शरारत

उसके नजरों की शरारत
अब बढ़ने लगी है।

बात कुछ नहीं थी ,
बात बढ़ने लगी है।

दिल का बोझ अब धीरे -धीर
उतरने लगा है।

उसके नजरों की शरारत
अब
बढ़ने लगी है।

नींद आंखों की अब आंखों
से जाने लगी है।

रात रात भर जाग के दिल
मचलने लगा है।

उसके नजरों की शरारत अब
बढ़ने लगी है।

दिल की बैचैनी ,
अब बढ़ने लगी है।
उनकी कमी अब,
खलने लगी है।

बात बात पे सब हंसने लगे हैं।

उसके नजरों की शरारत अब
बढ़ने लगी है।

शरारत करने लगें है दोस्त
नाम लेके उनका,
बात -बात में अब बात बढ़ने लगी है।

यूं तो हम भी खोए है उनकी यादों में,

यूं तो हम भी खोए है उनकी यादों में,

ऐसा लगता है इश्क में उसके
हम खो से गए हैं।

उनके नजरों की शरारत अब बढ़ने लगी है।

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