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तिलिस्मी दुनिया

किससे सिकवा करूं,

क्या शिकायत करूं,

किसको अपना कहूं,

किससे बगावत करूं,

इस तिलिस्मी दुनियां में किसको क्या कहूं।

इस घुप्प अंधेरे में,

किस चिराग को रौशनी कहूं

चिराग

किसकी नजर में रहूं ,

किस पे नजर रखूं,

इस मायावी संसार में किधर रहूं।

नजर

किससे बात करूं,

किसकी बात सुनूं,

इस अनोखे संसार में किसकी जज्बात बनूं

किससे सिकवा करूं,

क्या शिकायत करूं,

किसको अपना कहूं,

किससे बगावत करूं।