होती कई तरह के बात,
ना घायल होते जज्बात,
जब हम होते तेरे साथ,
जब हम होते तेरे साथ।
इसमें ना तेरा हाथ,
फिर क्या करूं बात,
रहता तेरा साथ,
करते दिन रात बात,
सुख दुख में निभाते साथ,
जब हम होते तेरे साथ।
जब हम होते तेरे साथ।

तू समझती मेरी बात,
मैं समझता तेरी बात,
होते कैसे भी हालात,
हम निभाते एक साथ,
दिन दोपहर या घनेरी रात,
जब हम होते तेरे साथ,
जब हम होते तेरे साथ।
होती कैसी भी बात,
ना करते नजरंदाज,
तेरे कहने से पहले,
समझते तेरे दिल की बात,
जब हम होते तेरे साथ,
जब हम होते तेरे साथ।
वक्त अब इस कदर है बदला,
जैसे लगता है ,ले रहा हो बदला,
ना तू है मेरे साथ ,
किसे बताऊं अपनी जज्बात,
तू वक्त के साथ चली गई,
मैं इंतजार करता रह गया,
अब कैसे भी हो मेरे ख्यालात,
तू ना करेगी मुझसे बात,
मेरे अधूरे सपने,
मेरी अधूरी रात,
जब हम होते तेरे साथ,
जब हम होते तेरे साथ।