कुदरत का नियम

क्या खेल रचाया है ,जो तुमसे मिलाया है,

तुमने भी तो क्या, मन भरमाया है।

तेरी नफरत को भी, दिल से लगाया है,

क्या दिल ये बनाया है ,

जो दिल से लगाया है।

ना नजरों से देखी ,ना नजर मिलाया है,

क्या खूब बहाया है ,आंखो में आया है।

क्या खेल रचाया है ,जो तुमसे मिलाया है।

प्रकृति

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