किसका दर्द सुनूं मैं,
किसको दर्द सुनाऊं,
सब हैं आंखों के अंधे ,
किसको जख्म दिखाऊं?
कौन है यहां चैन से?
किसे बैचेनी दिखाऊं।
किसका दर्द सुनूं मैं?
किसको दर्द दिखाऊं।

ना तो कोई हंसता यहां
ना ही कोई खुश है
दुनिया के झमेले में तो
हर आदमी गुम है।
दिन तो बीतता नहीं
कैसे रात बिताऊं?
किसका दर्द सुनूं मैं?
किसको दर्द सुनाऊं?

फुरसत नहीं किसी को,
यहां अपनों के लिए,
क्या खाक काम आएगा,
वह दूसरों के लिए,

वक्त नहीं है खुद के लिए,
वह दूसरों को क्या देगा,
किसके दर्द को देखेगा,
किस पर मरहम लगाएगा,
किसका दर्द सुनूं मैं?
किसको दर्द सुनाऊं?
सब आंखों के अंधे,
किसको जख्म दिखाऊं?