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इंतजार

मैं पढूंगा तब खाऊंगा,


नहीं बेटा पहले खा ले फिर पढ़ना।


नहीं मैं पढूंगा तब खाऊंगा।


नहीं बेटा रात बहुत हो गई है

तू खाना खा ले फिर मन लगा के पढ़ना,


नहीं मां मुझे अभी और पढ़ना है ,

तू खाना खा ले , मैं खा लूंगा ,

नहीं बेटा मैं इंतजार करूंगी, तू पढ़,


बच्चे के जिद के आगे मां की एक ना चली,


मां बैठ कर इंतजार करने लगी,

समय बीतता रहा ,रात गहराने लगी, लेकिन बच्चा पढ़ाई छोड़ नही रहा था,


और मां बिना खाए बैठी इंतजार कर रही है……….


समय गुजरा बच्चा बड़ा हुआ ,


अब उसके पास सारे ऐशोआराम है ,

पर आज भी मां फोन पे बेटा कब आएगा ,


मां मैं आ जाऊंगा तू खा ले,


नहीं बेटा तू जल्दी आ खाने का समय हो गया ,

नहीं मां अभी मैं बहुत जरूरी काम कर रहा हूं,

तू खा ले ,नहीं बेटा तू आ ,

मैं इंतजार कर रही हूं……

कौन कहे

बहुत दिनों तक शहर में रहने के पश्चात

एक लड़का अपने पिता से मिलने गाँव आया।

अपने पिता को मेहनत करते देख उसने सोचा थोडा पिताजी का हाथ बटाया जाए ।

और वह पिता के साथ  काम करने लग गया

लेकिन काम था कि खत्म होने का नाम नहीं ले रहा था।

दोपहर से शाम होने को आ रही थी ,धीरे – धीरे
अब रात होने को आ गई,

लेकिन अब भी कुछ काम बांकी था।

   दिन – रात के मेहनत से वह अब झल्ला सा गया था।

इतनी मेहनत कोई कैसे कर सकता है।

मैं तो इतने में ही परेशान हो गया हूं।

तो कोई  हर वक्त किसी भी मौसम में  इतना मेहनत कैसे  कर सकता है?

परेशान होते हुए बेटे ने अपने  बाप से पूछा,

तो बाप ने ज़बाब दिया –  किसान
और काम करने लगा।

रिश्ता

जाने क्या बात थी कुछ दिनों से उसने बात करना तो दूर की बात ,
मेरे तरफ देखना भी बंद कर दी थी।

मैं उसके इस बेरुखी से बहुत परेशान था ,
की मैंने आखिर क्या कह दिया ,
मेरे किस बात ने उसको चोट पंहुचाई है।

जिनको कल तक बात किए बिना चैन ना था, आज वो मेरे तरफ देखते भी नहीं,कई बार मैंने बात करने की कोशिश भी की ,लेकिन
उसने कोई जबाब नहीं दिया।

मेरी दिल की बेचैनी बढ़ती जा रही थी,

मैं रोज इस इंतजार में था कि कब वो आए जो बात हो सके,
इंतजार करते करते एक महीना बीत चुका था।

अब बर्दाश्त से बाहर हो चुका था,
अगले दिन मैं खुद ही उसके घर जाने का निश्चय किया।

उसके घर जाने के बावजूद वो मुझसे बात नहीं कर रही थी,
अंत में हारकर मैं उसके छोटी बहन से मिला और पूछा क्या बात है आपकी बहन उदास क्यों है।

तब उसने बताया कि वो किसी से छुप छुप कर मिलती और बात करती थी,।

मां ने पिताजी को बताया , और मां और पिताजी दोनों ने मिलकर कहा ,क्या कोई मुझसे बढ़ कर हो गया जो मुझसे बिना कहे तू उससे मिलती और बात करती है। या मेरे प्यार में कोई कमी रह गई?

जब तक मेरी बहन कुछ बोलती तब तक गुस्से में आकर मां ने कहा दिया अगर अब बात की या मिली तो मेरा मरा मुंह देखेगी।

उस दिन से वह ना वह उससे बात करती है, और ना ही मिलने जाती है ।
इतना सुन कर मैं वापस आ गया ।

रास्ते भर सोचता रहा कि ,क्या उसका फैसला सही था?

क्या उसके फैसले पर मुझे उसका साथ देना चाहिए?

किसान

उसके पूरे शरीर पर मिट्टी लगा था,

पर आंखों में इक अलग सी चमक थी,

चेहरे पर संतोष का भाव था।

पूछने पर पता चला -: दो बार फसल के डूबने पर ,

वह तीसरी बार धान लगा के आया है ।

हर बार की तरह इस बार भी पूरा विश्वास है कि फसल बच जाएगा

भूख

उसने दो दिनों से कुछ भी नहीं खाया था ।

अब कोई काम भी नहीं मिल रहा था ।

अब उसके पास एक रुपया भी नहीं था ,

बड़ा ही स्वाभिमानी था, कभी किसी से कुछ मांगता नहीं था ।

बिना कुछ काम किए वह किसी का कुछ भी नहीं लेता था।

उसमें ईमानदारी कूट कूट कर भरी थी।

आज तक किसी को कुछ भी कहने का मौका नहीं दिया था।

लेकिन आज जब वो दो दिन से भूखा है ,

कोई स्वाभिमान और ईमानदारी काम नहीं आ रही थी।

स्वाभिमान उसे मांगने से रोकती थी,

और ईमानदारी उसको किसी भी तरह के अनैतिक कार्य करने से रोक रही थी।

हर आने जाने वाले की ओर एक बार देखता और बिना कुछ बोले अपना सिर झुका लेता ,

जैसे कोई बड़ा गुनाह किया हो……

क्या इस तरह कोई उसकी मदद करेगा ?

या भूख से वो मर जाएगा ?

और स्वाभिमान की वजह किसी से कुछ बोलेगा नहीं

तो उसकी मदद करेगा कौन ?

या भूख से वो मर जाएगा ?.…………..

जिद

गुस्से में आकर उसने अपना घर छोड़ तो दिया ,लेकिन
ना तो उसको बोलने का सलीका था, और ना ही वह सीधा मुंह किसी से बात करता था।
सभी कहते थे मा बाप के लाड प्यार ने उसको बिगाड़ दिया था।
घर से बाहर वह अकेले पहली बार निकला था, उसके मन में गुस्सा भरा था ।
और वह बिना कुछ सोचे समझे चला जा रहा था।

उसके घर से निकलते वक्त उसके जेब में एक हजार रूपए मात्र थे।
रास्ते भर सोच रहा था मुंबई जाऊंगा ,मगर उसके पास पैसे बहुत कम थे,
इससे पहले वह अपने मां और पिताजी के साथ मुंबई और कोलकात्ता घूमने गया था , जिससे उसको इतना तो पता था कि मुंबई महगां शहर है, और कलकत्ता सस्ता शहर है।

इसलिए उसने कोलकात्ता जाने का निश्चय किया , और कोलकात्ता का टिकट लेकर ट्रेन में बैठ गया।
कोलकाता पहुंचने पर कुछ दिन इधर – उधर भटकता रहा। दिन और रात को किसी सस्ते से ढाबे पर जाकर खाना खाता और किसी मंदिर के पास या किसी रेलवे स्टेशन पर जाकर सो जाता। पैसे अब ख़तम होने वाले थे ,
और अब उसे अपने घर की याद आने लगी थी। मां और पिताजी की याद आने लगा था।
लेकिन जब जब घर की याद आती तब तब उसे अपने फैसले की याद आ जाती ,की वह क्या कहकर घर से निकला है ,की वह अपने पैर पर खड़ा होकर आएगा,
या तो नहीं आएगा ।

अपनी ही जाल में खुद उलझ चुका था,
कोई काम जानता नहीं था।
अब करे तो क्या करे?
उसने सोचा बिना काम किए तो अब जीना भी मुश्किल हो जाएगा।
इसलिए उसने कुछ भी काम करने की ठानी,
और निकल पड़ा काम की तलाश में,
हर तरह के दुकान में गया ,लेकिन बिना गारंटी के कोई भी काम देना नहीं चाहता था।
अब उसके जेब में मात्र 100 रुपए बचे थे जिसमे ना तो वह घर जा सकता था और ना ही दो दिन से ज्यादा खाना खा सकता था ,आज सुबह वह काम की तलाश में बिना खाए ही निकल गया , लेकिन काम नहीं मिला, दिन के 12 बजे तक उसने काम के तलाश में इधर – उधर हाथ पैर मारता रहा ,लेकिन कोई काम नहीं मिला ,अब उसने सोचा जब तक पैसा कमाना शुरू नहीं कर दूंगा , खाना नहीं खाऊंगा।
दोपहर में उसने पानी पी कर काम चलाया।
और फिर काम की तलाश में लग गया, एक जगह काम मिला भी लेकिन वह काम उसके वश का नहीं था,
बहुत ही भारी गट्ठर को उठा कर एक जगह से दूसरे जगह पर रखना था।
दूसरा दिन भी ऐसे ही गुजर गया था ,बिना खाए एक दिन गुजर गया ,सुबह हुई पानी पीकर फिर काम के तलाश में निकल गया,
आज तो किसी भी हाल में उसको काम ढूंढना था, क्योंकि काम से पैसा मिलेगा तब तो उससे खाना खाएगा, उसकी भूख से हाल बेहाल था ।
उसे बार बार अपने परिवार की याद आती की कैसे खाना में थोड़ा सा भी देरी नहीं होता था, और थोड़ा भी देरी होने पर सब उसको मनाने में लग जाते थे।
आज उसे पूरे एक दिन हो गए थे।
खाना खाए ,लेकिन कोई पूछने वाला नहीं था।
काम की तलाश करते करते वहबहुत दूर निकल चुका था ,
दोपहर हो चुकी थी ,अब भूख और प्यास और जोर से लगने लगी ।
वह छायादार जगह की तलाश करने लगा जहां उसको पानी के साथ आराम करने की जगह भी मिले ,ऐसा ही जगह उसको मिल भी गया वह आम और नींबू का बागान था , वहीं पास में चापाकल था, वहीं उसने पानी पिया और आराम करने लगा,
और भी आदमी वहां आराम कर रहे थे ,उस छायादार जगह में
आपस में बात चीत भी कर रहे थे
वहां नींबू भी बिक रहा था ,आम भी बिक रहा था
नींबू और आम वहां बहुत ही सस्ते में मिल रहे थे,तभी उसके मन में ख्याल आया कि क्यों न इसको बेचने का काम किया जाए ,
लेकिन उसके पास मात्र 100 रूपए ही थे ,दोनों के दाम पता करने पर नींबू बहुत सस्ता लगा ,शहर में 10 का 2 देता है
और यहां 10का 10 उसने सोचा नींबू ही खरीदा जाए , और शहर में बेचा जाए।
इतना सोचने के बाद वह नीबू वाले के पास गया और नींबू का दाम करने लगा पहले तो नींबू वाले को लगा ,
की 1या 2 खरीदेगा ,जब उसने कहा 100 लूंगा तो कहा ठीक है ,75 पैसे का 1 लगा दूंगा ।
इस पर वह मान गया,
और एक प्लास्टिक का बैग भी दे दिया और उसमे 100 नींबू भर दिया , भूख के कारण उसको चला भी नहीं जाता था ,लेकिन उसने मन में ठान लिया था जब तक पैसा कमाऊंगा नहीं खाऊंगा नहीं ।

उसके भूख ने उसको बेचना सीखा दिया ,नींबू बेचने में उसने अपनी पूरी ताकत झोंक दी।
पूरे दिन घूम घूम कर उसने 99नींबू बेच दिए
वहां लोग 10 में 2 देते थे और ये 10 में 3 देने लगा। रात तक उसने लगभग सारे नींबू को बेच दिया।
इस तरह उसने अपने जिन्दगी की पहली कमाई की ,जिसमें उसको फायदा भी हुआ 75 का 333 रात को उसने खाना खाया , और अगले दिन के लिए योजना तैयार करने लगा ,की कल उसको क्या करना है,
दूसरे दिन वह सवेरे वहां नींबू लेने पहुंच गया ।
आज वह 150 रूपए का नींबू का खरीदा 200 जिसमें 100 नींबू सुबह से दोपहर तक और बचे नींबू दोपहर को खाना खाने के बाद रात तक घूम – घूम कर बेच दिया। इस बार भी उसको फायदा हुआ फिर अगले दिन वह लग गया काम में
इस बार वह सुबह से ही नींबू बेचने लगा शाम तक उसने लगभग पूरे नींबू को बेच दिया आज भी उसको 4 गुना से जायदा का फायदा हुआ।
अब उसको थोड़ा – थोड़ा भरोसा अपने उपर होने लगा था। की वह अब कुछ कर सकता है।

अब उसने 10 दिन तक रोज जगह बदल बदल कर नींबू बेचा।
अब उसके पास कुछ पैसे जमा हो गए थे, और कुछ जान पहचान भी हो गई थी , जिसके वजह से उसको रहने के लिए खोली मिल गई।
इस तरह से रोज वह मेहनत करने लगा कुछ दिनों के बाद उसने एक ठेला ले लिया और अब उसने नींबू के साथ खेत से कुछ ताजी सब्जी भी रखने लगा ….…………..

मां

तेरी बातें तेरा प्यार मां मैं न भुला पाता हूं,
अकसर अकेले में छुप- छुप के रोता रहता हूं।
तू है तो जहां मेरे लिए बस खेला है
तू नहीं तो ये दुनियादारी झमेला है।
तेरे रहने से ना जाने कहां से आती है इतनी ताकत !
तेरे इक जाने के अहसास से खुद को अकेला पाता हूं।
तेरी बातें तेरा प्यार मां मैं न भुला पाता हूं।
अकसर अकेले में छुप -छुप के रोता रहता हूं।
मेरे इक जिद के लिए ,
अपने वर्षों के जमा पूंजी को एक पल में लुटाती हो ।
मां मैं कितना भी बड़ा क्यों न हो जाऊं ,तेरे लिए तो तेरा छोटा बच्चा हूं।
तेरी बातें तेरा प्यार मां मैं न भुला पाता हूं।
अकसर अकेले में छुप- छुप के रोता रहता हूं।

परछाई

ढलते सूरज को देखती है और वो फिर चलने लगती है ,उसके चाल में अजब खामोशी और तेजी है। अपने बच्चे को गोद में उठाए पसीने से लथपथ चली जा रही है।कभी अपने छोटे बच्चे को गोदी में संभालती और कभी अपने आंचल से पसीने को पोछती और फिर तेजी से चलने लगती ।
अचानक किसी ने पीछे से आवाज लगाई , मां उफ्फ! धीरे धीरे चलो न, मैं इतना तेज नहीं चल पा रहीं हूं।
मां ने उसकी बात को अनसुना किया और तेजी से आगे बढ़ने लगी ,उसके पीछे बच्ची जो सही से चल नहीं पा रही थी। मां की तेजी देख कर वह उसके पीछे दौड़ने लगी।

अंतरिक्ष के जीव

ये कहानी एक छोटे बच्चे की जिसका जन्म अंतरिक्ष की गहराइयों में हुआ ।

क्या आप जानना चाहेंगे उस अंतरिक्ष में जन्मे बच्चे के बारे में ?

जब धरती के सारे वैज्ञानिक अंतरिक्ष में घर बनाने के लिए होड़ लगा रहे थे।और कई देशों ने तो देखते- देखते अंतरिक्ष में, अपना अपना स्टेशन बना कर वहां रिसर्च भी शुरू कर दिया था।
उस में से कुछ वैज्ञानिक ऐसे भी थे जो ये प्रयोग कर रहे थे कि
बिना किसी आवरण के हम अंतरिक्ष में कैसे रह सकते है।
मगर हर बार उसे असफलता ही हाथ आई, और साथ ही इसमें कई आदमियों का बलिदान भी देना पड़ा।
हर बार के असफलता से परेशान होकर उस अभियान को चलाने वाली संस्थाओं ने पैसा देना बंद कर दिया । जब इसका पैसा आना बंद हो गया तब वैज्ञानिकों को अंतरिक्ष में रहकर ये प्रयोग करना कठिन हो गया ।

अभी तक धरती से गए जितने भी प्रयोग हेतु वस्तु थे, लगभग सभी का उपयोग किया जा चुका था ।
उसमें से कुछ पदार्थ बचे थे।
अब जब की वैज्ञानिकों को अंतरिक्ष छोड़ने में अब कुछ दिन ही शेष बचे थे। और सभी धरती पर जाने की तैयारी में लगे थे।लेकिन , एक वैज्ञानिक ऐसा भी था जो लगातार अपने काम में लगा था।और उसके हाथ कुछ ऐसी सफलता लगी, जिससे वह खुश हो गया। और अपनी योजना सब को बताने के लिए तैयारी करने लगा ।रवि नाम के उस वैज्ञानिक ने अपनी योजना बताने के लिए, उसने उस अंतरिक्ष के प्रयोगशाला में मौजूद सभी वैज्ञानिकों की आपात बैठक बुलाई और अपनी योजना को विस्तार पूर्वक बताया ।ये योजना कुछ इस प्रकार का था -: की हम सब मिलकर एक ऐसा ट्यूब बनाएंगे जिसमें बच्चा पल सके और इसका जन्म इसी अंतरिक्ष में हो ।
साथ ही इसके शरीर निर्माण में अंतरिक्ष के पदार्थ के साथ धरती के पदार्थ को मिलाकर किया जाए । सभी वैज्ञानिक उसकी बात ध्यान से सुन रहे थे ।
उसने आगे बताना शुरू किया कि एक वैज्ञानिक ने कहा कि,” हम वो अंतरिक्ष का पदार्थ कहां से लाएंगे?”
इस बात पर उस वैज्ञानिक ने जबाव दिया, मैंने कुछ पदार्थ यहां के वातावरण से तैयार किया है ।कुछ यहां के आस पास मिलने वाले पत्थरों से निकाला है।
इतने पर दूसरे वैज्ञानिक ने पूछा, “इतने काम इतने कम दिन में कैसे कर पाएंगे,और जब की ये काम अब बंद हो गया है तो इसको हम कैसे आगे बढ़ाएंगे और भविष्य में इसका मॉनिटर हम कैसे कर पाएंगे?”
इस बात पर उस वैज्ञानिक ने जबाव दिया, ये सारी बातें हम लोगों के मध्य ही रहेंगी ,और हम इसका भेद तब तक नहीं खोलेंगे।
जब तक ये योजना सफल नहीं हो जाती ।और इसका मॉनिटर हम धरती से गुपचुप तरीके से करेंगे।
और अब रही बात इसको सब के नजर से बचाने की तो हम इसको एक ऐसे जगह पर इंस्टाल करेंगे जो ये सब के नजर से बचा रहे और अपना काम भी होता रहे।
और हम इसको ऐसे सेट करेंगे की ये बाहर से खुल सके ऑटोमैटिक हो अगर हम लोग इसको कमांड नहीं भी दे तो भी ये अपना काम करता रहे और इसको हम कम से कम चार साल के लिए कमांड दे कर रखेंगे।
और जब जरूरत होगा तब इसको धरती से कमांड देंगे, और अन्य जानकारी उस योजना से सम्बन्धित सभी को समझाने लगा।
सभी कुछ समझने के बाद सब अपने अपने कार्य में लग गए ।
बहुत हद तक कार्य , रवि ने पहले ही कर दिया था ,जब सारा system तैयार हो गया । उसको उस अंतरिक्ष यान के एक ऐसे हिस्से में सेट किया गया कि वह किसी के नजर में ना आए ,और उसकी एनर्जी ,पॉवर संबंधित आवश्यकता भी पूरी होता रहे ।साथ ही जब जरूरत हो ,उसको बाहर लाने का,तब बाहर लाया जा सके। उसी मशीन के अंदर
उसके पालन पोषण का सारा व्यवस्था किया गया था,मशीन ऐसा सिस्टम इंस्टाल किया गया कि ,
उसके अंदर हो रही पल पल की गतिविधि का पता उसको चलता रहे।
अब आखिर जाने का दिन आ ही गया ,जाने से पहले एक बार सभी ने जाके अपना अपना सिस्टम चेक किया । सभी सिस्टम सही से कार्य कर रहे थे ,अब सभी धरती पर जाने के लिए सभी जाके अपने यान में बैठ गए और धरती की ओर रवाना हो गए ।

धरती पर लौटने के करीब एक साल के बाद
अचानक एक दिन उन सब के द्वारा जो सिस्टम सेट किया गया था उसमे हलचल तेज हो गई।
अचानक हुई इस हलचल से उस ग्रुप के सारे सदस्य सक्रिय हो गए।
अब इंतजार था उस system के सही से कार्य करते रहने का ,साथ उन सब को ये आश्चर्य हो रहा था कि हलचल तो है लेकिन,बच्चा अभी तक पूर्ण रूप से विकसित क्यों नहीं हुआ , ये इतना समय क्यों लगा रहा है । ये सोचने के अलावा और कर भी क्या सकते थे , इंतजार के अलावा कुछ कर भी नहीं सकते थे ।
क्योंकि,ये सारी गतिविधि गुप्त रूप से चल रही थी ,तो सावधानी रखना जरूरी था।
उस मशीन में हलचल लगातार हो रही थी मगर कुछ ज्यादा कहा नहीं जा सकता था ।
करीब दस महीने के बाद सबको ऐसा लगा, जैसे सिस्टम में बच्चा अब परिपक्व हो चुका है ,और सिस्टम से मैसेज आ रही बेबी ट्यूब ने आखिर उस बच्चे को जन्म दे ही दिया
और अब था टाइम बच्चे को खुले अंतरिक्ष में बिना किसी आवरण के निकालना ।
आखिर उस इंतजार का घड़ी खत्म हुआ और उस ऑटोमैटिक मशीन ने उसको बाहर निकाला कुछ सेकंड के लिए और फिर उसको अंदर ले लिया ।
अब तक बच्चा सही सलामत था ,
अब देखना था दूसरा चरण ।
दूसरे सप्ताह में बच्चे को मशीन ने फिर निकाला इस बार दो मिनट के लिए सबको अंदेशा था इस बार बच्चे को नुकसान होना ही है।
मगर ,दो मिनट के बाद बच्चे को मशीन फिर अंदर ले लिया ।
अब उस मिशन के सारे मेंबर को आखिर प्रयोग के उपर नजर था ।
इस बार का प्रयोग एक महीने के बाद होना था ।सारे सदस्य बेसब्री से इंतजार कर रहे थे।
की अचानक इस मिशन के सारे मेंबर एक्टिव है ये खबर खुफिया विभाग को पता चल गई ।
अब ये पता करना था कि ये सारे सदस्य आखिर इतने एक्टिव क्यों हो गए।
अब खुफिया विभाग के सारे सदस्य एक्टिव हो गए उनके फोन से लेकर मोबाइल कंप्यूटर उसके हर एक्शन पर नजर रखने लगे ।
इनको पता करने में ज्यादा समय नहीं लगा ।की ये सब किसी ऐसे मिशन पर काम कर रहे है ।जो समाप्त हो चुका है । और ये इसको गुपचुप तरीके से सब के नजर से बचा के कर रहे है।
ओर इन सबको दो चरण की सफलता भी मिल चुकी है ।
खुफिया विभाग के चीफ ने मिशन को जानने के बाद उसने उसका तीसरा चरण पूरा होने देने का आदेश दे दिया ,और उसके बाद ही
इसके बारे में सदस्यों से पूछताछ की कारवाही को आगे बढ़ाएंगे।
अब तीसरे चरण को पूरा होने में दो दिन ही बांकी था कि इस मिशन के बारे में कुछ न्यूज वहां के अपराधियों तक भी पहुंच गए।
और उस मिशन के एक सदस्य को छोड़ कर सारे सदस्य को अगवा कर लिया गया।
अब एक दिन मात्र शेष बचा था।
इस बार मशीन को पूरे 1/2 घंटे तक बच्चे को बाहर रखना था ।
मशीन ने सारे कार्य पूरे किए और बच्चे को बाहर निकाला और मशीन उसका लगातार मॉनिटर कर रहा था। समय धीरे धीरे गुजरता गया ।
ये 1/2घंटे भी सफलता पूर्वक पूरे हो गए । अब अंतिम जो था वो पूरे एक साल के बाद होने वाले प्रयोग थे।
तब तक ये सारे मिशन लिक हो गए । और सभी सदस्य तो पहले से ही अगवा कर लिए गए थे।
बस एक ही सदस्य बचा था । और उसके बारे में पता करना था।
उस मिशन के सारे डॉक्यूमेंट उसी के पास था , और वही एक था, जो सब के पकड़ से बाहर था । ना उसको खुफिया विभाग पकड़ पा रही थी,ना ही अपराधियों के हाथ आ रहा था।
ये खबर अब लगभग हर देश के खुफिया विभाग में पहुंच चुका था।
और ये न्यूज़ अब ट्रेंड में थी ।
सारे जहां के आतंकवादी इस न्यूज़ के आते ही एक्टिव हो गए।
पूरे विश्व में ये खबर फैल गई,की अब हम अंतरिक्ष में बिना किसी आवरण के रह सकते है।
इसका सारा प्रयोग सफल रहा,
पूरे विश्व में बस यही न्यूज़ चल रही थी ,और सब न्यूज़ को बढ़ाचढ़ा कर दिखा रहे थे।
इधर सभी उस आदमी को खोज रहे थे ,जिसके पास वो सारा डॉक्यूमेंट था इस प्रयोग से संबंधित।

वो कौन थी

Vo kaun thi

aaj hm aap logo ko hindi khani online ki ek nyi duniya me le chlte hai jo ki aapko 1 nya anubhav dega ! aapko nye romanch safar pr le chalte hai
रात के अंधेरे में हम जा रहे थे

रात के करीब 11बजे थे।
उल्लू की आवाज सन्नाटे को भंग कर रही थी।
मक्खियां जो दिन भर इधर उधर करती  है उनका कहीं नामो निशान नहीं था ।

दिन में जो रौशनी हर तरफ फैली रहती है रात में वो भी चैन  की नींद में खो जाती है जैसे की रौशनी का कोई वजूद ही नहीं हो।


दूर दूर तक कोई इंसान नजर नहीं आ रहा था
पूरा रास्ता सुनसान था ।
और हम चले जा रहे थे मस्ती में
अंधेरे को चीरते हुए। अंधेरा ऐसा की अंधेरे में अपना हाथ तक नजर नहीं आता था ।
कि अचानक लगा कि मेरे सामने से कोई तेजी से निकल गया  हो और मैं  सन्न सा अंधेरे  में देखने कि कोशिश करने लगा ।बार बार मन में ख्याल आने लगे   कि कोई तो आगे से निकला है और अचानक उल्लू के भयानक आवाज से मैं घबरा गया । घबराने के बावजूद मैंने चलना नहीं छोड़ा , मैं किसी तरह उस जंगल को जल्दी जल्द छोड़ना चाहता था लेकिन जंगल था कि खत्म होने का नाम नहीं ले रहा था।
में अंदर से डरता एवम्  सोचता हुआ आगे बढ़ ही रहा था कि

ऐसा लगा कि किसी ने मेरा पैर पीछे से पकड़ लिया हो!!

अचानक हुए इस हमले से मैं बहुत डर गया ।

मेरा पूरा शरीर पसीने से लथपथ हो गया मेरा शरीर  डर से कांपने लगा और अब लगने लगा कि मैं गिर कर बेहोश हो जाऊंगा की अचानक किसी ने कान में कहा जरा नीचे तो देखो उसकी आवाज में जादू था ।उसके आवाज के जादू ने मुझे नीचे की ओर देखने पर मजबुर कर दिया तो मेरी नजर अचानक नीचे गई और मैं आश्चर्य से भर गया।

मेरा पांव कोई पकड़े नहीं था बल्कि मेरे पांव में कोई प्लास्टिक लिपटा है ।
जो मुझे आगे जाने से रोक रहा था अब जाके मेरे जान में जान आई ।
और मैं तेजी से उस रास्ते को पार करने लगा जब मैंने रास्ते को पार कर लिया तब जाके मुझे याद आया कि किसी ने मेरे कान में कुछ ? अचानक मेरा ध्यान उस बात की तरफ गया।
तो फिर एक बार डर और आश्चर्य से मैं सोचने लगा आखिर कौन थी ? उसके बातों का जादू उफ्फ मुझे सोचने पर मजबुर कर दिया और सोचते सोचते मुझे अपने आप पर ग्लानि   होने लगी ।

मैं अपने आपको कोस रहा था कि मैं कितना डर गया था ।

मैंने फिर उस जगह पर जाने का निर्णय किया।जहां उसकी आवाज मेरे कानो में गूंजी थी। लेकिन मन था कि जंगल के उस अंधेरे को बार बार याद कर रहा था।

इस बार मैं हिम्मत करके अपने साथ हुए घटना को याद करने लगा ।
   मन ही मन में अपने आप पर हंसने लगा ।
तो क्या मैं उस रास्ते पर फिर चल कर देखूं ,
मन ने अंदर से आवाज दिया

या अभी इतनी रात में वहां जाना खतरनाक होगा ? तो वो वहां रात के घने अंधेरे में क्या कर रही है।
और मैं बिना जाने वहां से कैसे चला आया
ये सब सोचता हुआ मैं अपने पैर को रोक नहीं पा रहा था जैसे कोई अज्ञात शक्ति मुझको अपने ओर खींच रही हो  और  एकबार
फिर से  मैं  उसी रास्ते पर था!!!!!!!

वो कौन थी ?क्या मैं उसके बारे में जान पाया ?क्या मैं उससे मिल पाया ? आखिर उसने मेरी मदद क्यों की? ये सब जानने के लिए पढ़े वो कौन थी पार्ट 2

अगर आपको कहानी अच्छी लगती है तो please comment

कहानी

गद्दार कौन

Two monkey

एक जंगल में दो बंदर दोस्त रहते थे दोनों की दोस्ती पूरे जंगल में मशहूर था दोनों एक साथ खाते थे एकसाथ बाजार जाते थे। अचानक ऐसा क्या हुआ कि दोनों एक दूसरे के खून के प्यासे हो गए ?

बात कुछ दिन पहले की है दोनों दोस्त जंगल की पहाड़ी की ओर केले की तलाश में गए रास्ते में उसे एक बेहोश सियार मिला जो कि खून से लथपथ था।दोनों ने देखकर सोचा अगर इसे ऐसे ही छोड़ देंगे तो यह मर जाएगा! क्यों नहीं हम इसको अपने घर ले चले इस पर दोनों दोस्त मान गए और सियार को उठाकर अपने घर ले गए।

वहां सियार का डॉक्टर से इलाज करवाया और खूब सेवा की ,कुछ दिनों के बाद सियार पहले की तरह हो गया। अब सियार भी दोस्तों में शामिल हो गया और तीनों खूब मस्ती करते एक साथ रहते ।कुछ दिन तक तो ठीक था लेकिन सियार को दोनों की दोस्ती खटकती रहती थी। आखिरकार सियार ने दोनों दोस्तों को अलग करने का फैसला कर लिया।अब क्या था सियार के शैतानी दिमाग में विचार आने लगे कि कैसे उसको अलग किया जाए? एक दिन सियार जंगल में इधर उधर तक टहल रहा था कि उसकी नजर एक चीज पर पड़ी और उसके दिमाग में अलग करने का आइडिया आगया।

आखिर सियार ने क्या देखा? और सियार ने क्या योजना बनाई ?

Dost Monkey

जंगल में टहलने के दौरान सियार की नजर जंगल में कुछ केले के पेड़ पर पड़ी जिसमें पके केले लगे थे। जो कि बन्दर के नजर में नहीं आया था। अब क्या था सियार ने अगले दिन सवेरे उठकर केले लेकर उसको दो अलग जगहों पर छिपा दिया और कुछ केले के छिलके इधर उधर बिखरा दिये दोनों जगह और अब ये देखने लगा कि कब दोनों दोस्त अलग अलग मिलते है, कुछ समय बीतने के बाद एक बन्दर बाजार से कुछ सामान लेने के लिए निकलता है तो वह अपने दोस्त को भी चलने के लिए कहता है पर दूसरा बन्दर दोस्त कहता है कि उसे कुछ जरूरी काम है तुम जाओ। इस पर पहला बन्दर दोस्त बाजार चला जाता है । अब क्या था सियार को मौका मिल गया और दूसरे बन्दर को अपने बन्दर दोस्त के प्रति कान भरने लगा मगर बन्दर उसको बार बार डांट देता था मगर जब उसने कहा कि उसके पास सबूत है कि आपका दोस्त आपसे छुपकर केले खाता है और छिपाकर कर रखता है इस बात पर वह क्रोधित हो जाता है और गुस्से में आकर कहता है अगर तुम सही हो तो दिखाओ तो सियार उसको लेकर जाता है वहां जंहा उसने केले छिपाकर रखे होते है, केले को देखकर बन्दर आगबबूला हो जाता है और गुस्से से अपने दोस्त का इंतजार करने लगता है। इधर मौका पाकर सियार दौड़कर बाजार पंहुच जाता है और पहले वाले बन्दर का कान भरने लगता है लेकिन ये भी सियार को खूब डांटता है मगर जब उसको सियार ये कहता है कि उसके पास सबूत है तब जाकर सियार से सबूत दिखाने के लिए कहता है तो सियार उसको लेकर दूसरे जगह जाता है जहां उसने केले छिपाकर रखे थे केले को देखकर बन्दर आगबबूला हो जाता है । और गुस्सा से बिना कुछ सोचे समझे दौड़ पड़ता है घर की ओर । घर पंहुचते ही दोस्त को गद्दार कहता हुआ झगड़ने लगता है दूसरा दोस्त तो पहले से ही गुस्सा था दोनों में खूब हाथापाई होती है और अंत में दोनों दोस्त एक दूसरे को गद्दार कहता हुआ अलग हो जाता है । दूर एक पेड़ की ओट से सियार ये सब देखकर खुश होता है आख़िरकार उसकी योजना काम कर जाती है।

(१):इससे हमको ये सीखने को मिलता है कि बिना सोचे समझे कोई काम नहीं करना चाहिए।

(२) और आंख बन्द कर किसी पर भरोसा नहीं करना चाहिए ये देखना चाहिए कि

(३):जिसके बारे में बात हो रही है हम उसको कितना जानते है और किसी के प्रति कोई कदम उठाने से पहले उसको समझ लेते है।