उलझन

किन उलझनों से गुजर रहा हूं
ये मैं जानता हूं
या

वक्त जानता है,

लोगों का क्या है

वो तो हमेशा मुस्कुराते देखते हैं।

रात अंधेरी और अनजान रास्ते
कैसे निकल रहा हूं ये मैं जानता हूं।

मैं वक्त के फितरत को जानता हूं मैं
वो कभी रुकता नहीं,वरना एक जख्म काफी था जिंदगी के लिए।

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