अब कौन सा बंधन कौन सी माया,
जब तन में ना रहे प्राण।
अब कौन सिकंदर और किसका मान
जब तन में ना रहे प्राण।
क्या हाथों की रेखा , क्या कर्म विधान
जब तन में ना रहे प्राण।
क्या भाग्य का रोना ,और क्या है खोना
जब तन में ना रहे प्राण।
क्या सुंदर क्या गोरा काला,और किस प्राणी से पड़ेगा पाला,
जब तन में ना रहे प्राण ।
क्या रेशमी क्या सूती कपड़े जो तूने दिन रात पहने, अब कैसी शर्म हया,
जब तन में ना रहे प्राण।
क्या है माया क्या है काया छन में खाक भयो है भाया ,
अब क्या भोग विलास ,
जब तन में ना रहे प्राण।





