
उसने दो दिनों से कुछ भी नहीं खाया था ।
अब कोई काम भी नहीं मिल रहा था ।
अब उसके पास एक रुपया भी नहीं था ,
बड़ा ही स्वाभिमानी था, कभी किसी से कुछ मांगता नहीं था ।
बिना कुछ काम किए वह किसी का कुछ भी नहीं लेता था।
उसमें ईमानदारी कूट कूट कर भरी थी।
आज तक किसी को कुछ भी कहने का मौका नहीं दिया था।
लेकिन आज जब वो दो दिन से भूखा है ,
कोई स्वाभिमान और ईमानदारी काम नहीं आ रही थी।
स्वाभिमान उसे मांगने से रोकती थी,
और ईमानदारी उसको किसी भी तरह के अनैतिक कार्य करने से रोक रही थी।
हर आने जाने वाले की ओर एक बार देखता और बिना कुछ बोले अपना सिर झुका लेता ,
जैसे कोई बड़ा गुनाह किया हो……
क्या इस तरह कोई उसकी मदद करेगा ?
या भूख से वो मर जाएगा ?
और स्वाभिमान की वजह किसी से कुछ बोलेगा नहीं
तो उसकी मदद करेगा कौन ?
या भूख से वो मर जाएगा ?.…………..
आज की परिस्थितियों का जीवंत उदाहरण, वाह👌👌
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यथार्थ परिचय भूख, मजबूर।
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Dhanywad
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