एटम बॉम् vs मक्खी

आज का विषय है घरेलू मक्खी

घरेलू मक्खी

संसार में कोई शायद ही ऐसा जगह होगा जहां मक्खी नहीं पाया जाता हो। दुनिया में कई ऐसे जगह है जहां मनुष्य नहीं है पर मक्खी है ज्यादातर मनुष्य घरेलू मक्खी से नफ़रत ही करते है।आमतौर पर हमारे घरों में मिलनेवाली मक्खियां ब्लॉफ्लाई कहलाती है इसकी पहचान शरीर भुरा होता है किन्तु उदर का रंग पीला होता है वह अपना अंडा घोड़ा के लिद पर देना पसंद करता है मगर नहीं होने पर वह गोबर मुर्गियों के मल मांस गंदगी पर भी देता है दिनभर में मादा 100से 150तक अंडे दे सकती है मक्खी का जीवनकाल बहुत थोड़े समय का होता है।यह 6 से 10 सप्ताह जीवित रह सकती है किन्तु अपने जीवन में 2300से उपर अंडे देती है मक्खी सर्व भक्षी होते है और बहुत ही खाने वाले पेटू होते है। ये दिन भर खाते रहते है और उसी खाने पर उल्टी करते है विस्टा करते है और फिर खाते है ।अब आइए हम बात करते है कि ये मक्खी एटॉम बम से किसी भी प्रकार से कम नहीं जितना नुकसान एटॉम बम नहीं करता उससे ज्यादा नुकसान ये करती है इसके द्वारा फैलाया गया बीमारियां हैजा,टायफायड, पेचिस, यक्ष्मा, सुजाक और हुक बर्म के अंडे फैलाने का काम करती है।

अब बात करते है आखिर ये बीमारी फैलाती कैसे है ?घरेलू मक्खी खुद ये बीमारियों को नहीं फैलाती बल्कि ये वाहन का कार्य करती है! मक्खी रोगियों के मलमूत्र थूक अन्य कई प्रकार के गंदगियों पर बैठती है तब उसके पैर जो चिपचिपा रहता है उसमे चिपक जाता है और उसी के साथ ये अन्य मनुष्य तक पहुंचता है इसके अलावा मक्खी जहां बैठती है वहां उल्टी और विष्ठा भी करती है उसके अंदर जो बीमारी उसके खाने से रहती है वह बाहर आकर लोगों के खाने तक पहुंचती है बचने के उपाय मक्खियों को मारना और इनके अंडे को पनपने न देना साफ सफाई रखना।

Leave a comment

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.