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भरोसा

तू मत समझना गमजदा नहीं मैं तेरे गम से,

अश्क सुख गए है आंखों से गिरते– गिरते ,

तेरे गम के लिए आंसू कहां से लाऊं मैं।

तू न समझे तो कैसे तुझे समझाऊं मैं,

आंखों के आंसू

तेरे पीछे मैं खड़ा रहा हर पल,

तेरे दुःख में करीब रहा हर पल,

ये बात कैसे बताऊं मैं।

तू न समझे तो कैसे तुझे समझाऊं मैं।

तेरे करीब

तुझे भरोसा हो ना हो मेरे बातों का,

तू बात समझे नहीं मेरे जज्बातों का,

शायद किस्मत कोई खेल ,

खेल रही हो मुझसे,

तू न समझे तो कैसे तुझे समझाऊं मैं।