Category Archives: कविता

दोस्तों के लिए प्रार्थना

रातों को अच्छी नींद मिले

दिन को महफिल मिले तुम्हे

ऐ दोस्त,

तुझे सुकून भरी जिंदगी मिले तुम्हे।

सुकून

मेरी चाहत है–

तुझे हासिल हो हर ओ मुकाम

जिसका हकदार तुझे ईश्वर समझे।

मेरी प्रार्थना है परम पिता से,

तू जिस ओर टेढ़ी नजर कर दे

उसकी शामत आए।

मेरी बिनती है भगवान से

तेरी प्रार्थना सबसे पहले सुने,

तेरे चेहरे पे हमेशा मुस्कान रहे।

मुस्कान

यादें

मुझे लगता था तुझे भूलना आसान होगा,

पर अब लगता है ये बोलना आसान था,

तुझे भूलना नहीं।

ये यादें जो मुझे परेशान करती हैं,

ऐसा करके मुझे हैरान करती है।

तुम्हारी बातों का मतलब शायद मैं समझूं,

तेरी बातें समझना मेरे लिए आसान नहीं।

पर तूने जो कहा मुझे याद आती है।

मेरी फितरत है जल्दी भूलने की,

पर तू है जो मुझे भुलाती नहीं।

लाख कोशिश करता हूं।

पर कोशिश रंग लाती नहीं।

तेरा यूं फिक्र करना , मुझे बार–बार सताए

जब तू नही तो मुझको ये फिक्र याद आए।

यादें

तौल के बोल

तौल के बोल,

क्या कहा , तौल के बोल

कुछ भी बोलने से पहले,

सोच के बोल, हां

तौल के बोल, क्या ?

तौल के बोल,

सोच के बोल

वक्त कितना भी बुरा चले,

समझ के बोल,

क्या ?

तौल के बोल।

बुरा वक्त

भीड़ हो या इक्का, दुक्का

दिल की बात जान के बोल,

क्या?

तौल के बोल।

बड़े हो या छोटे ,या हो कोई ऐंठे,

सबके दिल को टटोल के बोल,

क्या?

तौल के बोल,

भीड़

मोबाइल हो या फोन या हो वीडियो कॉल,

सामने वाले को ना बोल कड़वे बोल।

तौल के बोल

हां – हां भाई ठीक है

हां तौल के बोल।

Ok

अतीत

रुक रुक के ना देख पीछे

यूं अतीत को ना याद कर

सोच –सोच के यूं वक्त। ना बरबाद कर।

ना लौट के आया है, ना लौट के आएगा,

याद करके तू, चाहे रोता रह जायेगा।

तू सिख ले अतीत से ,

वर्तमान को सुंदर बना।

वर्तमान

वक्त के फितरत से, सिख तू चलना जरा,

रोक न बढ़ते कदम को,अतीत को देख कर।

वर्तमान के सुंदर पल को, जी ले तू हँस कर।

निडर बन

तू डर मत,

निडर बन

तू फैलता प्रकाश है ,आगोश में ले संसार को।

प्रकाश

तू धैर्य रख,

तू शोर्य रख,

अज्ञान को तू छोड़ कर,तू परम ज्ञानवान बन।

तू सत्य बन,तू शान बन,

वक्त के तू साथ चल, आलस्य को त्यागकर।

वक्त के साथ चल

तू अनंत बन ,

तू संत बन,

ले हाथ में मशाल तू अंधेरा के पार चल।

कर्म कर ,

कर्म वीर बन,

तू बेसहारों का सहारा बन, अपना – पराया न जान कर।

तू राही बन ,

सत्य के राह पर,

चलना सीखा तू सबको , सत्य के राह पर।

तू निशक्तों का शक्त बन,

तू देशभक्त बन,

तू डर मत ,

निडर बन।

तू अज्ञानी का ज्ञान बन, तू सत्य का प्रकाश बन।

तिलिस्मी दुनिया

किससे सिकवा करूं,

क्या शिकायत करूं,

किसको अपना कहूं,

किससे बगावत करूं,

इस तिलिस्मी दुनियां में किसको क्या कहूं।

इस घुप्प अंधेरे में,

किस चिराग को रौशनी कहूं

चिराग

किसकी नजर में रहूं ,

किस पे नजर रखूं,

इस मायावी संसार में किधर रहूं।

नजर

किससे बात करूं,

किसकी बात सुनूं,

इस अनोखे संसार में किसकी जज्बात बनूं

किससे सिकवा करूं,

क्या शिकायत करूं,

किसको अपना कहूं,

किससे बगावत करूं।

नजर आती है बात

नजर आती है बात

जब कोई बात दिल को छू ले,

नजर आती है बात।

जब किसी की बात झगड़े करवाए,

नजर आती है बात।

झगड़े

जब किसी की बात से टूटते रिश्ते जुड़ जाए ,

नजर आती है बात।

रिश्ते

जब कोई बातों का मतलब समझाए,

नजर आती है बात।

जब कोई बच्चा तोतली आवाज में ,

तुझे आवाज लगाए ,

Child

नजर आती है बात।

कठिन राहों में कोई हमसफर दे आवाज,

नजर आती है बात।

डूबते को तिनके का सहारा बन जब बढ़ाता कोई हाथ,

नजर आती है बात।

कराहते दर्द में सिर पे फेरे कोई हाथ,

नजर आती है बात।

दर्द

कोई अनजान बे – सहारों की लाठी बन जाए,

नजर आती है बात।

तूफान भरी समंदर में किनारा लग जाए नाव,

नजर आती है बात।

तूफान

गद्दारों की बस्ती

क्या कहूं

क्या कहूं

किस बात की दुहाई दूं

दिल जिगर जान की
या तेरे फरमान की।


क्या कहूं?

किस बात की बधाई दूं
पुराने गहरे जख्म की
या नए बने घाव की।

क्या कहूं?

क्या क्या दर्द दिखाऊं
अपनी आजादी की
या अपनी गुलामी की

आजादी

आजादी तो आजादी होती है दोस्तों
मगर जिसने संस्कार में गुलामी पाया हो
उसके लिए आजादी क्या ?

आजादी के परवाने आजादी के लिए क्या कर नहीं गुजरते,

लेकिन जो जन्म से ही बंधा हो, उसके लिए आजादी क्या ?

अक्सर इस दुनिया में बिरले ही मिलते हैं आजाद,

जो जान बूझ कर बंधन में बंधे हैं,

उसके लिए आजादी क्या ?