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वक्त का तूफान

वक्त के तूफान से घिरा हूं

कभी इधर तो कभी उधर पड़ा हूं।

लेकिन क्या कहूं ?

देखता हूं ख्वाब ,

ऊंचे आसमान का,

ये बात अलग है,

गर्दिश में सितारे हैं ।

पर

चांद लाने की जिद छोड़ी नहीं मैने,

चांद लाने की जिद छोड़ी नहीं मैने,

चांद

अब देखना है,

किस्मत कितना जोर लगाती है।

मेरे कर्म मुझे कितना उठाती है,

या मेरी जिद मुझे डुबाती है।

वक्त और मेरे बीच होड़ लगी है।

वक्त के तूफान से घिरा  हूं,

कभी इधर तो कभी उधर पड़ा हूं।