सर पे मौत खड़ी है,
फिर भी लोभ में पड़ी है।
क्या ये तेरे जिंदगी से बड़ी है,
फिर भी जिद पे अड़ी है ।
तू किसके लिए ये लफड़ा ले रहा है,
है कौन जिससे खेल रहा है?
क्या ये बात इतनी बड़ी है?
सर पे मौत खड़ी है,
फिर भी जिद पे अड़ी है।

कैसी ये आरजू कैसा नशा है?
किसने बहकाया तुझे,
किसकी खता है?
अरे सर पे मौत खड़ी है ,
फिर भी जिद पे अड़ी है।
लोभ के कारण क्यों पाप करे है?
पाप के घड़ा को क्यों भरे है?
ये बदमाशी क्यों करे है?
अरे सर पे मौत खड़ी है,
फिर भी जिद पे अड़ी है।