रास्ते कितने भी कठिन हो,
चलना मत छोड़ ,चलना मत छोड़।
बात – बात में ही बात बढ़ती है,
बूंद – बूंद ही तालाब भरती है।
इक – इक इंट से ही घर बनता है,
छोटे – छोटे पग ही बड़ी मंजिल तक
पहुंचाती है।
इसलिए रास्ते कितने भी कठिन हो,
चलना मत छोड़ ,चलना मत छोड़।
पांव के नीचे आएंगे कभी फूल तो कभी कांटे भी
इन छोटी – मोटी दुश्वारियों से डर के
चलना मत छोड़, चलना मत छोड़।
राह में आएंगे कभी ऊंचे पहाड़, कभी गहरी खाई भी,
मंजिल दूर समझ के,
चलना मत छोड़ ,चलना, मत छोड़।
हौसले बुलंद रख, दिमाग में ठंड रख,
आने वाली परेशानियों से डर के,
चलना मत छोड़, चलना मत छोड़।
अनजान नहीं है ये जहां तेरे लिए, तूने कई वार पग रखे यहां ,
अनजानी राहों को देख कर।
चलना मत छोड़ ,चलना मत छोड़।
तेरी हिम्मत तेरा गवाही देगा,
तेरे बनाए रास्ते पे दुनिया चलेगी,
ना अपने लिए सही ,दूसरों के लिए ही सही
चलना मत छोड़ चलना मत छोड़,
तू कायर नहीं तू वीर है,
तू धिर है ,गंभीर है।
मैदान में यूं आके लड़ना मत छोड़ ,
लड़ना मत छोड़।
रास्ते कितने भी कठिन हो,
चलना मत छोड़ ,चलना मत छोड़।