हर अंत एक शुरुआत लेके आती है,
लेकिन ये पता उसे ही चलता है जिसने इसे महसूस किया है।
जैसे समंदर की लहरें हर बार किनारे आकार अपने अंत को प्राप्त होती है ,
फिर से नए लहर का रूप लेने के लिए।
हर अंत एक शुरुआत लेके आती है,
लेकिन ये पता उसे ही चलता है जिसने इसे महसूस किया है।
जैसे समंदर की लहरें हर बार किनारे आकार अपने अंत को प्राप्त होती है ,
फिर से नए लहर का रूप लेने के लिए।
उसके पूरे शरीर पर मिट्टी लगा था,
पर आंखों में इक अलग सी चमक थी,
चेहरे पर संतोष का भाव था।
पूछने पर पता चला -: दो बार फसल के डूबने पर ,
वह तीसरी बार धान लगा के आया है ।
हर बार की तरह इस बार भी पूरा विश्वास है कि फसल बच जाएगा।