जाने क्या बात थी कुछ दिनों से उसने बात करना तो दूर की बात ,
मेरे तरफ देखना भी बंद कर दी थी।
मैं उसके इस बेरुखी से बहुत परेशान था ,
की मैंने आखिर क्या कह दिया ,
मेरे किस बात ने उसको चोट पंहुचाई है।
जिनको कल तक बात किए बिना चैन ना था, आज वो मेरे तरफ देखते भी नहीं,कई बार मैंने बात करने की कोशिश भी की ,लेकिन
उसने कोई जबाब नहीं दिया।
मेरी दिल की बेचैनी बढ़ती जा रही थी,
मैं रोज इस इंतजार में था कि कब वो आए जो बात हो सके,
इंतजार करते करते एक महीना बीत चुका था।
अब बर्दाश्त से बाहर हो चुका था,
अगले दिन मैं खुद ही उसके घर जाने का निश्चय किया।
उसके घर जाने के बावजूद वो मुझसे बात नहीं कर रही थी,
अंत में हारकर मैं उसके छोटी बहन से मिला और पूछा क्या बात है आपकी बहन उदास क्यों है।
तब उसने बताया कि वो किसी से छुप छुप कर मिलती और बात करती थी,।
मां ने पिताजी को बताया , और मां और पिताजी दोनों ने मिलकर कहा ,क्या कोई मुझसे बढ़ कर हो गया जो मुझसे बिना कहे तू उससे मिलती और बात करती है। या मेरे प्यार में कोई कमी रह गई?
जब तक मेरी बहन कुछ बोलती तब तक गुस्से में आकर मां ने कहा दिया अगर अब बात की या मिली तो मेरा मरा मुंह देखेगी।
उस दिन से वह ना वह उससे बात करती है, और ना ही मिलने जाती है ।
इतना सुन कर मैं वापस आ गया ।
रास्ते भर सोचता रहा कि ,क्या उसका फैसला सही था?
क्या उसके फैसले पर मुझे उसका साथ देना चाहिए?
Kuchh rishtein hote h ruhani yu sanghars kr….
Mann k bawander smbhal tu….
Dil ko jara thaam tu….
Iss rishtein ko benam hi rakh…
Faisale ka uske tu sammaan kr….
☺☺☺☺☺
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👌👌
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धन्यवाद्
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