मनवीर के दोहे

अकल लगा के प्रेम किया
प्रेम समझ ना आए,
प्रेम को जान के प्रेम किया
संसार प्रेममय हो जाय।

सत्य असत्य के फेर उलझा सारा संसार
मनवीर बैठा जानके देखत
सुनत बताए

हमने देखा तुमने देखा
सब नजर नजर का फेर
किसी ने देखा तन को
कोई जाने माया का फेर।

ना बत्ती ना बिछौना
ना धन का कछु होना,
जब उड़ जाए पंछी छोड़ घोसला,
तो किस बात का रोना।

आमद नगद उधारी जीवन
बिन गुरु ज्ञान बेकारी जीवन
खोज मनवीर गुरु को
ज्ञान मिली तर जाई जीवन।

अंधेरे में कछु सुझत नाही
रस्सी से भी घबराई,
गुरु मिले हैं जबसे ,
सब कुछ समझ में आई।

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