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जीवन चक्र

क्लेश कष्ट करुणा
मरणासन्न बुढ़ापा तरुणा।

लू पेड़ छाया
कंचन काया माया।

सब्र विश्वास मीठा
बेसब्र अविश्वास तीखा।

नायक,जीवन कठिन

जीवन मृत्यु पलछिन्न।

अपमान अनादर प्रतिष्ठा
सत्य कर्म निष्ठा।

अविवेक क्रोध घमंड
अंत प्रलय तांडव।

भय घृणा,तृष्णा
अंत समय सब कृष्ण।

कृष्ण – सुदामा

जब जहां की सारी हदें पार कर लो,
दुनिया की सारी इम्तहान पास कर लो,
जब तेरे पास कोई मंजिल ना बचा हो
तूने सारी मंजिलें पा ली हो,

जब ये दुनिया के गम तुझे सताने लगे
जब निराशा तुझे घेरने लगे हो,
तब मुझे याद करना मेरे दोस्त।
तब मुझे याद करना मेरे दोस्त।
मैं हूं तेरे साथ हर पल
तू याद करे ना करे।
जब तू मुझे सोचेगा ,
मेरे दिल में लहर उठेगा।
दीवारें कितनी भी हो तेरे मेरे
दरम्यान
मैं इंतजार करूंगा तेरी आहट का
तेरी आहट पा के सारी दीवार तोड़
दूंगा
दोस्त फिकर मत करना दुनिया के बातों का,
तू मेरा दोस्त है मेरा दोस्ती रहेगी।
जब तक ये दुनिया है ,ये बातें होती रहेगी।