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जीवन चक्र

क्लेश कष्ट करुणा
मरणासन्न बुढ़ापा तरुणा।

लू पेड़ छाया
कंचन काया माया।

सब्र विश्वास मीठा
बेसब्र अविश्वास तीखा।

नायक,जीवन कठिन

जीवन मृत्यु पलछिन्न।

अपमान अनादर प्रतिष्ठा
सत्य कर्म निष्ठा।

अविवेक क्रोध घमंड
अंत प्रलय तांडव।

भय घृणा,तृष्णा
अंत समय सब कृष्ण।

अंतकाल

जब उम्र बिता भाई
तब जाके अकल आई।
क्या खोया क्या पाया
क्या सारी उम्र गंवाया।
आज तुझे पता चला
तेरी हैसियत कुछ नहीं।
जब आई हलक में जान
तब तुझे ,सुझे आसमान।
तुझे दिया जिन्दगी
तू समझा दिल्लगी।
कोई खेल में लागा
कोई मौज में लागा।
जब आई तेरी बारी
तू होश में जागा।
समय का तूने किया नहीं मान
अब रोये
क्या करे?
जब तेरा आया अंत समय
खोया सारा जिन्दगी

तू रहा पछताय,