क्या लिखूं ए दिल…., है बड़ी मुश्किल
रात दिन के बात में उलझन बनी
दिन निकलता नहीं रात जाती नहीं
इश्क सी हो गई है अंधेरों से
हम तो दिन को भी रात समझते हैं
क्या लिखूं ए दिल…. ,है बड़ी मुश्किल।
बात कुछ भी नही,बड़ी बात है
बात कुछ भी नही,बड़ी बात है।
ये समझ के ना समझना ,
बड़ी बात है..