माया

माया क्या है?

क्या हम सब इससे बंधे है?

क्या संसार सम्पूर्ण माया है ?

अब बात ये है कि हम माया को कैसे जाने?

इसका एक प्रत्यक्ष प्रमाण है।

की अगर कोई इंसान आपके अनुसार से कार्य नहीं कर रहा है,
तो मायावश आपको क्रोध आनी है।
अगर कोई आपका कार्य करे तो ,
या आपकी बड़ाई करे तो आप उसको पसंद करते है।

कोई आपका इज्जत करे तो आप खुश होते हो मायावश अच्छा अनुभव होता है।

यदि आपका कोई बुराई करे या आपकी बातों की अवहेलना करे तो मायावश आप उससे ईर्ष्या और द्वेष रखते हो।

आपको अपने मान अपमान का डर होता है ।

आपके लिए आपकी इज्जत ही सबसे बड़ी होती है ,
यही सब तो है माया – राग ,द्वेष ,प्रेम, घृणा ,क्रोध आदि ये सब माया के ही तो हथियार है।

और हमसब उसके शिकार है।

इसलिए तो कहते है जिसने माया का पार पाया उसके लिए मान और अपमान दोनों बराबर है।

आप उनका अपमान करो तो भी ठीक ,या आप उनको मान दो तो भी ठीक।

इनको पता है कि ये सब माया है,
और ये सब चलता रहेगा ।

One thought on “माया”

Leave a comment

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.