किसकी कविता

किसकी कविता किसकी कहानी हो

किसने लिखा तुम्हे ,

किसकी जिंदगानी हो

किसके यादों से निकली ,

किसकी तुम जबानी हो।

यादें

कितने अरमानों को अपने अंदर पाली हो,

किसकी मुस्कुराहट किसकी बैचेनी हो,

किसकी कविता किसकी कहानी हो।

कितनी शिद्दत से निकली, कैसी पहेली हो,

जब भी देखा तुम्हे लगती नई नवेली हो।

किसकी कविता किसकी कहानी हो।

जब हम होते तेरे साथ

होती कई तरह के बात,

ना घायल होते जज्बात,

जब हम होते तेरे साथ,

जब हम होते तेरे साथ।

इसमें ना तेरा हाथ,

फिर क्या करूं बात,

रहता तेरा साथ,

करते दिन रात बात,

सुख दुख में निभाते साथ,

जब हम होते तेरे साथ।

जब हम होते तेरे साथ।

उदास

तू समझती मेरी बात,

मैं समझता तेरी बात,

होते कैसे भी हालात,

हम निभाते एक साथ,

दिन दोपहर या घनेरी रात,

जब हम होते तेरे साथ,

जब हम होते तेरे साथ।

होती कैसी भी बात,

ना करते नजरंदाज,

तेरे कहने से पहले,

समझते तेरे दिल की बात,

जब हम होते तेरे साथ,

जब हम होते तेरे साथ।

वक्त अब इस कदर है बदला,

जैसे लगता है ,ले रहा हो बदला,

ना तू है मेरे साथ ,

किसे बताऊं अपनी जज्बात,

तू वक्त के साथ चली गई,

मैं इंतजार करता रह गया,

अब कैसे भी हो मेरे ख्यालात,

तू ना करेगी मुझसे बात,

मेरे अधूरे सपने,

मेरी अधूरी रात,

जब हम होते तेरे साथ,

जब हम होते तेरे साथ।

विकल्प

जिंदगी हो या जंग हो विकल्प हमेशा दो आते हैं

जंग में जाने के वक्त हमेशा दो विकल्प होते हैं

या तो आप जंग में जाओ या तो पीछे हट जाओ,

अगर जंग में जाते हो तो भी दो विकल्प सामने होते है हारो या जीतो।

जिंदगी के हर क्षेत्र हमेशा ही दो विकल्प मिलते हैं,

विकल्प

कई बार ऐसा लगता है हमारे पास कई सारे विकल्प है लेकिन होते हैं केवल दो

जैसे परीक्षा में एक प्रश्न के उत्तर में चार विकल्प होते है परंतु होते है केवल दो सही या गलत

ये परिस्थितियां हमें दुविधा में डालती हैं।

पर चयन करने पर पता चलता है की विकल्प केवल दो ही थे सही या गलत।

जिंदगी के कई मोड़ पर हमारे साथ ऐसा होता है,

हमें लगता है हमारे पास बहुत विकल्प है और इसी कारण हम किसी भी विकल्प का चयन नहीं कर पाते ।

और कभी कभी ऐसा लगता है हमारे पास कोई विकल्प नहीं है

तब भी हमारे पास दो विकल्प होते है पहला हम विकल्प खोजे और दूसरा परिस्थिति के आगे घुटने टेक दें।

दिल तोड़ के

जाओ जाओ ना छोड़ के तुम,

ये मेरा दिल तोड़ के।

क्या है मुश्किल ये मैं जानू,

जाना ना मुझको छोड़ के,

जाओ जाओ ना छोड़ के तुम,

ये मेरा दिल तोड़ के,

तेरे लिए ये दिल धड़के

छोडूंगा न मैं मर के।

जाओ जाओ ना छोड़ के तुम,

ये मेरा दिल तोड़ के।

तुम करो ना वफा,

मैं करूंगा वफा,

तुम अपने वादों से मुकर जाओ,

मैं निभाऊंगा अपना वादा।

जाओ न छोड़ के तुम,

ये मेरा दिल तोड़ के।

गिरगिट

जैसे गिरगिट रंग बदलती है,

वैसे तुम भी रंग बदलती हो।

तेरे रंग तेरे ढंग है बड़े निराले,

ये कितनों को यूं ही मार डाले।

तेरा चलना ,तेरा हंसना,

हाय कयामत ही लाए।

जैसे गिरगिट रंग बदलती है,

वैसे तुम भी रंग बदलती हो।

गिरगिट

बातें किसी से ,किसी से है मिलना,

मुहब्बत किसी से , है दिल किसी का।

कितनों का दिल है तोड़ा ,

कितनों से मुंह मोड़ा,

कैसे वफा निभाती हो।

जैसे गिरगिट रंग बदलती है,

वैसे तुम भी रंग बदलती हो।

दिल

तेरा भोला चेहरा ,

यूं हँस के बात करना,

हर किसी को लुभाती हो।

जब चाहे प्यार करो तुम,

जब चाहे छोड़ देती हो।

जैसे गिरगिट रंग बदलती है,

वैसे तुम भी रंग बदलती हो।

किसका दर्द

किसका दर्द सुनूं मैं,

किसको दर्द सुनाऊं,

सब हैं आंखों के अंधे ,

किसको जख्म दिखाऊं?

कौन है यहां चैन से?

किसे बैचेनी दिखाऊं।

किसका दर्द सुनूं मैं?

किसको दर्द दिखाऊं।

बैचैनी

ना तो कोई हंसता यहां

ना ही कोई खुश है

दुनिया के झमेले में तो

हर आदमी गुम है।

दिन तो बीतता नहीं

कैसे रात बिताऊं?

किसका दर्द सुनूं मैं?

किसको दर्द सुनाऊं?

दर्द

फुरसत नहीं किसी को,

यहां अपनों के लिए,

क्या खाक काम आएगा,

वह दूसरों के लिए,

फुरसत

वक्त नहीं है खुद के लिए,

वह दूसरों को क्या देगा,

किसके दर्द को देखेगा,

किस पर मरहम लगाएगा,

किसका दर्द सुनूं मैं?

किसको दर्द सुनाऊं?

सब आंखों के अंधे,

किसको जख्म दिखाऊं?

नाराजगी

किस बात से नाराजगी है?

किस बात का मलाल है?

क्या हो गया है आपको?

क्यूं खफा खफा से लगते हो ?

क्या राज है जो आम है ?

क्यों तन्हा तन्हा बैठे हो ?

किस बात से नाराजगी है?

किस बात का मलाल है?

नाराजगी

क्या प्यार में धोखा मिला?

या प्यार में धोखा दिया आपने

कितना प्यार था,कितनी मुहब्बत थी?

सब भूल कर ये क्या कर लिया?

किस बात की शर्मिंदगी है?

किस बात का बबाल है?

क्या दर्द है,क्या सवाल है?

किस बात से नाराजगी है?

किस बात का मलाल है ?

सबक

दिल ने सीखा नहीं सबक प्यार का

इतना दर्द मिला ,तकलीफ मिली,

दिल फिर भी उस ओर चला

मौका जब भी मिला तूने धोखा दिया,

दिल फिर भी न माने मैं करूं भी तो क्या

तुझ से उम्मीद की मैने वफा की सनम

तूने मतलब निकाला ओ मतलबी सनम,

दिल ने सीखा नहीं सबक प्यार का

इतना दर्द मिला ,तकलीफ मिली

मेरे जीने के सहारे

आजा तुझको पुकारे आजा,

मेरे जीने के सहारे आजा।

दिल मेरा तुझे पुकारे आजा,

तेरी लिए ये दिल धड़के,

मेरी आंखे रिमझिम बरसे,

आंखे

आजा तुझको पुकारे आजा..

मेरे जीने के सहारे आजा।

लाख दुहाई दूं दिल का,

तू ना समझे मुश्किल दिल का,

रात अंधेरी काली घटाएं,

मुझको सताए तेरी यादें,

तू ना समझे किसे समझाऊं

कौन है अपना किसे मनाऊं,

आजा तुझको पुकारे आजा,

मेरे जीने के सहारे आजा!

कैसे मनाऊं तुझे कैसे बुलाऊं,

किसको दिल का हाल सुनाऊं,

गम ए जुदाई कौन सुनेगा,

किससे मैं फरियाद लगाऊं,

आजा तुझको पुकारे ,

मेरे जीने के सहारे आजा..

आजा मेरी अधूरी चाहत आजा..

मेरे जीने के सहारे आजा…

जाऊं कहां

तेरा ही दर है मेरा ठिकाना,

तेरे दर न आऊं ,

तो मैं जाऊं कहां?

किससे करूं मैं फरियाद?

किसको सुनाऊं मैं ये बात?

तेरे दर न आऊं ,

तो मैं जाऊं कहां?

नजर में ही रखना ,

नजर ना हटाना,

तेरी नजरों से दूर,

मैं जाऊं कहां?

तेरे दर न आऊं ,

तो मैं जाऊं कहां?

तेरे ही कारण,

जिंदा खड़ा हूं,

तेरे ही दर पे आके पड़ा हूं

तेरे दर न आऊं ,

तो मैं जाऊं कहां?

तेरे दर न आऊं,

तो मैं जाऊं कहां?

विश्व चेतना