Tag Archives: या फैले दशों दिशाओं में कुटुम्बों पर

रावण तू कैसा अभिमानी?

रावण तू कैसा अभिमानी?

क्या तुम्हे अभिमान था अपने भाई पर

या अभिमान था अपने दशो दिशाओं में फैले अपने कुटुंबों पर,

क्या तू अनजान था अपने अंत से?

क्या तू विभिन्न शास्त्रों का ज्ञाता था?

क्या तू भक्त था महाकाल का?

रावण तू कैसा अभिमानी ?

महाकाल

क्या तू अनजान था अपनी अमरता से?

या अनजान था अपनी जय पराजय से ?

जब सब कुछ था तू जानता,

तो दानव कैसे हुआ ?

क्या तू ऋषि का संतान नहीं ?

तेरे खून में उनका खून नही ?

रावण तू कैसा अभिमानी?

युद्ध

क्या तूने बड़ों की बात नहीं मानी?

क्या था तूने मन में ठानी?

रावण तू कैसा अभिमानी?

क्या तू युद्ध के अंत को जानता न था?

रावण तू कैसा स्वाभिमानी ?

क्या अपने इज्जत के खातिर ईश्वर से युद्ध ठानी ?

रावण तू कैसा अभिमानी ?