मेरी आवारगी और मेरा निक्कमापन
यारों ये अब फितरत सी हो गई लगती है।
उनकी गलियों का चक्कर ,
यारों किस्मत सी हो गई लगती है।
जो भी देखता आवारा समझता है,
क्या आपने भी आवारा समझ लिया ।
आपके खातिर ही ये फितरत बनी,
आप की चाहत ने ही निक्कमा किया।
शायद किसी दिन समझोगे इस बात को
मेरी आवारगी और मेरा निक्कमापन