ऐसा सुबह कहां से लाऊं

अच्छे नहीं हालात दिल के

क्या जुगत लगाऊं
कैसे हो मिलन मनवीर
क्या क्या तौफे लाऊं।

जी के जिंदगी अपनी ना हुई
तो क्या मौत को गले लगाऊं।

सुंदर वचन , सुंदर चितवन
तो क्या सुंदरता का राग अलापु
रात और दिन का हो मिलन
ऐसा सुबह कहां से लाऊं

One thought on “ऐसा सुबह कहां से लाऊं”

  1. मैं कोशिश कर रहा हूँ
    सपने में
    मेरे लिए
    एक अर्थ
    ढूँढ़ने के लिए

    लक्ष्य मृत्यु है
    मौत
    मैं पार नहीं कर सकता

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