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वक्त का उल्लू

वक्त का उल्लू देख रहा है,

तू जो जज्बातों से खेल रहा है
रात घनेरा दिन का राही ,

क्यों तू आंखे खोल रहा है,

वक्त का उल्लू देख रहा है।

तेरी करनी तेरी भरनी,

क्यों तू बीच में डोल रहा है।

वक्त का उल्लू देख रहा है।

उल्लू

रात दिन का रैन बसेरा
ये जो दिल खिलौना तेरा
क्यों तू इससे खेल रहा है।

वक्त का उल्लू देख रहा है।

तूने दिया किसको अपनापन

जो ये तुम खोज रहा है।

वक्त का उल्लू देख रहा है।