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अपना time आएगा

नमस्कार दोस्तोंअक्सर मैंने अपने आस पास अपने दोस्तों से ये कहते सुना है अपना टाइम आएगा ! ये अपना टाइम कब आएगा मेरे भाई!
जब हम बच्चे थे हमारी अलग ख्वाहिशें थी । छोटी -छोटी मगर बहुत सारी थी बहुत सारे पूरे हुए और बहुतों को भूल गया ।
जब थोड़ा और बड़े हुए मेरे देखने का नजरिया थोड़ा बदला और सपने भी बदले कुछ अपने थे कुछ लादे गए थे कुछ परिवार के द्वारा और कुछ समाज के द्वारा कुछ कहानियों और कुछ फिल्मों के द्वारा उसमे में भी कुछ पूरे हुए कुछ नहीं पूरे हुए और कुछ भूल गए ।
जब हम कुछ और बड़े हुए तो हमारे सपने बड़े हुए और इसके साथ ही हमारी सोच बड़ी हुई तब हम जवान थे और पूरी दुनिया को बदलने चले थे । अपनी ख्वाहिशों के तो कहने क्या मैं ये कर दूंगा मैं वो कर दूंगा ।
मैं ये खरीदूंगा मैं वो खरीदूंगा।
मैं यहां जाऊंगा मैं वहां जाऊंगा।
मैं ये काम करूंगा और मैं वो व्यापार करूंगा ।उफ्फ अपनी समझ से ज्यादा सोचना और करने के वक्त बिना किसी योजना के काम करना । फेल हो जाने पर अपने आपको कोसना और दूसरे काम में लग जाना
रात दिन केवल सपने सजाना और उन्हें पूरा नहीं करना ।ये बातें अक्सर आम आदमियों के जिंदगी में आती है । और जब वक्त बीत जाता है तब हम सभी को कोसते रहते है इसने मेरे लिए कुछ नहीं किया मेरे पिता ,माता परिवार,समाज ,देश ने मेरे लिए कुछ नहीं किया ।और हम दूसरे को देख देख कर जलते रहते है और उसके सपने पूरे होते देख अपने आपको किस्मत का दोष या पैसा का अभाव आदि का रोना रोतें रहतें है और उम्र भर हम अपने सपने को लेकर चलते हैं और कहते हैं अपना टाइम आएगा।
और ये टाइम कभी आता नहीं क्योंकि समय के साथ – साथ बहुत कुछ होता है जैसे शादी , बच्चे इससे हमारी जिम्मेदारी बढ़ती हैं और हम अपने सपने छोड़ कर बच्चों के सपने पूरे करने में लग जाते है तब भी हमको लगता है! अपना time आएगा क्योंकि अब हमें लगने लगता है कि हमारी ख्वाहिशें अब हमारे बच्चे पूरे करेंगे और फिर वही शुरू हो जाता है ।हम क्या करते है अपनी ख्वाहिशों को बच्चों के उपर डाल देते है और उसकी अपनी क्या क्या ख्वाहिशें है ये भूल जातें है ।साथ ही हम ये भी भूल जातें हैं कि जब हम इतने से थे तो क्या क्या सोचते थे अब जब उनका टाइम आया तो वहीं सब दोहरा रहें होते है।क्योंकि हमको तब भी लगता है अपना time आएगा ? और ऐसा करते करते पूरी जिन्दगी बीत जाती है और सोचते रहते है। अपना time आएगा !!! एक न एक दिन अपना time आएगा ? और अपना टाइम आते -आते जाने कब जाने का time आ जाता है? और हम अपने साथ अपने सारे सपने लिए दुनिया ही छोड़ देते हैं???? जब हमारे सपने पूरे नहीं होते तो हम क्या करें ??1) या तो हम जिन्दगी में अपने सपनों के साथ समझौता कर लें की जो पूरा हुआ ठीक नहीं पूरा हुआ तो भी ठीक ! इस सपने को देखना ही गलत है ये मेरे लिए नहीं है। और समझौता ही एक मात्र विकल्प है ??? 2) या तो हम जैसा चल रहा है चलने दे और अपनी जिंदगी को इसी तरह गुजार दें जैसा गुजर रहा है ?3) या तो हम कुछ करें कुछ योजना बनाएं और उसको अमल में लाएं ।जितना पूंजी हो उसी हिसाब से शुरू करे क्योंकि कोई काम छोटा नहीं होता बस आप उस छोटे काम को किस मुकाम तक ले जाते हो ये मायने रखता है ।कुछ और विचार करें अपना time तो आया नहीं मगर दूसरों के सारे सपने पूरे हो रहें है ! ऐसा क्यों ? और हम जब अपने आस पास देखतें है तो तो हम पाते है कि हमारे आसपास बहुत से ऐसे उदाहरण के रूप में मौजूद हैं जो छोटी शुरुआत से ही आज बड़ी बड़ी कंपनी के मालिक है ।बस आपको करनी है एक शुरुआत और छोड़ना नहीं है ये सोचते हुए की इस को हम नई उचाईयां कैसे दे ?? और बीच बीच में अपने आपको मोटिवेट करते रहें अच्छी अच्छी पुस्तकें पढ़ें जिस काम को कर रहें होते हैं उससे संबंधित अध्ययन करें। और वक्त को समझे और उस काम को समय दें ऐसे वक्त आते हैं ,जो बहुत सारे अवसर लेकर आते है।कुछ को हम पहचान पाते है और कुछ को हम नहीं पहचान पाते
अवसर मिलने पर भी हम उसका सही से उपयोग नहीं कर पाते कुछ भी गलती हो तो बिना कुछ सोचे समझे रात दिन अपने आपको कोसते रहते है ये कोसना छोड़ कर अपनी गलती को सुधारें और अवसर को पहचाने।
और अंत में कहना है कि अपना time आएगा ये कह कर उसे ईश्वर और भाग्य के भरोसे छोड़ना ये ठीक नहीं इस क्रम को हम ही क्यों न तोड़े ? और एक छोटी शुरुआत करें ।दोस्तों शुरुआत की कोई उम्र नहीं होती ।
शुरू करें और उसे मंजिल तक पहुंचाने के लिए छोटी छोटी मंजिलें बनाए और उसको प्राप्त करें और सेलिब्रेट करें और आगे बढ़ते रहें
धन्यवादऔर आपको बधाई हो नई शुरुआत के लिए