दुनिया में सिर्फ दो तरह के इंसान का अस्तित्व है,
योगी और भोगी,
दूसरे तरीके से कहे तो इस दुनिया में दो तरह के लोग रहते है।
योगी एवम् भोगी,
अगर आप पूर्णता का अल्पकालिक अनुभव करना चाहते है
तो
आप भोगी की राह पर जा सकते है ,
या आप दीर्घकालीन पूर्णता का अनुभव करना चाहते है
तो
योगी के राह पर चल सकते है।
अगर योग और भोग दोनों का अनुभव करना चाहते है
यानी
योग और भोग,दोनों के साथ रहना चाहते है ,
तो
दोनों के बीच सही तालमेल रखना होगा,
जिससे आप संपूर्णता का अनुभव कर सके।
सारांश :- हमें जिन्दगी में संपूर्णता का अनुभव
करने के लिए योग एवम् भोग को संतुलित करना होगा
आसक्ति में विरक्ति हो।
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