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नजर आती है बात

नजर आती है बात

जब कोई बात दिल को छू ले,

नजर आती है बात।

जब किसी की बात झगड़े करवाए,

नजर आती है बात।

झगड़े

जब किसी की बात से टूटते रिश्ते जुड़ जाए ,

नजर आती है बात।

रिश्ते

जब कोई बातों का मतलब समझाए,

नजर आती है बात।

जब कोई बच्चा तोतली आवाज में ,

तुझे आवाज लगाए ,

Child

नजर आती है बात।

कठिन राहों में कोई हमसफर दे आवाज,

नजर आती है बात।

डूबते को तिनके का सहारा बन जब बढ़ाता कोई हाथ,

नजर आती है बात।

कराहते दर्द में सिर पे फेरे कोई हाथ,

नजर आती है बात।

दर्द

कोई अनजान बे – सहारों की लाठी बन जाए,

नजर आती है बात।

तूफान भरी समंदर में किनारा लग जाए नाव,

नजर आती है बात।

तूफान

शरारत

उसके नजरों की शरारत
अब बढ़ने लगी है।

बात कुछ नहीं थी ,
बात बढ़ने लगी है।

दिल का बोझ अब धीरे -धीर
उतरने लगा है।

उसके नजरों की शरारत
अब
बढ़ने लगी है।

नींद आंखों की अब आंखों
से जाने लगी है।

रात रात भर जाग के दिल
मचलने लगा है।

उसके नजरों की शरारत अब
बढ़ने लगी है।

दिल की बैचैनी ,
अब बढ़ने लगी है।
उनकी कमी अब,
खलने लगी है।

बात बात पे सब हंसने लगे हैं।

उसके नजरों की शरारत अब
बढ़ने लगी है।

शरारत करने लगें है दोस्त
नाम लेके उनका,
बात -बात में अब बात बढ़ने लगी है।

यूं तो हम भी खोए है उनकी यादों में,

यूं तो हम भी खोए है उनकी यादों में,

ऐसा लगता है इश्क में उसके
हम खो से गए हैं।

उनके नजरों की शरारत अब बढ़ने लगी है।