Category Archives: मोटिवेशनल बातें

मोटिवेट करने वाली बातें

अभ्यास एक वरदान

अभ्यास मानव को एक वरदान के रूप में मिला है,

ये आप पर है की आप इसको किस रूप में लेते हो।

इसको हम ऐसे समझ सकते है,

किसी भी बात को बार बार

कहना , दोहराना ,करना, उदाहरण के रूप में -:

एक छोटी सी मजाक को अगर बार बार किसी को

कहा जाय तो वह मजाक बड़ी झगड़े की वजह बनती

है। इस से ये पता चलता है,

इसका उपयोग अगर सावधानी से नहीं किया गया तो

ये आपकी जिंदगी में उथल – पुथल मचा सकता है।

ये बात हम सब जानते है ,

मंत्र भी सिद्घ तब जाके होता है जब उसको बार बार दोहराया जाय ,

ये आदिकाल से मानव एवम् अन्य जीव जगत के लिए

बहुत ही आश्चर्य जनक और किसी भी वस्तु को प्राप्त

करने का मार्ग रहा है,

आज दुनिया का विकास इसी का देन है,

और दुनिया के नाश का कारण भी यही रहा है ।

इसको हम कैसे अपनाते है ये हम पर निर्भर है। हम

किस तरह का अभ्यास करते है, उत्थान के लिए या

पतन के लिए,

ये हम अपने आसपास और अपने आप में भी देख

सकते है।किसी भी कार्य को बार – बार करने से हम

उसमें कुशलता प्राप्त कर लेते है।

इसे हम आजमा भी सकते है

जिन्दगी

जिन्दगी के इस इम्तहान में कौन जीतेगा कौन हारेगा?
पर मजा तो उसे ही आएगा जो किनारे पे बैठ के देखेगा।

रोक लो खुद को कुछ भी कहने से पहले,
आज उसकी तो कल तेरी भी आनी है।

जिन्दगी में सब्र का क्या मोल है,

ये तो उसी को पता है ,जिसने सब्र कर रखा है।

जिन्दगी सबक सिखाने में ,समय का साथ देती है,
अरे ! तू नहीं समझा तेरा इम्तहान लेती है।

जिन्दगी की सच्चाई को उसी ने जाना है,
जिसने अपने आप पे काबू कर पाया है।

वक्त हर समय चलता ही रहता है,

बचपन को लेकर चलते हैं, और

बुढ़ापा आ ही जाता है।

कभी कभी ऐसा लगता है ,वक्त ठहर सा गया है,
लेकिन ये वक्त नहीं ,अपनी सोच है ,यारों।

तू लाख दुहाई दे वक्त को ,
ये वक्त है ये बदलेगा , जरूर।

जिन्दगी उसी की है जिसने ये जाना है ,

कल पर छोड़ना नहीं अपने आज को।

और अंत में

कुछ अच्छे कार्य करने के लिए,

समय मत देखो, यारों,नहीं तो,

तू सोचता ही रह गया और तेरा समय आ गया ……..

बातें

अगर आपकी जिंदगी नरक है,
तो आपके सोच में और कर्म में फर्क है।

अगर आप चाहते हैं कुछ बड़ा करना,

तो अपने सीमाओं के पार तक सोचो।

छोटी बातें

१)यादें कितनी महत्वपूर्ण है ,
ये मायने नहीं रखता।
बल्कि ये ज्यादा महत्वपूर्ण है कि आपके उन यादों में आपको क्या याद हैं ?
अच्छी बातें या बुरी बातें
अक्सर हमने देखा है याद वही रहता है जो या तो बहुत बुरी होती है ,
या बहुत अच्छी होती है।
किसी के अच्छे व्यवहार से ज्यादा, हम उसके बुरे व्यवहार को याद रखते है।
किसी ने आपके साथ लाखों बार अच्छे बर्ताव किए हो ,अगर वही इंसान ने एक बार आपके साथ बुरा बर्ताव किया तो हम उसके सारे अच्छे व्यवहार को भूल कर ,उसके बुरे बर्ताव को याद रखते है।
हमेशा हमारा मन बुरे को ही नहीं याद रखता , वह अच्छे को भी याद रखता है ;लेकिन वही बात याद रहता है जो बहुत ही कठिन परिस्थिति में जब कोई आपका साथ देता है ।इस अवस्था में मन उस परिस्थिति को याद रखता है।
२) अक्सर हमने देखा है परिवार के कलह का मुख्य वजह उसका अपनापन होता है ।
अपनेपन में हम कुछ अगर किसी कहते है ,तो सामने वाला भी उसी अपनेपन से सुनता है और हम कुछ ज्यादा ही अपनेपन की उम्मीद कर बैठते है , लेकिन ये नहीं सोचते कि अभी उसकी परिस्थिति क्या है।अभी अंदर से कैसा महसूस कर रहा है।

उसके बाद आपने कुछ भी गलत बोला तो आपकी बातें उसे बहुत ही खराब लगती है अगर यही बातें उसे किसी और ने कही होती तो उसको वह माफ़ कर देता मगर आपको माफ़ नहीं करेगा ।क्योंकि अब बात उसके आत्मसम्मान की आ जाती है,और यही बातें जब कोई दूसरा व्यक्ति कहता है तो वह उसको उतना तब्बजो नहीं देता , माफ़ भी जल्दी ही कर देता है और भूल भी जाता है क्योंकि वो अपना नहीं पराया है।तो अब बात आती है कि ऐसे में हम क्या करें ?
दिल बड़ा करे जब आप उसी बात के लिए दूसरों को माफ़ कर सकते है ; तो अपनो को क्यों नहीं!

इंसान

तू इंसा है, तू ही इंसा है
तू हिम्मत है,

तू ही जज्बा है,
तू तुफां है ,

तू ही शांति है।
तू इंसा है ,तू ही इंसा है ।

तू आदि है ,

तू ही अनंत है।

तू क्रोधी है ,

तू ही संत है।

तू इंसा है ,तू ही इंसा है।

तुझ से ये सारा जहां ,

तेरे बिना कुछ नहीं यहां।

तू बर्बादी है,

तू ही आबादी है।

तू इंसा है ,तू ही इंसा है।

अच्छी आदतें

आदतें इंसान को बेहतरीन बना देती है ,
आदतें जो बनते अच्छे ,

आपको अच्छा बना देती है ।

चाहे हर कोई पाना मंजिल को ,

दोस्तों,
चाहे हर कोई पाना मंजिल कोपर मंजिल मिलता उसी को ,

जो आदतें अच्छी बना लेते हैं ,

जो आदतें अच्छी बना लेते हैं ।

आदतें इंसान को बेहतरीन बना देती है।

जिन्दगी में चाहे हर कोई आजादी,दोस्तों,

जिन्दगी में चाहे हर कोई आजादी पर आजादी भी उसी ने पाया ,

अपनी गंदी आदतों से जो,दूरी बना लेते हैं।

आदतें इंसान को बेहतरीन बना देती है ।

बदलते अक्सर रातों को करवटें ,

दोस्तों,

बदलते अक्सर रातों को करवटें,

आदतें जो अपनी गंदी बना लेते हैं ।

आदतें इंसान को बेहतरीन बना देती हैं।

अक्सर उनको बिस्तर पर जाते ही नींद आ जाती है,

दोस्तों,

अक्सर उनको बिस्तर पर जाते ही नींद आ जाती हैजो अपनी आदतों को मेहनती बना लेते हैं ,

जो अपनी आदतों को मेहनती बना लेते।

आदतें इंसान को बेहतरीन बना देती है ।

अक्सर शरीरें जबाव देने लगती वक्त से पहले,

दोस्तों,

अक्सर शरीरें जबाव देने लगती वक्त से पहले,

आदतें जिनको अंधा बना देती हैं,

आदतें जिनको अंधा बना देती हैं।

आदतें इंसान को बेहतरीन बना देती है।दोस्तों,

गंदी आदतें हमें शुरू में मजा ,

अंत में सब दिन के लिए रोगी बना देती है।

अच्छी आदतें शुरू में मेहनती ,

अंत में सब दिन के लिए सुखी बना देती है।

और अंत में दोस्तों,

अच्छी आदतें हमें अपनाना है या ना अपनाना है खुद पर निर्भर है ,

वरना

जिन्दगी तो हर हाल में कटा
करती है,

जिन्दगी तो हर हाल में कटा
करती है।

कर्मरथ

वक्त पर मत छोड़ बंदे,
अपने भविष्य को ।
तू कर्म कर ,ना तू शर्म कर,
तू देख बस लोकहित,
मन में सेवाभाव हो।

वक्त पर मत छोड़ बंदे,
अपने भविष्य को ।

तू शब्दभेदी तीर बन,
तू कर्म कर तू धिर बन।
तू बहते अश्क पोंछ डाल,
तू सत्कर्म रूपी बीज डाल,
तू आस्तिक बन, तू नास्तिक बन।

वक्त पर मत छोड़ बंदे,
अपने भविष्य को ।

तेरे कर्म से तेरा भविष्य है,
तू कर्म पथ पर चलता रह।
तेरे नाम से जग को प्रकाश मिले,
तेरे कर्म से नया आयाम मिले।

वक्त पर मत छोड़ बंदे,
अपने भविष्य को ।

तेरे द्वारा होना है, इस युग का भला।
तू चाहे तो बदल सकता है,

अपने जीवन की दशा।
वक्त के अंदर छिपा है ,

भविष्य तेरा,
तू मत देख बंदे कैसा है,
भविष्य तेरा।
तू निर्माता बन अपने भविष्य का,
तू कर्मवीर ,

तू रणवीर ,

तू धैर्यवान बन,
तू निर्माण कर स्वर्णिम युग का।

वक्त पर मत छोड़ बंदे,
अपने भविष्य को ।

लोगों की बातों पर ना ध्यान दे,

बस अपने कर्मो को ही मान दे,

सत्य से बस रख वास्ता।

वक्त पर मत छोड़ बंदे,
अपने भविष्य को।

तेरे कर्म से तेरा भविष्य है,
तू कर्म पथ पर चलता रह।
तेरे नाम से जग को प्रकाश मिले,
तेरे कर्म से नया आयाम मिले।

वक्त पर मत छोड़ बंदे,
अपने भविष्य को ।

तेरे द्वारा होना है,

इस युग का भला।
तू चाहे तो बदल सकता है,

अपने जीवन की दशा।
तू निर्माण कर स्वर्णिम युग का,
तेरे कर्म पे तेरा भविष्य टिका।

कर्म रथ पर हो सवार ,

तू जीत ले संसार को।

कुछ ऐसा करके जा बंदे,

वक्त को तू नहीं,

वक्त तेरा इंतजार करे।

वक्त पर मत छोड़ बंदे,
अपने भविष्य को ।

अपनापन

।कोई बांझ तो कोई कुलटा और कोई अभागी कहकर बुलाती थी।कोई कहती सुबह सुबह किसका मुंह देख लिया,आज तो पूरा दिन ही खराब जाएगा।
घर से निकलना मुश्किल कर दिया था,किसी भी वजह से घर से बाहर जाना होता तो सबसे बचके निकलती ,फिर भी कोई ना कोई टकरा ही जाती और उसको ताना सुनना पड़ता इसलिए वह घर से ना ही निकलती थी।
अचानक क्या हुआ ऐसा की समाज के रंग बदल गए?

शादी के करीब दस सालों के बाद उसके घर में किलकारी गूंजी
उसके घर एक सुंदर बच्चे का जन्म हुआ, आखिरकार भगवान ने उसकी और उसके परिवार की सुन ली।
बच्चे के जन्म से पूरा परिवार खुश था।
मां तो अपने बच्चे को देख -देख कर निहाल हो रही थी ।
बीच बीच में उसे अपना बिता हुआ कल भी याद आ जाता था
इक पल में अभी मिली खुशी के आंसू और दूसरे पल में पीछे हुए दुखों के याद में आंसू,
ये आंसू थे कि रुकने का नाम नहीं ले रहे थे, पूरा परिवार उसको चुप कराने में लगा था। कभी कभी पूरा परिवार उसके साथ रोने लगता था ।अपने पूरे परिवार को रोता देख उसने अपने आप को किसी तरह चुप किया । और अपने परिवार के बारे में सोचने लगी ।आज अगर उसका परिवार उसके साथ नहीं होता तो वह मर गई रहती समाज के तानों से उसने कई बार अपने आप को मारने की कोशिश की
उसके परिवार ने उसको बार बार समझा कर उसको अपनेपन का अहसास कराया और उसको हिम्मत दिया। और इसलिए आज सभी लोग उसे बधाई दे रहे थे। जो कल तक ताना मारते थे ,वो भी आज घर आकर बधाईयां दे गए

प्रेरणा :-१) धैर्य हर परिस्थिति में रखना जरूरी है।

२) समाज का क्या है अगर आप कुछ करते हो तो भी बोलेंगे,
और कुछ नहीं करोगे तब भी बोलेंगे। समाज को तो बस समझने की देरी है ।अगर आप गलत करते हो तो भी बोलेंगे ,अगर आप सही करते हो तो भी बोलेंगे ,अगर आप कुछ अचीव करोगे तो सेलिब्रेट करने भी आएंगे।नहीं बुलाओगे तो भी बोलेंगे ,बुलाओगे तो भी बोलेंगे।

३) परिस्थिति कैसा भी हो परिवार अगर साथ दे तो किसी भी मुसीबत से पार पाया जा सकता है।

सत्य की खोज

सत्य क्या है क्या सत्य ही ईश्वर है ? अगर सत्य ही ईश्वर है तो वो कौन सा सत्य है जिसको हम ईश्वर के रूप में मानते है ?

https://ajabgajabjeevphotography.photo.blog/wp-content/uploads/2020/04/img_20200411_1353074518516399228902200.jpg
सत्य छिपा है

नमस्कार दोस्तों

दोस्तों आज का जमाना जो कि पूर्णतः भ्रष्ट हो चुका है और इसको भ्रष्ट करने में हम सब की अहम भूमिका है ।इस तरह से एक बात और सामने आती है कि जो व्यक्ति जैसा है समाज में उसके आसपास वैसा ही व्यक्ति उसको मिलता है और जैसा सोचता है वह वैसा ही पाता है।

इसलिए अभी भी दुनिया में सत्य नाम की कोई चीज है ।जिस के बारे में लोग कहते है कि ये धरा सत्य पर टिकी है ।तो वो कौन सा सत्य है?
आज हम बात करेंगे सत्य के बारे और हम जानेंगे की सत्य क्या है ? सत्य के मायने क्या है ? क्या हम जिस सत्य को जानते हैं वही सत्य हमें ईश्वर के रूप में मिलता है ? वह कौन सा सत्य है ? क्या उसी सत्य को पा के परमात्मा को पाया जा सकता है?
क्या सत्य का भी कसौटी होता है ?
इन सब बातों पर ध्यान देने पर पता चलता है । सत्य की सत्यता क्या है ? सत्य को हम क्या मानते है ? सत्य मेरे लिए क्या है ।
और अब इस सब से आगे सत्य की परिकल्पना का आधार क्या है?
सत्य हम किसे मानते है ? क्या हम इसको सत्य मानते है किसी ने किसी के साथ ईमानदारी दिखाई ये पूरी जिंदगी में कोई असत्य कर्म नहीं किया ।या पूरी जिन्दगी जो वैष्णव रहा और किसी तरह के मांस आदि का सेवन नहीं किया। हम इसको ही सत्य मानते हैं ?अगर हां है तो इस तरह का
सत्य हर युग में बदलता है ।
सत्य हर परिस्थिति में बदलता है।
सत्य को हर आदमी अपने हिसाब से देखता है।
किसी ने कोई कर्म किया तो उसके लिए वो सत्य है और वही दूसरों के लिए गलत है ।
मानव सभ्यता के आरंभ में मनुष्य का खान पान कुछ और था तब वो शिकार करते थे और वही खाते थे ।जैसे जैसे मानव सभ्यता का विकास हुआ मानवों ने अन्न उपजाना शुरू किया और अन्न को खाने लगे ।समय के साथ खान पान बदला ।
रहन- सहन पहले लोग बिना कपड़ों के रहते थे जैसे जैसे मानव का सोच विकसित होता गया और सब कपड़ा पहनने लगे ।
उपर के दो बातों से ये बात निकल के सामने आती है कि जो बात एक समय सत्य थी वहीं बात दूसरे समय असत्य हो गई।

किसी आदमी या किसी जीव की हत्या करना असत्य है ।अगर वही अपनी रक्षा के लिए या अपने समाज अपने देश के लिए हम हत्या करते है तो वह सत्य है और हम इसको सत्य से तुलना करते है और वो अच्छी बात है ।तो सत्य का क्या हुआ ।किसी को दण्ड देना असत्य है ।मगर किसी को सुधारने के लिए दण्ड देना सत्य है। इसलिए उपर के सत्य को हम कसौटी पर परख सकते है और हर युग में ये सत्य बदलेगा और सत्य को उसी युग के हिसाब से परखा जाएगा ।तो हम सत्य किसे माने एक वो सत्य जो वक्त के साथ बदलता है या एक वो सत्य जो वक्त और समाज से परे है उसे ।
आदि समय से हमारे समाज के संत ,ऋषि मुनियों ने जिस सत्य को पाया वो क्या था ?
महात्मा बुद्ध ने जिसको पाया वो क्या था? वो कौन सा सत्य है जो सबसे छुपा है, और उसको पाने के लिए महात्मा बुद्ध को इतनी तपस्या करनी पड़ी ।इसी तरह कईयों ने पाया है। संत कबीर ने जिस सत्य के बारे में बताया वो क्या है ? विभिन्न तरह संप्रदाय ने सत्य को अपने हिसाब से परिभाषित किया है ।मगर आपने कौन से सत्य को देखा है माना है तो क्या इस सत्य को हम ईश्वर मान सकते है जो कि हर युग के साथ बदलता है तो क्या सत्य की ये परिभाषा उचित प्रतीत होती है?
तो सत्य की परिभाषा क्या है ?
जहां तक मैंने जाना है ईश्वर सत्य असत्य से ऊपर है । सत्य -असत्य इंसान ने अपनी जरूरत को पूरा करने के लिए बनाया है ।शुरू से ही मानव समूह में रहता आया है और इसी समूह से उसने समाज का निर्माण किया ।समाज को अनुशासित रखने के लिए और उसके उचित विकास के लिए उसने बहुत से नियमो को बनाया ।कुछ नियम वक्त के साथ अपने आप बनते गए ।जिसमें कुछ नियम बाध्यकारी थे जिसका पालन करना जरूरी था और कुछ नियम अबाध्यकारी थे।
ये सारे नियम कानून वह अपने समाज को सुरक्षित रखने के लिए और समाज को अनुशासित रखने के लिए ,उसके समाज के द्वारा बनाए गए नियम मात्र है। इसके अलावा बहुत सारे नियम जो वक्त के साथ बनते बिगड़ते गए जो हमारे अंदर घर कर गए ।वक्त के साथ साथ वही नियम हमारे लिए सत्य और असत्य के पर्याय बन गए और हम असली सत्य को भूलते गए । जिसको हम सत्य मानते है । ये सारे सत्य से ईश्वर की तुलना करना उचित नहीं लगता है।तो उचित सत्य क्या है ? क्या आप ने सत्य का अनुभव किया है ?क्या आप हमसे शेयर करेंगे? की सत्य क्या है सत्य के बारे में आपका अनुभव कैसा रहा है अभी तक और आपने अभी तक किसको सत्य माना है?
आपके अनुसार क्या सत्य ही ईश्वर है तो वह कौन सा सत्य है?सत्य की परिभाषा क्या है?
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धन्यवाद

अपना time आएगा

नमस्कार दोस्तोंअक्सर मैंने अपने आस पास अपने दोस्तों से ये कहते सुना है अपना टाइम आएगा ! ये अपना टाइम कब आएगा मेरे भाई!
जब हम बच्चे थे हमारी अलग ख्वाहिशें थी । छोटी -छोटी मगर बहुत सारी थी बहुत सारे पूरे हुए और बहुतों को भूल गया ।
जब थोड़ा और बड़े हुए मेरे देखने का नजरिया थोड़ा बदला और सपने भी बदले कुछ अपने थे कुछ लादे गए थे कुछ परिवार के द्वारा और कुछ समाज के द्वारा कुछ कहानियों और कुछ फिल्मों के द्वारा उसमे में भी कुछ पूरे हुए कुछ नहीं पूरे हुए और कुछ भूल गए ।
जब हम कुछ और बड़े हुए तो हमारे सपने बड़े हुए और इसके साथ ही हमारी सोच बड़ी हुई तब हम जवान थे और पूरी दुनिया को बदलने चले थे । अपनी ख्वाहिशों के तो कहने क्या मैं ये कर दूंगा मैं वो कर दूंगा ।
मैं ये खरीदूंगा मैं वो खरीदूंगा।
मैं यहां जाऊंगा मैं वहां जाऊंगा।
मैं ये काम करूंगा और मैं वो व्यापार करूंगा ।उफ्फ अपनी समझ से ज्यादा सोचना और करने के वक्त बिना किसी योजना के काम करना । फेल हो जाने पर अपने आपको कोसना और दूसरे काम में लग जाना
रात दिन केवल सपने सजाना और उन्हें पूरा नहीं करना ।ये बातें अक्सर आम आदमियों के जिंदगी में आती है । और जब वक्त बीत जाता है तब हम सभी को कोसते रहते है इसने मेरे लिए कुछ नहीं किया मेरे पिता ,माता परिवार,समाज ,देश ने मेरे लिए कुछ नहीं किया ।और हम दूसरे को देख देख कर जलते रहते है और उसके सपने पूरे होते देख अपने आपको किस्मत का दोष या पैसा का अभाव आदि का रोना रोतें रहतें है और उम्र भर हम अपने सपने को लेकर चलते हैं और कहते हैं अपना टाइम आएगा।
और ये टाइम कभी आता नहीं क्योंकि समय के साथ – साथ बहुत कुछ होता है जैसे शादी , बच्चे इससे हमारी जिम्मेदारी बढ़ती हैं और हम अपने सपने छोड़ कर बच्चों के सपने पूरे करने में लग जाते है तब भी हमको लगता है! अपना time आएगा क्योंकि अब हमें लगने लगता है कि हमारी ख्वाहिशें अब हमारे बच्चे पूरे करेंगे और फिर वही शुरू हो जाता है ।हम क्या करते है अपनी ख्वाहिशों को बच्चों के उपर डाल देते है और उसकी अपनी क्या क्या ख्वाहिशें है ये भूल जातें है ।साथ ही हम ये भी भूल जातें हैं कि जब हम इतने से थे तो क्या क्या सोचते थे अब जब उनका टाइम आया तो वहीं सब दोहरा रहें होते है।क्योंकि हमको तब भी लगता है अपना time आएगा ? और ऐसा करते करते पूरी जिन्दगी बीत जाती है और सोचते रहते है। अपना time आएगा !!! एक न एक दिन अपना time आएगा ? और अपना टाइम आते -आते जाने कब जाने का time आ जाता है? और हम अपने साथ अपने सारे सपने लिए दुनिया ही छोड़ देते हैं???? जब हमारे सपने पूरे नहीं होते तो हम क्या करें ??1) या तो हम जिन्दगी में अपने सपनों के साथ समझौता कर लें की जो पूरा हुआ ठीक नहीं पूरा हुआ तो भी ठीक ! इस सपने को देखना ही गलत है ये मेरे लिए नहीं है। और समझौता ही एक मात्र विकल्प है ??? 2) या तो हम जैसा चल रहा है चलने दे और अपनी जिंदगी को इसी तरह गुजार दें जैसा गुजर रहा है ?3) या तो हम कुछ करें कुछ योजना बनाएं और उसको अमल में लाएं ।जितना पूंजी हो उसी हिसाब से शुरू करे क्योंकि कोई काम छोटा नहीं होता बस आप उस छोटे काम को किस मुकाम तक ले जाते हो ये मायने रखता है ।कुछ और विचार करें अपना time तो आया नहीं मगर दूसरों के सारे सपने पूरे हो रहें है ! ऐसा क्यों ? और हम जब अपने आस पास देखतें है तो तो हम पाते है कि हमारे आसपास बहुत से ऐसे उदाहरण के रूप में मौजूद हैं जो छोटी शुरुआत से ही आज बड़ी बड़ी कंपनी के मालिक है ।बस आपको करनी है एक शुरुआत और छोड़ना नहीं है ये सोचते हुए की इस को हम नई उचाईयां कैसे दे ?? और बीच बीच में अपने आपको मोटिवेट करते रहें अच्छी अच्छी पुस्तकें पढ़ें जिस काम को कर रहें होते हैं उससे संबंधित अध्ययन करें। और वक्त को समझे और उस काम को समय दें ऐसे वक्त आते हैं ,जो बहुत सारे अवसर लेकर आते है।कुछ को हम पहचान पाते है और कुछ को हम नहीं पहचान पाते
अवसर मिलने पर भी हम उसका सही से उपयोग नहीं कर पाते कुछ भी गलती हो तो बिना कुछ सोचे समझे रात दिन अपने आपको कोसते रहते है ये कोसना छोड़ कर अपनी गलती को सुधारें और अवसर को पहचाने।
और अंत में कहना है कि अपना time आएगा ये कह कर उसे ईश्वर और भाग्य के भरोसे छोड़ना ये ठीक नहीं इस क्रम को हम ही क्यों न तोड़े ? और एक छोटी शुरुआत करें ।दोस्तों शुरुआत की कोई उम्र नहीं होती ।
शुरू करें और उसे मंजिल तक पहुंचाने के लिए छोटी छोटी मंजिलें बनाए और उसको प्राप्त करें और सेलिब्रेट करें और आगे बढ़ते रहें
धन्यवादऔर आपको बधाई हो नई शुरुआत के लिए