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हर बार मैं हारा हूं

हर बार मैं हारा हूं

हर बार तू जीता है

ये जिंदगी मुझे अब बस

लगता इक धोखा है…..

हर बार मैं हारा हूं..

हर बार तू जीता है..

फिर हारे हुए का तू

बनता क्यों सहारा है..

हर बार मैं हारा हूं..

हर बार तू जीता है…

सुनता नहीं अर्जी है

क्या तेरी मर्जी है..

कब तक यूं मोहन

माया में नचाओगे…

कब मेरी सुध लोगे..

कब पार उतारोगे….

हर बार तू जीता है..

हर बार मैं हारा हूं…