पूरे हुए कुछ नहीं पूरे हुए और कुछ भूल गए ।
जब हम कुछ और बड़े हुए तो हमारे सपने बड़े हुए और इसके साथ ही हमारी सोच बड़ी हुई तब हम जवान थे और पूरी दुनिया को बदलने चले थे । अपनी ख्वाहिशों के तो कहने क्या मैं ये कर दूंगा मैं वो कर दूंगा ।
मैं ये खरीदूंगा मैं वो खरीदूंगा।
मैं यहां जाऊंगा मैं वहां जाऊंगा।
मैं ये काम करूंगा और मैं वो व्यापार करूंगा ।उफ्फ अपनी समझ से ज्यादा सोचना और करने के वक्त बिना किसी योजना के काम करना । फेल हो जाने पर अपने आपको कोसना और दूसरे काम में लग जाना
रात दिन केवल सपने सजाना और उन्हें पूरा नहीं करना ।ये बातें अक्सर आम आदमियों के जिंदगी में आती है । और जब वक्त बीत जाता है तब हम सभी को कोसते रहते है इसने मेरे लिए कुछ नहीं किया मेरे पिता ,माता परिवार,समाज ,देश ने मेरे लिए कुछ नहीं किया ।और हम दूसरे को देख देख कर जलते रहते है और उसके सपने पूरे होते देख अपने आपको किस्मत का दोष या पैसा का अभाव आदि का रोना रोतें रहतें है और उम्र भर हम अपने सपने को लेकर चलते हैं और कहते हैं अपना टाइम आएगा।
और ये टाइम कभी आता नहीं क्योंकि समय के साथ – साथ बहुत कुछ होता है जैसे शादी , बच्चे इससे हमारी जिम्मेदारी बढ़ती हैं और हम अपने सपने छोड़ कर बच्चों के सपने पूरे करने में लग जाते है तब भी हमको लगता है! अपना time आएगा क्योंकि अब हमें लगने लगता है कि हमारी ख्वाहिशें अब हमारे बच्चे पूरे करेंगे और फिर वही शुरू हो जाता है ।हम क्या करते है अपनी ख्वाहिशों को बच्चों के उपर डाल देते है और उसकी अपनी क्या क्या ख्वाहिशें है ये भूल जातें है ।साथ ही हम ये भी भूल जातें हैं कि जब हम इतने से थे तो क्या क्या सोचते थे अब जब उनका टाइम आया तो वहीं सब दोहरा रहें होते है।क्योंकि हमको तब भी लगता है अपना time आएगा ? और ऐसा करते करते पूरी जिन्दगी बीत जाती है और सोचते रहते है। अपना time आएगा !!! एक न एक दिन अपना time आएगा ? और अपना टाइम आते -आते जाने कब जाने का time आ जाता है? और हम अपने साथ अपने सारे सपने लिए दुनिया ही छोड़ देते हैं???? जब हमारे सपने पूरे नहीं होते तो हम क्या करें ??1) या तो हम जिन्दगी में अपने सपनों के साथ समझौता कर लें की जो पूरा हुआ ठीक नहीं पूरा हुआ तो भी ठीक ! इस सपने को देखना ही गलत है ये मेरे लिए नहीं है। और समझौता ही एक मात्र विकल्प है ??? 2) या तो हम जैसा चल रहा है चलने दे और अपनी जिंदगी को इसी तरह गुजार दें जैसा गुजर रहा है ?3) या तो हम कुछ करें कुछ योजना बनाएं और उसको अमल में लाएं ।जितना पूंजी हो उसी हिसाब से शुरू करे क्योंकि कोई काम छोटा नहीं होता बस आप उस छोटे काम को किस मुकाम तक ले जाते हो ये मायने रखता है ।कुछ और विचार करें अपना time तो आया नहीं मगर दूसरों के सारे सपने पूरे हो रहें है ! ऐसा क्यों ? और हम जब अपने आस पास देखतें है तो तो हम पाते है कि हमारे आसपास बहुत से ऐसे उदाहरण के रूप में मौजूद हैं जो छोटी शुरुआत से ही आज बड़ी बड़ी कंपनी के मालिक है ।बस आपको करनी है एक शुरुआत और छोड़ना नहीं है ये सोचते हुए की इस को हम नई उचाईयां कैसे दे ?? और बीच बीच में अपने आपको मोटिवेट करते रहें अच्छी अच्छी पुस्तकें पढ़ें जिस काम को कर रहें होते हैं उससे संबंधित अध्ययन करें। और वक्त को समझे और उस काम को समय दें ऐसे वक्त आते हैं ,जो बहुत सारे अवसर लेकर आते है।कुछ को हम पहचान पाते है और कुछ को हम नहीं पहचान पाते
अवसर मिलने पर भी हम उसका सही से उपयोग नहीं कर पाते कुछ भी गलती हो तो बिना कुछ सोचे समझे रात दिन अपने आपको कोसते रहते है ये कोसना छोड़ कर अपनी गलती को सुधारें और अवसर को पहचाने।
और अंत में कहना है कि अपना time आएगा ये कह कर उसे ईश्वर और भाग्य के भरोसे छोड़ना ये ठीक नहीं इस क्रम को हम ही क्यों न तोड़े ? और एक छोटी शुरुआत करें ।दोस्तों शुरुआत की कोई उम्र नहीं होती ।
शुरू करें और उसे मंजिल तक पहुंचाने के लिए छोटी छोटी मंजिलें बनाए और उसको प्राप्त करें और सेलिब्रेट करें और आगे बढ़ते रहें
धन्यवादऔर आपको बधाई हो नई शुरुआत के लिए

World famous Hindi songs

Popular Hindi songs
अपने देश भारत के ऐसे गाने जो पूरे विश्व में प्रसिद्ध हुए। जिसने सरहदों के बंधनों को तोड़कर अन्य देशों में भी hit हुए ।

तो आइए बात करते है अपने देश के कुछ चुनिंदा superhit hindi songs के बारे में ।
सबसे viral first song मेरा जूता है जापानी ये पतलून इंगलिस्तानी..…
ये फिल्म श्री 420 का गाना है ये फिल्म राज कपूर द्वारा अभिनीत है ।उस समय ये गाना सोवियत संघ में बहुत प्रसिद्ध था। और आज भी रूस में लोग इसको पसंद करते है ।
इस गाने को 2013 में आई फिल्म gravity में इस्तेमाल किया गया ।2016 में आई फिल्म Deadpool में भी लिया गया था ।और आगे …. FAMOUS INDIAN SONG

Second song फिल्म Aawara का ये गाना आवारा हूं…… है जो कि 1951 में आई थी , इस गाने ने भी उस समय धूम मचाया था। इसके गीतकार थे शैलेन्द्र और इसको गाया था मुकेश ने और इस गाने को फिल्माया गया था राजकपूर पर और साथ ही वे इस फिल्म के director भी थे। India के अलावा यह गाना चीन और सोवियत संघ के देशों में खूब प्रसिद्ध हुआ मई 2013 के BBC poll ने second greatest Bollywood song माना इसकी popularity का की वजह से ग्रीस,तुर्की ,सोवियत संघ ,चीन और रोमानिया में इसके गाने को खूब गाया गया।

Third song एक फिल्म आई थी 1982 में नाम था disko dancer उसके दो गाने जिसको उस जमाने में विश्व स्तर पर प्रसिद्धि मिली जिसमें पहला था जिमी जिमी आजा आजा….. इस गाने ने पूरी दुनिया को दीवाना बनाकर झूमने पर मजबुर किया था।विशेष रूप से रूस, तुर्की, चीन आदि देशों को। इतने सालो के बाद आज भी इस गाने का क्रेज कम नहीं हुआ है आज भी लोग सुनते है और झूमते हैं।

इस फिल्म का दूसरा गाना जो कि title song था गाने का बोल था I am a disko dander…. डिस्को डांसर का यह गाना तो लोगो को खूब पसंद आया साथ ही इसके dance step और इसके dress को खूब follow किया गया । इस गाने में मिथुन चक्रवर्ती थे ।ये अपने देश का एकमात्र गाना है जिसे चीन में award मिला था।

ये तो हुआ पुराने जमाने के गाने के बारे में अब कुछ नए गानों के बारे में बात करते हैं ऐसे गाने जो.. New viral Hindi song 1 फिल्म दिल से का एक गाना चल छैंया छैंया …..यह फिल्म 1998में आई ।इस गाने ने पूरे देश में धूम मचा दिया।यह गाना उस साल का सबसे लोकप्रिय गाना था। इस गाने शाहरुख खान और मलाइका अरोड़ा ने train के उपर डांस करते हुए दिखाया गया। यह गाना इंडोनेशिया में खूब प्रसिद्ध हुआ। 155 देशों का vote पाकर यह गाना Top 100 songs में यह 9 नंबर पर आया।

VIRAL HINDI SONGS

Song 2 फिल्म बेफिक्री का यह गाना #नशे सी चढ़ गई ओय कुड़ी…...यह गाना रणवीर सिंह और वाणी कपूर पर फिल्माया गया ।इस गाने को youtube पर 521 मिलियन से ज्यादा View मिले।इस गाने को अन्य देशों में भी पसंद किया गया ।

Song 3 फिल्म टाइगर जिंदा है का गाना स्वैग से करेंगे सबका स्वागत..…..यह गाना YouTube पर सबसे ज्यादा बार देखा गया इंडियन गाना है। इस गाने को गाया विशाल डेडलानी और नेहा भसीन ने और इस गाने को सलमान खान एवम् कैटरीना कैफ पर फिल्माया गया ।इसको बाद में अरबिक में भी Dub किया गया।

हिन्दी गानों में जय हो…..गाना को छोड़ना ये ठीक नहीं होगा ये फिल्म slumdog millionaire ka गाना है जो कि 2008में आया था।इस फिल्म का jai ho .. gaana पूरे विश्व में धूम मचा दिया था । यह गाना A R Rahman द्वारा रचित था जिसने ऑस्कर और ग्रेमी अवॉर्ड जीत कर पूरी दुनिया में तहलका मचा दिया कई International सेलिब्रिटीज ने भी इस गाने पर परफॉर्म किया है।

गीत

आशियाना मेरा।

New Hindi song

Life is song

दुनिया की बातों से दिल जला रहे है जाने अनजाने उनसे दिल लगा रहें है वो कहते है प्यार नहीं करते, वो कहते है प्यार नहीं करते, कह कह के दिल दुखा रहें है दुनिया की बातों से दिल जला रहा हूं,जाने अनजाने उनसे दिल लगा रहें है। इनके इरादे कुछ समझ नहीं आते, क्या जाने क्या बातें दबा रहें है। दर्द सा उठता है दिल में ,पल पल, आह भर रहें हैं ।दुनिया की बातों से दिल जला रहें है जाने अनजाने उनसे दिल लगा रहा हूं

बेवजह

Sunset

Hindi gana

बेवजह की बातों में उलझा रहता हूं, किसी के ख्याल में खोया रहता हूं ।दिन रात में कोई फर्क नहीं दिखता, लोगों को पागल लग रहा हूं । आदत नहीं थी इन सबकी, जबसे देखा हूं ,सब कुछ भुला रहा हूं। इक बार तो आओ तुम्हें कसम है उसकी ,इक बार तो आओ तुम्हें कसम है उसकी क्यों मेरा दिल क्यूं जला रहे हो। बेवजह की बातों में उलझा रहता हूं ,किसी के ख्याल में खोया रहता हूं।

Corona virus

Corona virus se kaise Bache कोरोना वायरस यानी COVID-19 जिससे चीन के अभी ज्यादा लोग प्रभावित है और अन्य देशों में तेजी से फैल रहा है । कोरोना वायरस से अधिकांश लोग जो संक्रमित होते है, ठिक हो जाते है । लेकिन यह दूसरों के लिए घातक हो सकता है जैसे पहले से बीमार व्यक्ति , बुजुर्ग इन के लिए ये जानलेवा हो सकता है।

इसलिए अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए दूसरों की रक्षा करें ।

कैसे फैलता है _खांसने ,छिकने, सांसो के द्वारा, लापरवाही से
Corona virus के लक्षण बुखार, सूखी खांसी ,और सांस लेने में कठिनाई ,गले में खराश


COVID-19 से कैसे बचें। ( 1) अपनी आदतों को सुधारें ,आंख, नाक और मुंह को छूने से बचे । दिन भर आदमी कई वस्तुओं को छूता है और उसी गंदे हाथ से अपने आंख, नाक और मुंह को छूता है क्या पता किस वस्तु में वायरस हो ?
(2) बार बार हाथ धोएं अपने हाथ को साबुन पानी से बार बार धोएं अपने मुंह, नाक आंख को छूने से पहले हाथों को साबुन पानी से धोएं(3) distance दूरी बनाकर रखें अपने आप को किसी भी खांसने और छींकने वालों से दूरी बनाकर रखें ये किसी को भी हो सकता है। क्योंकि जब किसी को खांसी या छींक आती है तो वे अपनी नाक या मुंह से छोटी छोटी तरल बूंदे छिड़कते है जिसमें वायरस हो सकता है। इसलिए इन सब से दूरी बनाकर रखें

मास्क कब लगाएं यदि आप स्वस्थ है तो केवल मास्क लगाएं
Mask कैसे लगाएं। मास्क को ऐसे लगाएं की मुंह और नाक पूरी तरह से ढक जाए। चेहरे और मास्क के बीच गैप ना हो।अगर मास्क सिंगल यूज हो तो दुबारा use na करें।

जब आपको निम्न परेशानी होती हो जैसे सूखी खांसी ,बुखार हो गले में खराश नाक बहता हो नजदीकी डॉक्टर से मिलें ज्यादा से ज्यादा घर पर ही रहें ।

भीड़ भाड़ वाले इलाके से दूर रहें ,कम से कम सफर करें।

जो लोग कोरोना को मज़ाक में ले रहे हैं, वो ये जान लें कि सेनिटाइज़ेशन में इटली हमसे 100 साल आगे है और अमेरिका 150 साल आगे ! फ़िर भी इटली में 2158 और अमेरिका में 30 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है….

शुक्र है, कि अभी भारत में ये वायरस सिर्फ रिच ओर अल्ट्रा रिच क्लास में है… खुदा न खस्ता ये लोवर क्लास ओर मिडल क्लास में घुस गया तो मंज़र भयावह होगा। चारों और लाशों का ढेर ही ढेर नजर आयेगा ।

मत भूलिए कि हमारे यहां साधारण डेंगू व मलेरिया भी महामारी बन जाता है क्योंकि सिस्टम ही खराब है… और सिर्फ़ सिस्टम को ही क्यों दोष देना हम ख़ुद भी कहां अपनी ज़िम्मेदारी निभाते हैं!!
जबकि बचाव के लिए सफाई के सिवाय और कुछ सहारा नहीं है, लिहाज़ा सावधानी बरतें।।
क्या आपको इससे पहले ऐसा देखने और सुनने को मिला है कि देश के देश lock down हो गये हो

एक बात हमेशा याद रखना सरकारें कभी भी ख़तरे के बारे मै खुलकर नहीं बताती ताकि अफ़रातफ़री या डर का माहोल न बने पर इंतज़ाम देखकर अंदाज़ा लगा लेना चाहिए कि ख़तरा कितना बड़ा है ! अभी यह वायरस भारत/राजस्थान में प्रथम स्टेज पर है । जब यह सामाजिक संक्रमण की स्थिति में पहुंच गया तो फिर हमारे पास रोने के सिवाय कुछ भी नहीं रह जायेगा क्योंकि इसकी कोई दवाई अभी नहीं बन पाई ।

सभी लोगों से विनती है कि सभी अपने-अपने स्तर पर सम्पूर्ण सावधानी बरतें ! देश के लिए नहीं तो स्वंय व अपने परिवार के लिए तो ख्याल रखियेगा 🙏🙏

Corona virus ke bare me or अधिक जाने

WHO

वो कौन थी

Vo kaun thi

aaj hm aap logo ko hindi khani online ki ek nyi duniya me le chlte hai jo ki aapko 1 nya anubhav dega ! aapko nye romanch safar pr le chalte hai
रात के अंधेरे में हम जा रहे थे

रात के करीब 11बजे थे।
उल्लू की आवाज सन्नाटे को भंग कर रही थी।
मक्खियां जो दिन भर इधर उधर करती  है उनका कहीं नामो निशान नहीं था ।

दिन में जो रौशनी हर तरफ फैली रहती है रात में वो भी चैन  की नींद में खो जाती है जैसे की रौशनी का कोई वजूद ही नहीं हो।


दूर दूर तक कोई इंसान नजर नहीं आ रहा था
पूरा रास्ता सुनसान था ।
और हम चले जा रहे थे मस्ती में
अंधेरे को चीरते हुए। अंधेरा ऐसा की अंधेरे में अपना हाथ तक नजर नहीं आता था ।
कि अचानक लगा कि मेरे सामने से कोई तेजी से निकल गया  हो और मैं  सन्न सा अंधेरे  में देखने कि कोशिश करने लगा ।बार बार मन में ख्याल आने लगे   कि कोई तो आगे से निकला है और अचानक उल्लू के भयानक आवाज से मैं घबरा गया । घबराने के बावजूद मैंने चलना नहीं छोड़ा , मैं किसी तरह उस जंगल को जल्दी जल्द छोड़ना चाहता था लेकिन जंगल था कि खत्म होने का नाम नहीं ले रहा था।
में अंदर से डरता एवम्  सोचता हुआ आगे बढ़ ही रहा था कि

ऐसा लगा कि किसी ने मेरा पैर पीछे से पकड़ लिया हो!!

अचानक हुए इस हमले से मैं बहुत डर गया ।

मेरा पूरा शरीर पसीने से लथपथ हो गया मेरा शरीर  डर से कांपने लगा और अब लगने लगा कि मैं गिर कर बेहोश हो जाऊंगा की अचानक किसी ने कान में कहा जरा नीचे तो देखो उसकी आवाज में जादू था ।उसके आवाज के जादू ने मुझे नीचे की ओर देखने पर मजबुर कर दिया तो मेरी नजर अचानक नीचे गई और मैं आश्चर्य से भर गया।

मेरा पांव कोई पकड़े नहीं था बल्कि मेरे पांव में कोई प्लास्टिक लिपटा है ।
जो मुझे आगे जाने से रोक रहा था अब जाके मेरे जान में जान आई ।
और मैं तेजी से उस रास्ते को पार करने लगा जब मैंने रास्ते को पार कर लिया तब जाके मुझे याद आया कि किसी ने मेरे कान में कुछ ? अचानक मेरा ध्यान उस बात की तरफ गया।
तो फिर एक बार डर और आश्चर्य से मैं सोचने लगा आखिर कौन थी ? उसके बातों का जादू उफ्फ मुझे सोचने पर मजबुर कर दिया और सोचते सोचते मुझे अपने आप पर ग्लानि   होने लगी ।

मैं अपने आपको कोस रहा था कि मैं कितना डर गया था ।

मैंने फिर उस जगह पर जाने का निर्णय किया।जहां उसकी आवाज मेरे कानो में गूंजी थी। लेकिन मन था कि जंगल के उस अंधेरे को बार बार याद कर रहा था।

इस बार मैं हिम्मत करके अपने साथ हुए घटना को याद करने लगा ।
   मन ही मन में अपने आप पर हंसने लगा ।
तो क्या मैं उस रास्ते पर फिर चल कर देखूं ,
मन ने अंदर से आवाज दिया

या अभी इतनी रात में वहां जाना खतरनाक होगा ? तो वो वहां रात के घने अंधेरे में क्या कर रही है।
और मैं बिना जाने वहां से कैसे चला आया
ये सब सोचता हुआ मैं अपने पैर को रोक नहीं पा रहा था जैसे कोई अज्ञात शक्ति मुझको अपने ओर खींच रही हो  और  एकबार
फिर से  मैं  उसी रास्ते पर था!!!!!!!

वो कौन थी ?क्या मैं उसके बारे में जान पाया ?क्या मैं उससे मिल पाया ? आखिर उसने मेरी मदद क्यों की? ये सब जानने के लिए पढ़े वो कौन थी पार्ट 2

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Musli

सफेद मूसली

सफेद मूसली

मूसली प्राकृतिक रूप से जंगलों में पाई जाने वाली ओषधीय पौधा है । वर्तमान समय में इसके गुणों को देखते हुए इसकी खेती की जाती है अलग से खेती करने का एक वजह और भी है अंधाधुंध जंगलों की कटाई के कारण यह पौधा जंगलों से विलुप्त हो चुका है। मूसली में सफेद मूसली लिलिएसी परिवार का कंदयुक्त पौधा है इसका वानस्पतिक नाम क्लोराफाइटम स्पीशीज है । इसमें सेपोजेनिन नामक तत्व पाया जाता है इस कारण बाजार में मूल्य सर्वाधिक है और इसकी मांग देश और विदेशों में है।

ये विभिन्न प्रकार के होते है इसकी कुछ वन्य प्रजातियां निम्न है

1क्लोरोफाईटम ट्युबरो सम

2/क्लोरोफाईटम अरुंडिनेसियम

3 क्लोरोफाईटम एटेनुएटम

4 क्लोरोफाईटम ब्रिविस्केपाम

इसकी अधिकतम उंचाई 45 से.मी.तक होती है। इसकी जड़ें जमीन में अधिकतम 25से.मी. तक होती है।

उपयोगी होता है/ यह त्रिदोषात्मक, बल एवम् पुष्टिकारक कामशक्ति बर्धक रक्त दोष और अतिसार नाशक , मधुमेह में भी उपयोगी होता है

यह महिलाओं के लिए भी अत्यधिक उपयोगी होता है

इसका उपयोग होम्योपैथिक एवम् आयुर्वेदिक दवाओं के बनाने में होता है।

सफेद मूसली ज्यादा ठंड वाले क्षेत्रों को छोड़कर लगभग सभी क्षेत्रों में पाया जाता है।

विश्व चेतना